Thursday, February 14, 2019

बाज़ का जीवन चक्र

" मुझे अपने हर एक मिनट के प्रशिक्षण से घृणा होती थी लेकिन मैंने सोच रखा था , अभी मुझे यह दर्द सहना है ताकि पूरी ज़िन्दगी चैंपियन की तरह गुजर सकूँ " I
              - मोहम्मद अली
बाज़ जो अपने अचूक निशाने और एकाग्रता के लिए जाना जाता है I शिकार को भेदने में उसके नुकीले चोंच और फड़फड़ाती पंखो का बहुत बड़ा योगदान होता है I एशिया, अमेरिका और यूरोप महाद्वीप में पाया जाने वाला यह पक्षी अपने शिकार को पलक झपकते ही उसके अंजाम तक पंहुचा देता है I यह हमें बताता है कि अगर लक्ष्य प्राप्त करना है तो उसके लिए अपने को पूरी तरह से समर्पित कर दो लक्ष्य अवश्य प्राप्त होगा I लेकिन इंसान की तरह उसके ज़िन्दगी में भी एक ऐसा समय आता है,  जब उसे कठिन परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ता है I बाज़ की औसत उम्र करीब 70 वर्ष होती है I लेकिन 40 साल के बाद उसके नुकीले चोंच धारहीन हो जाते है और वह शिकार करने लायक नहीं रह जाते I इसके अलावा उसके तेज पंख बेजान और भारी हो जाते है और वह उड़ने लायक नहीं रह जाते I अब उसके पास सिर्फ दो विकल्प होता है पहला या तो वह भूख और प्यास से अपनी जान दे और दूसरा अपने चोंच और पंख को तोड़ दे I दूसरा विकल्प काफी कठिन और कष्टदायी होता है लेकिन बाज़ हमेशा दूसरे विकल्प को चुनता है I वह किसी पहाड़ी की ऊँची चोटी पर जाकर अपना घोसला बनाता है फिर किसी नुकीले पत्थर से रगड़कर अपने पुराने धारहीन चोंच को तोड़ता है और फिर नए चोंच आने का इंतज़ार करता है I एक बार नए चोंच आ जाने के बाद फिर अपने भारी पंखो को तोड़ता है और नए पंख आने का इंतज़ार करता है I यह पूरी प्रक्रिया काफी समय लेने वाली होती है और इस दौरान बाज़ अपने को सुरक्षित  रखता है I इस पुरे प्रक्रिया में उसे काफी दर्द और मुश्किलों  का सामना करना पड़ता है I लेकिन इस पुरे प्रक्रिया से गुजरने के बाद जो नए चोंच और पंख आते है वह बाज़ को नई ज़िन्दगी देते है I बाज़ पहले जैसा ऊँची उड़ान भरने और शिकार को भेदने की अचूक क्षमता वाला बन जाता है I बाज़ का यह जीवन चक्र काफी प्रेरित करने वाला है I हमें भी अगर अपने को तेज़ और अचूक बनाये रखना है और साथ साथ ऊँची उड़ान भरनी है I तो हमें भी बाज़ की तरह दूसरे विकल्प का चुनाव करना पड़ेगा I ज़िन्दगी में आगे बढ़ने और सफल होने के लिए कठिन परीक्षाओ से गुजरना ही पड़ेगा I 

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