Thursday, February 14, 2019

मैक्डोनाल्ड के सफलता की कहानी



" पागलपन ही जूनून कि हद को बढाती है , वरना शांत लहरे क्या कभी तूफ़ान लाती है ' I
'मैक्डोनाल्ड' यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है  I दुनिया की अग्रणी फ़ास्ट फ़ूड फर्म मैक्डोनाल्ड के आज 37,000 से ज्यादा रेस्टोरेंट दुनिया के 100 से ज्यादा देशो में अपनी सेवाएं दे रहे है I वालमार्ट के बाद दुनिया की सबसे ज्यादा रोज़गार देने वाली कंपनी है I मुख्य रूप से इस रेस्टोरेंट की पहचान इसके बर्गर की वजह से है, हालाँकि इसके अलावा भी बहुत सारे खाने-पिने  के सामान यहाँ मिल जाते है I  इतनी बड़ी कंपनी की शुरुआत कैलिफ़ोर्निया के एक छोटे से रेस्टोरेंट से हुई थी I जिसकी नीव 1940 में दो भाइयो रिचर्ड मैक्डोनाल्ड और मौरिस मैक्डोनाल्ड ने रखी थी I 1940 से लेकर 1955  तक इन दोनो भाइयो ने इस रेस्टोरेंट का संचालन किया  I इस रेस्टोरंट की सबसे बड़ी विशेषता इसका 'स्पीडी सिस्टम ' था I आज भी मैक्डोनाल्ड की सबसे बड़ी विशेषता इसका 'स्पीडी सिस्टम' ही है
                               इसके स्पीडी सिस्टम से प्रभावित होकर 1955 में रे क्रूक एक फ्रैंचाइज़ी के जरिये  इस कंपनी से जुड़ गए I रे क्रूक काफी महत्वाकांक्षी इंसान थे और वह चाहते थे की इस रेस्टोरेंट की पुरे दुनिया में फ्रैंचाइज़ी हो और इसको एक वैश्विक पहचान मिल जाये I  लेकिन दोनों भाई रिचर्ड मैक्डोनाल्ड और मौरिस मैक्डोनाल्ड रे की इस बात से सहमत नहीं थे I मैक्डोनाल्ड की पहचान उसके गुणवत्ता की वजह से था और दोनों भाई रिचर्ड मैक्डोनाल्ड और मौरिस मैक्डोनाल्ड नहीं चाहते थे कि इसकी गुणवत्ता से कोई समझौता हो इसलिए दोनों भाइयो ने फ्रैंचाइज़ी के जरिये विस्तार योजना को सिरे से मन कर दिया I
                                 महत्वाकांक्षी और आक्रामक रुख वाले रे क्रूक ने कुछ ही समय में इस कंपनी में अपने पूरा प्रभाव बना लिया I  रे ने करीब 56 साल की उम्र में मैक्डोनाल्ड ज्वाइन किया था  I इसके पहले रे ने बहुत सारे व्यसायो में किस्मत आजमाया लेकिन हर जगह सिर्फ निराशा ही हाथ लगी I यहाँ तक रे को अपने एकमात्र घर गिरवी रखना  पड़ा मैक्डोनाल्ड की फ्रैंचाइज़ी लेने के लिए, लेकिन रे ने कभी हार नहीं मानी  I कहते है कि किस्मत भी उसी का साथ देती है जो हार नहीं मानता  I रे का मानना था कि सफल होने के लिए एक मात्र चीज़ जो जरुरी है वह है 'ज़िद'  I इस 'ज़िद' के आगे सफलता को नतमस्तक होना ही पड़ता है रे ने संघर्ष करते हुए अपनी ज़िद के दम पर मैक्डोनाल्ड को उचाईयो पे पंहुचा दिया I
                              रे को लगने लगा कि दोनों भाइयो के रहते हुए मैक्डोनाल्ड को वैश्विक रूप नहीं दिया जा सकता I अब इस कंपनी को वैश्विक रूप देने का एक मात्र उपाय यही था कि इस कंपनी को खरीद लिया जाये I लेकिन रे कि आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह अभी इसको खरीद सके और दूसरी सबसे बड़ी समस्या यह थी कि दोनों भाई रिचर्ड मैक्डोनाल्ड और मौरिस मैक्डोनाल्ड इस बात के लिए तैयार भी नहीं थे I लेकिन महत्तवाकांक्षी रे को किसी भी कीमत पे मक्डोनल्ड चाहिए था  I इसके लिए रे ने निवेशकों को आमंत्रित किया और अपने विस्तार योजना को उनके सामने रखा I  निवेशकों को रे का विचार काफी पसंद आया और इस तरह रे को निवेशक मिल गए I निवेशकों से निवेश मिलने के बाद रे ने कंपनी के मूलभूत सिद्धांतो में कुछ बदलाव किया जो दोनों भाइयो को नागवार गुजरी दोनों भाइयो ने कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने के के लिए क्रूक रे को कोर्ट ले जाने कि धमकी दी I लेकिन रे ने ठान लिया था मैक्डोनाल्ड को वैश्विक पहचान देने का और इसके लिए वह हर कीमत देने को तैयार थे I निवेशकों के मिलने के बाद रे ने मैक्डोनाल्ड के संस्थापक दोनों भाइयो रिचर्ड मैक्डोनाल्ड और मौरिस मैक्डोनाल्ड को एक बड़ा ऑफर दिया  I मक्डोनल्ड को खरीदने के बदले, जो शायद दोनों भाइयो ने सोचा भी नहीं था और आखिरकर रे ने मैक्डोनाल्ड को खरीद लिया दोनों भाइयो से उसके बाद रे ने कभी पीछे मुड़के नहीं देखा I
                              दुनिया की सबसे बड़ी आय अर्जित करने वाली रेस्टोरेंट श्रृंखला मैक्डोनाल्ड को खड़ा करने के पीछे एक इंसान की ज़िद थी I जिसने उम्र के उस पड़ाव पे इसकी शुरुआत की जब इंसान रिटायरमेंट लेता है यह मिसाल है उन लोगो के लिए जो परिस्थितियों को दोष देते है अपनी विफलता के लिए I 

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