Wednesday, February 13, 2019

Madan Mohan Malviya ( मदन मोहन मालवीय )

 " जो व्यक्ति अपनी निंदा सुन लेता है वह सारे जगत पर विजय प्राप्त कर सकता है " I                                                   - मदन मोहन मालवीय संक्षिप्त परिचय:जन्म : 25  दिसंबर , 1861 (प्रयाग ) भारत मृत्यु: 12 नवंबर, 1946 (प्रयाग) भारत माता-पिता : पंडित बैजनाथ मालवीय, मूना देवी शिक्षा : कलकत्ता विश्वविद्यालय, प्रयाग  विश्वविद्यालयकार्यक्षेत्र : शिक्षा, धर्म, राजनिति, पत्रकारिता, स्वंतंत्रता संग्राम, वकालत सम्मान: भारत रत्न ( मरणोपरांत )प्रारंभिक जीवन :पंडित मदन मोहन मालवीय का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रयाग में 18 दिसंबर 1861 को एक धार्मिक ब्राह्मण परिवार में हुआ था I इनके पिता पंडित ब्रजनाथ मालवीय संस्कृत के काफी बड़े विद्वान थे और शास्त्र विद्या में निपुण थे I पूरा परिवार काफी धार्मिक था, जिसका काफी बड़ा प्रभाव पंडित मालवीय पे भी पड़ा I इनकी प्रारंभिक शिक्षा वहां  के सरकारी स्कूल से हुई और उच्च शिक्षा के लिए इन्होने प्रयाग विश्वविद्यालय  और कलकत्ता विश्वविद्यालय का रुख किया और स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की I पत्रकारिता  :मालवीय जी ने अपने कैरियर की शुरुआत एक अध्यापक के रूप में की थी I लेकिन बाद में पत्रकारिता से जुड़ गए और पत्रकारिता में अलग पहचान बनाई I मालवीय जी ने प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्र 'हिंदुस्तान टाइम्स' में पूरा स्वामित्व बिरला समूह से खरीद लिया और 1924 से 1946 तक इसके अध्यक्ष बने I रहे बाद में साप्ताहिक पत्र 'हिंदुस्तान' की शुरुआत की I उसके बाद अंग्रेजी और हिंदी के कई महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं का संपादन किया जिनमे लीडर, द इंडियन ओपिनियन, हिंदी प्रदीप, अभ्युदय, धर्म प्रमुख रहे Iवकालत: वकालत की डिग्री लेने के बाद मालवीय जी ने इलाहबाद उच्च न्यायालय से वकालत का प्रैक्टिस आरम्भ किया और कुछ ही समय में उस दौर के प्रमुख वकीलों में इनका नाम आने लगा I मालवीय जी ने कभी भी पैसे के लिए वकालत नहीं किया I आज़ादी के दौरान कई क्रांतिकारियों के लिए बिना किसी शुल्क के केस लड़ा I चौरी चौरा कांड का गाँधी जी द्वारा विरोध करने के बावजूद मालवीय जी ने क्रांतिकारियों और अन्य आरोपी भारतीयों का केस मज़बूती से लड़ा और 170 में से 155 को रिहा करने में कामयाब रहे I यह काफी महत्वपूर्ण उपलब्धि रही और इसके बाद  मालवीय जी कद काफी बढ़ गया I राजनीतिक पारी:मालवीय जी ने अपने राजनीतिक पारी की शुरुआत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ किया था I कोंग्रेस के प्रमुख नेता दादा भाई नैरोजी मालवीय जी के विचारो से काफी प्रभावित हुए और उन्हें कांग्रेस में महत्वपूर्ण पद दिया I मालवीय जी चार बार (लाहौर 1909, दिल्ली 1918, दिल्ली 1932, कलकत्ता 1933) कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए I आज़ादी से पहले चार बार कांग्रेस अध्यक्ष चुने जाने वाले एकमात्र नेता थे I इसके अलावा मालवीय जी कांग्रेस द्वारा हिन्दुओ की उपेक्षा से काफी आहात थे और इसी के चलते वह हिन्दू महासभा से भी जुड़ गये I स्वंत्रतता संग्राम :पंडित मालवीय ने स्वंत्रतता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया, चाहे जहा एक तरफ अपने पत्र पत्रिकाओं से अंग्रेजी सरकार का खुलकर विरोध किया, वही दूसरी तरफ क्रांतिकारियों की तरफ से बिना किसी शुल्क के केस लड़ा I इसके अलावा अंग्रेजी सरकार के खिलाफ हो रहे आंदोलनों का नेतृत्व किया I चौरी चौरा कांड का गाँधी जी द्वारा विरोध करने के बावजूद मालवीय जी ने क्रांतिकारियों का पक्ष अदालत में मज़बूती से रखा, बल्कि 170 आरोपियो में से 155 की रिहाई कराइ I कांग्रेस में रहते हुए खिलाफत आंदोलन का मुखर विरोध किया और कांग्रेस की आलोचना की I इसके अलावा अम्बेडकर और अंग्रेजी हुकूमत के बीच हुए पूना पैक्ट का भी मुखर विरोध किया और इसी के विरोध में कांग्रेस छोड़कर नई पार्टी कांग्रेस नेशनलिस्ट पार्टी का गठन किया Iबनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी की स्थापना :मालवीय जी का सपना था, एक ऐसे शैक्षिक संस्थान के स्थापना का  जिसकी गुणवत्ता वैश्विक स्तर की हो लेकिन मूल्य भारतीय हो I इसी सपने को पूरा करने के लिए 15 सालो तक लगातार संघर्ष किया और अंतता १916 में बनारस हिन्दू विश्विद्यालय की स्थापना की गई, जो बाद में भारत में शिक्षा का मुख्य केंद्र बन गया I  वाराणसी में स्थापित किया गया यह विश्विद्यालय एशिया का सबसे बड़ा विश्विद्यालय ह, जो पूरी दुनिया में अपनी गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध है I आज भी इसको विद्वान पैदा करने का कारखाना कहा जाता है Iइसके अलाव सेंट्रल हिन्दू स्कूल और अन्य कई शैक्षिक संस्थाओ को शुरू करने में मालवीय जी का काफी बड़ा योगदान रहा I 
सामाजिक और धार्मिक कार्य :
मालवीय जी ने सामाजिक और धार्मिक कार्यो में भी काफी रूचि दिखाई I स्काउट को भारत में शुरू करने वाले लोगो में मालवीय जी भी थे I इसके अलावा धार्मिक परिवार से जुड़े होने के कारण इन्होने धर्म के प्रसार के लिए भी काफी योगदान दिया I धर्म के व्यापक प्रचार प्रसार के लिए धार्मिक पत्रिका धर्म की शुरुआत की Iसम्मान और उपलब्धि :कुछ व्यक्तिव्त्व ऐसे होते है जो सभी सम्मानों से ऊपर होते है, और मालवीय जी भी उन्ही में से थे I मालवीय जी के व्यक्तित्व से प्रभावित होकर रविंद्र नाथ टैगोर ने उन्हें 'महामना ' (सुपर ग्रेट) की उपाधि दी I 2014 में भारत सरकार द्वारा मालवीय जो को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न ' देने की घोषणा की Iमृत्यु : पंडित मदन मोहन मालवीय की मृत्यु 12 नवंबर 1946 (उत्तर प्रदेश )  को प्रयाग में हो गई I 

 

1 comment:

  1. पंडित मालवीय का जीवन वास्तव में आज के युवाओं को प्रेरित करने वाला है I

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