Tuesday, February 26, 2019

भारतीय ज़िनकी ज़िद ने असंभव को संभव कर दिया


मंज़िले उन्ही को मिलती है जिनके सपनो में जान होती है, पंखो से कुछ नहीं होता हौसला से उड़ान होती है I  

  1. अटल बिहारी बाजपेयी : अटल बिहारी बाजपेयी का नाम आते ही जेहन में एक ऐसे व्यक्तित्व का चेहरा उभर जाता है, जिन्होंने सफलता की नयी परिभाषा लिखी I भारतीय राजनीति में अपनी अलग पहचान रखने वाले अटल जी का 65 सालो का राजीनीतिक सफर काफी उतार - चढाव वाला रहा I  सफलता की उचाईयो को छूने वाले अटल जी का जीवन काफी संघर्षो वाला रहा I लेकिन स्वभाव से भी 'ज़िद्दी और अटल' बाजपेयी ने हर एक असफलता को न सिर्फ स्वीकारा बल्कि उसका आनंद लिया I अटल जी ने जब श्यामा प्रसाद मुख़र्जी और दीन दयाल उपाध्याय  के सपनो को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया, तो किसी ने भी उनको गंभीरता से नहीं लिया I किसी ने सोचा भी नहीं था कि 2 लोगो की पार्टी कभी दुनिया कि सबसे बड़ी राजनीतिक दल बन जाएगी  I लेकिन यह बाजपेयी का व्यक्तित्व था जो बार-बार हारने और गिरने के बाद भी अटल रहे I क्योकि उन्हें पता था यह असफलता उस मंज़िल की सीढ़ी है जहाँ पहुंचने के लिए उन्होंने सफर की शुरुआत की थी I 
  2. किशोर कुमार : भारतीय संगीत की बात हो और किशोर कुमार का नाम ना आये, ऐसा संभव नहीं I भारतीय फिल्म इतिहास में पुरुष गायन में जो मुकाम किशोर दा ने हासिल किया वह शायद ही किसी और को नसीब हो I 1960 से 1985 का दौर किशोर कुमार के नाम रहा I इस दौरान उन्होंने हज़ारो सुपरहिट गाने दिए और दोनों सुपर स्टार्स राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन की आवाज़ बन गए I लगातार 6 फिल्म फेयर अवार्ड और वह सब कुछ जो एक कलाकार के लिए सपना होता है I लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए किशोर कुमार को बहुत संघर्ष करना पड़ा I उनके शास्त्रीय संगीत का ज्ञान ना होने की वजह से कोई भी उनको काम देने के तैयार नहीं था I लेकिन किशोर कुमार की ज़िद थी एक सफल गायक बनने की और उन्होंने वह कर दिखाया I इतने महान गायक के लिए एक समय ऐसा भी रहा जब एक गाने के लिए उन्हें कोई लेने को तैयार नहीं था I लेकिन किशोर ने साबित कर दिया, अगर हौसला हो तो सब कुछ संभव है I पढ़ना जारी रखे ---
  3. जयप्रकाश नारायण : आज़ादी के बाद भारत में कांग्रेस के अलावा किसी और की सरकार बन सकती है ऐसा मज़ाक से ज्यादा कुछ नहीं था  I लेकिन यह असंभव काम कर दिखाया जयप्रकाश नारायण ने I भारतीय राजनीति में  परिवर्तन और त्याग की बात जब भी की जाती है जयप्रकाश  नारायण का नाम सबसे ऊपर आता है I जब 1975 में जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गाँधी की सत्ता को उखाड़ फेकने का संकल्प लिया I किसी ने सोचा भी नहीं था ऐसा हो सकता है, लेकिन जयप्रकाश नारायण ने ना सिर्फ इसे संभव किया I बल्कि खुद इंदिरा गाँधी को हार का सामना करना पड़ा I यह अपने आप में एक करिश्मा से काम नहीं था I हालाँकि इंदिरा गाँधी को उखाड़ फेंकने के लिए जयप्रकाश नारायण को काफी कुछ सहना पड़ा I लेकिन ज़िद थी सत्ता परिवर्तन की और उसे कर दिखाया I पढ़ना जारी रखे..
  4. मेजर ध्यानचंद : एक ऐसा खिलाडी जिसका भारतीय टीम में रहना मतलब जीत की गारंटी, जी है बात कर रहे है विश्व हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की I हॉकी के इतिहास में जो शोहरत ध्यानचंद ने हासिल की वह तक जाना किसी भी खिलाडी के लिए सपना मात्र है I यहाँ तक की जर्मनी के तानाशाह अडोल्फ हिटलर को ध्यानचंद के सामने नतमस्तक होना पड़ा I यह वाक्या है बर्लिन ओलिंपिक की जब भारतीय टीम ने जर्मनी को 16-1 से हराया I जिसमे 15 गोल अकेले ध्यानचंद ने किया था I मैच के बाद पहले तो हिटलर ने ध्यानचंद का स्टिक तोड़वाया I क्योकि उसे लग रहा था स्टिक में कुछ ऐसा है जो बॉल को आकर्षित कर लेता है लेकिन ऐसा कुछ नहीं निकला  I फिर हिटलर ने ध्यान चाँद को जर्मन आर्मी में अच्छा पोस्ट और पैसे की पेशकश  की I लेकिन ध्यानचंद ने मन कर दिया, ऐसा हिम्मत सिर्फ ध्यानचंद ही दिखा सकते थे I एक ज़िद थी ध्यानचंद की भारत को ओलिंपिक में गोल्ड मैडल दिलाने की और विश्व चैंपियन बनाने की और कर दिखाया I मेजर ध्यानचंद की अगुवाई में भारत ने लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए ओलिंपिक में लगातार अपना वर्चस्व रखते हुए गोल्ड जीता I
  5. लाल बहादुर शास्त्री : लाल बहादुर शास्त्री एक छोटे कद का इंसान और इसी छोटे कद से धोखा खाकर पाकिस्तान ने भारत पे आक्रमण कर दिया I लेकिन इस छोटे कद के इंसान ने पाकिस्तान को धूल चटाकर साबित कर दिया, युद्ध जीतने के लिए साइज नहीं ज़िद की जरुरत होती है I एक छोटे से गांव के गरीब परिवार से निकल कर भारत के प्रधानमंत्री बनने तक का सफर इतना आसान नहीं था I लेकिन इसे संभव कर दिखाया शास्त्री जी ने जब उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने  1965 के भारत पाक युद्ध में पाकिस्तान को लाहौर तक खदेड़ दिया था I  पाकिस्तान सेना के प्रमुख अयूब खान ने मीडिया के सामने स्वीकार किया था I शास्त्री जी के छोटी हाइट और सादगी से हमें यह लगा कि वह कमजोर प्रधानमंत्री है और यही समय है आक्रमण का और यह भूल पाकिस्तान के लिए घातक सिद्ध हुई I

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