Thursday, March 28, 2019

जयप्रकाश नारायण- भारतीय राजनीति के किंग मेकर

भारतीय राजनीति में  कुछ नेता ऐसे हुए जिन्होंने सत्ता के शिखर को छुआ और कुछ ऐसे जिन्होंने उन्हें सत्ता के शिखर तक पहुंचाया I जयप्रकाश नारायण का भी नाम उन नेताओ में आता है, जिन्होंने किंग मेकर बनकर मोरार जी देसाई के नेतृत्व 1977 में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई I जयप्रकाश नारायण को भारतीय राजनीति में त्याग और समर्पण के लिए याद किया जाता है I जयप्रकाश नारायण का नाम लेते ही एक ऐसे मज़बूत व्यक्तित्व का चेहरा उभर के सामने आता है, जिसने अपनी जिद्द से कांग्रेस के अभेद माने जाने वाले सिंहासन को जड़ से हिला दिया और सत्ता से कांग्रेस को उखाड़ फेंका I
जन्म- जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर, 1902 बिहार के सारण जिले में ( अब यह जगह उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का हिस्सा ) में एक कायस्थ परिवार में हुआ था I जयप्रकाश के पिता हरसू दयाल सरकारी मुलाज़िम और माता फूल रानी देवी गृहणी थी I जयप्रकाश नारायण की प्रारंभिक शिक्षा गांव से ही हुई और माध्यमिक शिक्षा और स्कूलिंग पटना से I सिर्फ 18 साल की उम्र में जयप्रकाश नारायण की शादी प्रभावती देवी से हुई I प्रभावती देवी शादी के समय सिर्फ 14 साल की थी, जिन्होंने आज़ादी के लिए चलाये गए आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया I आज़ादी के आंदोलन के दौरान उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया और भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद द्वारा स्थापित बिहार विद्यापीठ में दाखिला ले लिया I जयप्रकाश नारायण ने  ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकने के लिए शुरू किये गए सविनय अवज्ञा आंदोलन, असहयोग आंदोलन और भारत छोडो आंदोलन में भाग लिया और कई बार गए जेल गए I
उच्च शिक्षा- बिहार विद्यापीठ में पढाई के दौरान ही जयप्रकाश नारायण ने उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाने का निर्णय लिया I साल 1922 में जयप्रकाश नारायण अमेरिका के कलिफोर्निआ पहुंचे और 1923 में बर्कले (बर्कले)  में दाखिला लिया I इस दौरान अपनी कॉलेज की फीस भरने के लिए जयप्रकाश नारायण ने कसाईखाना और कारखाना में मज़दूर की तरह काम किया I लेकिन फिर भी फीस न भर पाने की वजह से जयप्रकाश नारायण को बर्कले (बर्कले) छोड़ना पड़ा और लोवा विश्विद्यालय में दाखिला लेने के लिए मज़बूर होना पड़ा I  जयप्रकाश नारायण की ज़िन्दगी का ये वो दौर था, जब उन्होंने मज़दूरों के साथ काम किया और उनकी समस्याओं को काफी करीब से देखा और महसूस किया I
रूसी क्रांति का प्रभाव (Influenced by Russian revolution) - अमेरिका में पढाई के दौरान उन्होंने 1917 में हुए रूसी क्रांति के बारे में सुना I समाजशास्त्र में गहन रूचि के कारण जयप्रकाश नारायण ने रुसी क्रांति के कारण ,सफलता और प्रभाव का गहन अध्ययन किया और रुसी क्रांति में बड़ी भूमिका अदा करने वाले कार्ल मार्क्स की किताब 'दास कैपिटल' पढ़ा I 'दास कैपिटल' का जयप्रकाश नारायण के ऊपर काफी बड़ा प्रभाव पड़ा I इसी दौरान जयप्रकाश नारायण वामपंथी विचारधारा से ताल्लुक रखने वाले एम. एन. रॉय के संपर्क में आये I जयप्रकाश नारायण ने समाजवाद के ऊपर कई लेख और शोधपत्र प्रकाशित किया जिनमे 'सोशल वारिएशन(Social Variation)' को साल का सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र घोषित किया गया I
आज़ादी के आंदोलन में उनकी भूमिका- 1929 में भारत लौटने के बाद जयप्रकाश नारायण ने कांग्रेस ज्वाइन कर लिया और आज़ादी की लड़ाई में सक्रिय रूप से कूद पड़े I भारत छोडो आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लेने के लिए उन्हें कई बार जेल भेजा गया I इस दौरान उनकी मुलाकात राममनोहर लोहिया, बसावन सिन्हा, अशोक मेहता जैसे नेताओ से हुई जो आगे के आंदोलन में उनके साथ खड़े हुए I आज़ादी की लड़ाई के दौरान जयप्रकाश नारायण कांग्रेस के अलावा अन्य कई संगठनो से जुड़े और  नेतृत्व किया I 1947 में आज़ादी के बाद जयप्रकाश नारायण रेलवे मज़दूरों के सबसे बड़े संगठन 'आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (All India Railways Mens Fe)' के अध्यक्ष बने और 1953 तक इस पद पर बने रहे I
नव -निर्माण आंदोलन- गुजरात में आर्थिक मंदी, बेतहासा बढ़ती कीमतें और भ्रस्टाचार के विरोध में गुजरात के मध्यम वर्ग ने विद्रोह शुरू किया जिसे 'नव -निर्माण आंदोलन' के नाम से जाना गया I नव -निर्माण आंदोलन की शुरुआत 1973 में हुई जब अहमदाबाद इंजीनियरिंग कॉलेज और गुजरात विश्वविद्यालय के छात्रों ने फीस बढ़ोतरी के विरोध में हड़ताल कर दिया I गुजरात के छात्रों ने आंदोलन को व्यापक रूप देने के उद्देस्य से जयप्रकाश नारायण को इस आंदोलन के नेतृत्व के लिए आमंत्रित किया I जयप्रकाश नारायण ने आमंत्रण स्वीकार कर लिया और छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया I इसी दौरान गुजरात में साल 1973 में चिमनभाई पटेल मुख्यमंत्री बने, लेकिन उनके भ्रष्टाचार में लिप्त होने और कुछ गलत निर्णयों की वजह से राज्य में मंहगाई बढ़ने लगी I जिसकी वजह से मध्यम वर्ग आक्रोश में था I जयप्रकाश नारायण ने मध्यम वर्ग को भी छात्र आंदोलन से जुड़ने का आह्वान किया I जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर गुजरात के मध्यम वर्ग इस आंदोलन से जुड़ गए I मध्यम वर्ग के इस आंदोलन से जुड़ने के साथ ही इस आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया और सरकार को झुकना पड़ा I गुजरात के मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा और विधान सभा भंग कर दी गई I
बिहार आंदोलन- 1974 में बिहार में तेजी से बढ़ती बेरोज़गारी, मंहगाई और भ्रस्टाचार के विरोध में आंदोलन शुरू किया I जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में सरकार के खिलाफ शुरू किये गए इस शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान बलप्रयोग और पुलिस द्वारा लाठीचार्ज के कारण काफी लोग मारे गए I जिसके बाद इस आंदोलन ने पहले राज्यव्यापी और फिर देशव्यापी आंदोलन का रूप ले लिया I बिहार में इस आंदोलन से सत्येंद्र नारायण सिन्हा, दिग्विजय नारायण सिंह जैसे और भी नेता जुड़ गए और सरकार को बर्खास्त करने की मांग करने लगे I इसी बिहार आंदोलन ने बाद में भारत में आज़ादी के बाद के सबसे बड़े आंदोलन का रूप ले लिया, जिसे 'समग्र आंदोलन' के नाम से जाना जाता है I
समग्र आंदोलन- जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में पहले नव-निर्माण आंदोलन, गुजरात फिर बिहार आंदोलन ने सरकार की नींव को हिला कर रख दिया था I सरकार ने जितना ही बिहार आंदोलन को दबाने का प्रयास किया यह उग्र होता ही गया I जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में यह आंदोलन पुरे देश में फ़ैल गया I तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने इस आंदोलन को कुचलने के लिए बलप्रयोग करना शुरू कर दिया, जिससे यह आंदोलन और उग्र होता गया I जयप्रकाश नारायण ने पुरे देश के छात्रों से कांग्रेस सरकार के तानाशाही रवैये के खिलाफ एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया I इस आह्वान का व्यापक असर दिखा और पुरे देश से छात्रों ने इस आंदोलन में सक्रिय रूप से भागीदारी दिखाई I छात्रों के जुड़ने के बाद आंदोलन और भी उग्र हो गया पुरे देश में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन होने लगा और सरकार को बर्खास्त करने की मांग उठने लगी I
आपातकाल- साल 1975 मे इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 1971 के आम चुनावों में प्रधानमंत्री इंंदिरा गांधी द्वारा सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का दोषी ठहराया गया और रायबरेली से उनके निर्वाचन को रद्द कर दिया और 6 साल तक किसी भी तरह के चुनाव के लिए प्रतिबंधित कर दिया। अदालत मे यह केस 1971 के आम चुनाव में रायबरेली लोक सभा सीट से इंंदिरा गाँधी के खिलाफ विपक्ष के उम्मीदवार राजनारायण ने दायर की थी। आजाद भारत में इस तरह का यह पहला मामला था और इस साहसिक निर्णय के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जगमोहन लाल सिन्हा को विपक्ष समेत पूरे भारत ने सैल्ययू किया । एक तरफ समग्र आंदोलन और दूसरे तरफ अदालत के फैसले के कारण इंदिरा गाँधी को अपनी सत्ता हाथ से जाती दिखी । अपने को बचााने के लिए इंंदिरा गांधी ने भारत के इतिहास में पहली बार संविधान की धारा 352 के तहत 'आंतरिक आपातकाल' घोषित कर दिया गया I इस तिथि को भारत के इतिहास में 'काला दिन' माना जाता है I आपातकाल के बाद सभी तरह के चुनावो पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया, नागरिको के मुलभुत अधिकार छीन लिए गए, मीडिया पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया, हर एक संस्था और व्यक्ति जो सरकार के खिलाफ बोलता उसे जेल में डाल दिया जाता I अधिकारों का केन्द्रीयकरण कर दिया गया मतलब राज्य सरकार के अधिकार अब  हस्तांतरित हो गया I एक तरफ जहाँ इंदिरा गाँधी हर तरीके से आंदोलन को कुचलने पर लगी हुई थी, दूसरी तरफ जयप्रकाश नारायण झुकने को तैयार नहीं थे I उन्होंने इंदिरा गाँधी सरकार खिलाफ के आंदोलन और तेज कर दिया I जयप्रकाश नारायण ने 'इंदिरा हटाओ देश बचाऒ का नारा दिया, जयप्रकाश नारायण को गिरफ्तार कर लिया I गया इसके बाद अटल बिहारी बाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नाडिस जैसे नेताओ ने आंदोलन की कमान संभाली, इस सभी नेताओ को भी गिरफ्तार कर लिया गया I धीरे- धीरे करके सभी विपक्षी नेताओ को कारागार में डाल दिया गया I I लेकिन यह आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा था I 21 महीने तक चले इस आंदोलन के दौरान लाखो लोगो को गिरफ्तार कर लिया गया I यह 21 महीने आज़ादी के बाद के सबसे बुरे महीने साबित हुए I
सत्ता  परिवर्तन- आपातकाल लगाने के बाद भी आंदोलन थमा नहीं और अन्तत इंदिरा गाँधी को जयप्रकाश नारायण के आगे झुकना पड़ा I 21 महीने के बाद 21 मार्च,1977 को आपातकाल हटा दिया गया और जयप्रकाश नारायण सहित सभी नेताओ को रिहा कर दिया गया I जयप्रकाश नारायण की मांग पर देश में आम चुनाव की  घोषणा की गई I जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गाँधी को सत्ता से उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया I लेकिन यह अविश्वसनीय प्रतीत हो रहा था, क्योकि भारत में गैर कांग्रेसी सरकार की कल्पना भी करना हास्यास्पद लग रहा था I लेकिन जयप्रकाश नारायण कमर कस चुके थे जयप्रकाश नारायण ने सभी विपक्षी दलों को एक झंडे के नीचे लाने का आह्वान किया I जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर वामपंथी पार्टियों को छोड़ सभी प्रमुख विपक्षी दल जनता पार्टी के बैनर के नीचे आ गए I 1977 में हुए आम चुनाव में अविश्वसनीय तरीके से कांग्रेस की हार हुई और जनता पार्टी पूर्ण बहुमत से जीत कर आयी I यहाँ तक की  इंदिरा गाँधी  और उनके बेटे संजय गाँधी खुद चुनाव हार गए I पुरे देश से एकमत में आवाज़ उठी कि इस अविश्वसनीय और अविश्मरणीय जीत के नायक रहे जयप्रकाश नारायण को प्रधानमंत्री बनाया जाये I लेकिन जयप्रकाश नारायण ने बड़ी विनम्रता से यह कहते हुए कोई भी पद लेने से इंकार कर दिया कि मेरा आंदोलन इस तानाशाही सरकार को हटाने के लिए था, मेरा उद्देस्य पूरा हुआ देश को लोकतान्त्रिक सरकार मिली मुझे सत्ता में कोई दिलचस्पी नहीं है I भारतीय राजनीति में त्याग और समर्पण का शायद ही इस तरह का दूसरा कोई मिसाल हो I यहाँ तक की नई सरकार के गठन और निर्णयों में भी कभी हस्तक्षेप नहीं किया I
मृत्यु- सामान्य जिंदगी व्यतीत करते हुए 8 अक्टूबर, 1979 को पटना में 77 साल की उम्र में जयप्रकाश नारायण का देहावसान गया I
सम्मान और अवार्ड- 
  1. 1965 में उन्हें लोक सेवा के लिए 'रमन मेग्सेसे ' अवार्ड से सम्मानित किया गया जिसे एशिया का नोबेल पुरष्कार माना जाता है I
  2. 1999 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया I
  3. लोगो के बीच लोकप्रिय होने और उनके लिए संघर्षरत होने के कारण उन्हें 'लोकनायक' की उपाधि दी गई है I
  4. जयप्रकाश नारायण को ' जेपी' के नाम से जानते है I
  5. प्रकाश झा द्वारा उनकी जिंदगी पर 'लोकनायक' फिल्म बनाई गई I
  6. उनकी जिंदगी पर आधारित सौ से ज्यादा किताबे प्रकाशित की जा चुकी है I
  7. पटना एयरपोर्ट का नामकरण उनके नाम से किया गया है I
  8. कई योजनाओ, ट्रेनों और सरकारी संस्थाओ का नामकरण उनके नाम पर किया गया है I


Saturday, March 23, 2019

किशोर कुमार- मिलेनियम सिंगर

"किशोर कुमार ने जब भी किसी के साथ गाना गया, चाहे वह पुरुष गायक हो या महिला उस गाने में सिर्फ किशोर कुमार ही छाये रहे " I 
                                            - जावेद अख्तर 
किशोर कुमार एक ऐसा नाम जो पर्याय है भारतीय पार्श्व गायन का बिना भारतीय संगीत अधूरा है I एक ऐसा बहुमुखी कलाकार जो एक बेहतरीन गायक होने के साथ-साथ एक बेहतरीन अभिनेता, संगीतकार, निर्माता, निर्देशक और गीतकार भी थे I तक़रीबन तीन दशक तक भारतीय सिनेमा पर एकछत्र राज करने वाले किशोर कुमार एक अच्छे कलाकार के अलावा ज़मीन से जुड़े हुए एक अच्छे इंसान थे I
प्रारंभिक जीवन-
भारतीय सिनेमा के शिखर पुरुष किशोर का जन्म मध्य प्रदेश के खंडवा में 4 अगस्त,1929 को एक बंगाली परिवार में हुआ था I इनके पिता कुंजलाल गांगुली एक वकील और माता गौरी देवी गृहणी थी I किशोर कुमार के बचपन का नाम आभाष कुमार गांगुली था और किशोर कुमार अपने चार भाई-बहनो अशोक कुमार, अनूप कुमार, गीता देवी में सबसे छोटे थे I अशोक कुमार भी भारतीय सिनेमा में बहुत बड़े नाम है और इन्हे भारतीय सिनेमा के लिए सर्वोच्च सम्मान 'दादा साहब फ़ालके ' दिया जा चूका है, दूसरे भाई अनूप कुमार ने भी कुछ फिल्मो में अभिनय किया I किशोर कुमार का प्रारंभिक जीवन खंडवा में ही बीता किशोर कुमार की शिक्षा-दीक्षा भी खंडवा से ही हुई I
 फ़िल्मी करियर (संघर्ष का दौर)- 1940 के दशक में किशोर कुमार के बड़े भाई अशोक कुमार भारतीय सिनेमा में अभिनय के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुके थे, और यही कारण है किशोर कुमार के परिवार का मुंबई आना- जाना लगा रहता था I किशोर कुमार का बचपन का शौक गायक बनने का था और उस समय के महान गायक कुन्दनलाल सहगल के आवाज़ की नक़ल करते थे I किशोर कुमार कुंदन लाल सहगल को ही अपना गुरु मानते थे I लेकिन अशोक कुमार चाहते थे कि किशोर कुमार अभिनेता बने I अशोक कुमार के सिफारिश पर किशोर कुमार को कुछ फिल्मो में अभिनय और गायन का मौका मिला, जिनमे प्रमुख थे 'शिकारी' और 'ज़िददी I 1946 से 1955 के बीच 20 से ज्यादा फिल्मो में किशोर कुमार ने अभिनय और गायन किया , लेकिन ज्यादातर फिल्मे फ्लॉप रही I कुछ चली भी तो किशोर कुमार को कोई खाश पहचान नहीं मिला I 1955 के बाद आयी फिल्म 'नौक़री' किशोर कुमार के लिए काफी अच्छी रही और इनके अभिनय को सराहा गया I फिर कुछ और फिल्मो जैसे 'बाप रे बाप' की  वजह से अभिनय में किशोर कुमार को पहचाना जाना लगे I
                                                  किशोर कुमार अपने अभिनय से संतुष्ट नहीं थे, उन्हें कहीं ना कहीं यह लग रहा था कि वह अपने सपने को दफ़न कर रहे है I लेकिन उनके बड़े भाई अशोक कुमार की ज़िद्द थी किशोर कुमार को अभिनेता बनाने की I अशोक कुमार ने हालाँकि शुरूआती दौर में किशोर कुमार को गाने का मौका दिलाया काफी फिल्मो में लेकिन लोगो को किशोर कुमार की आवाज़ पसंद नहीं आयी I निर्माता- निर्देशक भी अब किशोर कुमार को गायन में मौका नहीं देना चाहते थे, जिसके दो प्रमुख कारण थे पहला किशोर कुमार को शास्त्रीय संगीत की जानकारी नहीं थी जिसके बिना गायन संभव नहीं और दूसरा किशोर कुमार की अपनी कोई आवाज़ नहीं थी वह कुन्दनलाल सहगल की नक़ल करते थे I उस दौर के  प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक ने यह तक कह दिया कि तुम खंडवा वापिस चले जाओ तुम्हारे बस का गायन और अभिनय नहीं है I उस समय के प्रसिद्ध संगीतकार सचिनदेव बर्मन ने किशोर कुमार की आवाज़ सुनी और काफी प्रभावित हुए I सचिनदेव बर्मन ने किशोर कुमार को कुन्दनलाल सहगल की नक़ल करने की बजाय खुद की ओरिजिनल आवाज़ में गाने का सुझाव दिया और फिर किशोर कुमार ने अपनी स्वाभाविक आवाज़ में गाना शुरू किया I 1964 में आयी फिल्म 'दूर गगन की छाँव में ' का एक गीत ' आ चल के तुझे मैं लेके चलु एक ऐसे गगन के तलें' ज़बरदस्त हिट हुआ I फिर एक के बाद एक लगातार हिट  गानों ने किशोर कुमार को शिखर पे पहुंचा दिया, जहाँ वह मरते दम तक अडिग रहे I 1964 से लेकर 1987 का दौर किशोर कुमार के नाम रहा इस दौरान उनके गाने लोगो के सर चढ़ कर बोले I
फ़िल्मी करियर ( एक गायक के रूप में )- किशोर कुमार ने उस दौर के लगभग सभी प्रमुख अभिनेताओं संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, देव आनंद, विनोद खन्ना, शशि कपूर,धर्मेंद्र, जीतेन्द्र, मिथुन चक्रवर्ती, ऋषि कपूर, विनोद महरा, रजनीकांत, अनिल कपूर, संजय दत्त, सनी देओल, राकेश रोशन, दिलीप कुमार, शम्मी कपूर, के लिए अपनी आवाज़ दी I भारतीय सिनेमा के दोनों सुपरस्टार्स को तो किशोर के आवाज़ से ही पहचान मिली और उन्हें इस मुकाम तक पहुंचने में किशोर का बहुत बड़ा हाथ था I शास्त्रीय संगीत की कोई जानकारी न होने के बावजूद किशोर कुमार ने हर तरह के गाने गाये I किशोर कुमार की शैली बड़ी अनोखी थी वह जब भी किसी अभिनेता के लिए गाना गाते थे, लोगो को लगता उस अभिनेता की खुद की आवाज़ है I हर एक गाने को गाने का उनका अपना अलग स्टाइल था, जो शायद ही किसी  और गायक में देखने को मिली हो I किशोर कुमार ने उस दौर के सभी प्रमुख संगीतकारों सलिल चौधरी, खेमप्रकाश, हेमंत कुमार, सचिन देव बर्मन के साथ काम किया, लेकिन राहुलदेव बर्मन के साथ उनकी जोड़ी सबसे ज्यादा हिट रही I अपने 30 सालो के करियर में हिंदी, बंगाली, पंजाबी सहित 10 से ज्यादा भाषाओ के 1,200 से ज्यादा फिल्मो में करीब 2,700 से ज्यादा गाने गाये जो, अपने आप में उनकी महानता को बताता है I
फ़िल्मी करियर (एक अभिनेता के रूप में )-
किशोर कुमार ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत एक अभिनेता   के तौर पर ही की थी I 1946 से लेकर 1987 तक तक़रीबन 90 फिल्मो में किशोर कुमार ने अभिनय किया और एक अमिट छाप छोड़ा I मि. एक्स इन बॉम्बे, पड़ोसन, चलती का नाम गाड़ी, दिल्ली का ठग, झुमरू, जालसाज़ जैसे फिल्मो से उन्होंने अभिनय का लोहा मनवाया I
फ़िल्मी करियर (एक निर्माता- निर्देशक, गीतकार और संगीतकार के रूप में )- किशोर कुमार बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे I गायन और अभिनय के अलावा काफी सफल फिल्मो का निर्देशन भी किया और कुछ फिल्मो में  गीतकार और संगीतकार के तौर पे अपनी पहचान बनाई I ' चलती का नाम  गाड़ी', 'झुमरू' जैसे फिल्मो का निर्देशन कर किशोर कुमार ने निर्देशन में अपनी अलग पहचान बनाई I
वैवाहिक जीवन-
किशोर कुमार का फ़िल्मी करियर जितना ही शानदार रहा उनकी व्यक्तिगत जिंदगी उतनी ही उतार-चढाव वाली रही I किशोर कुमार ने चार शादियां की लेकिन एक भी सफल नहीं रही किशोर कुमार की शादी 1950 में बंगाली अभिनेत्री रुमा घोष से हुई थी, जो सिर्फ 8 सालो तक चली I किशोर कुमार ने दूसरी शादी 1960 में हिंदी फिल्मो की मशहूर अभिनेत्री मधुबाला से की, जो मधुबाला के मृत्यु के साथ ही ख़तम हो गई I 1976 में किशोर कुमार ने तीसरी शादी योगिता बाली से की जो सिर्फ दो साल चली I 1980 में किशोर कुमार ने चौथी शादी लीना चन्द्रावरकर से की I किशोर कुमार के दो बेटे है पहली पत्नी रुमा घोष से अमित कुमार जो बाद में मशहूर गायक बने और लीना चंद्रावरकर से सुजीत कुमार I
मृत्यु-
किशोर कुमार की जब मृत्यु हुई (13 अक्टूबर,1987 ) उस समय वह अपने करियर के उचाईयों पर थे और एक फिल्म का निर्देशन भी कर रहे थे I अपने अंतिम दिनों में लता मंगेशकर को दिए एक इंटरव्यू के दौरान किशोर कुमार ने कहा था कि उनकी इच्छा है अब जबकि वह अपनी करियर की उचाईयों पर है तो मुंबई हमेशा के लिए छोड़ दे और वापिस खंडवा चले जाये, इस फ़िल्मी नगरी से दूर लेकिन उनकी यह इच्छा  नहीं हो सकी I
किशोर कुमार के बारे में कुछ अनसुने तथ्य- 
  • बहुत कम लोग जानते है कि आवाज़ का यह जादूगर बचपन में तोतला था उनके बड़े भाई अशोक कुमार ने बताया था कि एक बार किशोर कुमार के पैर की एक ऊँगली कट गई जिसके कारण किशोर कुमार रोते रहते थे जिससे उनकी आवाज़ साफ़ हो गई I
  • किशोर कुमार ने राजेश खन्ना के लिए 92 फिल्मो में करीब 250 से ज्यादा गाने गाये जो अपने आप में एक रिकॉर्ड  है I
  • किशोर कुमार को 8 बार फिल्म फेयर अवार्ड मिला जो अब तक का रिकॉर्ड है I
  • किशोर कुमार 21 बार फिल्म फेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया जो अब तक का रिकॉर्ड है I
  • भारतीय सिनेमा के इतिहास में किशोर कुमार एकमात्र गायक थे, जिन्होंने संगीत की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी, बावजूद इसके किशोर कुमार ने हर तरह के गीत गाये I  
  • अभिनेता आते-जाते रहे लेकिन किशोर कुमार लगातार 25 सालो तक फिल्म इंडस्ट्री पे छाये रहे I जिस समय किशोर कुमार की मृत्यु हुई, वह अपनी करियर की उचाईयो पर थे I
  • 1975 में देश में आपातकाल के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने किशोर कुमार से अपनी पार्टी के लिए कुछ गीत गाने को बोला जिसे किशोर कुमार ने मना कर दिया I जिसके कारण आल इंडिया रेडियो पर उनके गाने को प्रतिबंधित कर दिया गया था I
  • इतनी शोहरत के बावजूद किशोर कुमार का अंतिम समय काफी अकेलेपन में बीता पत्रकार प्रीतीश नंदी को 1985 में दिए इंटरव्यू के दौरान किशोर कुमार ने कहा था कि करियर के उचाईयों पर होने के बावजूद आज मैं अकेला हु और सिर्फ यह फूल ही है जो मेरे सच्चे साथी है I
  • किशोर कुमार मुंबई की भागदौड़ से परेशान हो चुके थे लता मंगेशकर को दिए इंटरव्यू के दौरान किशोर कुमार ने खंडवा वापिस जाने की इच्छा ज़ाहिर की थी I
  •  किशोर कुमार कहा करते थे फिल्म इंडस्ट्री के लोग दोहरे चरित्र वाले है और खंडवा के लोगो जैसे नहीं है I
  • लता मंगेशकर ने अपने जीवन में एकमात्र इंटरव्यू किशोर कुमार का ही लिया था I
  • अभिनेता आते-जाते रहे लेकिन किशोर कुमार लगातार 25 सालो तक फिल्म इंडस्ट्री पे छाये रहे I
  • किशोर कुमार की होम प्रोडक्शन फिल्म ' चलती का नाम गाड़ी ' काफी सफल रही और इस फिल्म में किशोर कुमार के साथ उनके दोनों भाइयो अनूप कुमार और अशोक कुमार ने भी किया I
  • किशोर कुमार की होम प्रोडक्शन फिल्म ' चलती का नाम गाड़ी ' की शूटिंग के दौरान ही किशोर कुमार और मधुबाला नजदीक आये और बाद में शादी की I
  • किशोर कुमार सिद्धांतवादी इंसान थे जो किया अपनी शर्तो पे किया I 
सम्मान और  पुरष्कार- वैसे तो कुछ शख्शियत ऐसे होते है जो हर सम्मान और पुरष्कार से ऊपर होते है, किशोर कुमार भी उन्ही में से थे I फिर भी उनको दिए गए सम्मानों की अगर बात करे तो-

  • फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड 1970 ( रूप तेरा मस्ताना ) फिल्म- आराधना
  • फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड 1971  ( दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा  ) फिल्म- अमानुष 
  • फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड 1979  ( खाइके पान बनारस वाला ) फिल्म- डॉन 
  • फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड 1981  ( हज़ार रहे मुड़के देखे ) फिल्म- थोड़ी सी बेवफाई 
  • फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड 1983  ( पग घुंघरू बांध ) फिल्म- नमक हलाल 
  • फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड 1984  ( अगर तुम न होते  ) फिल्म- अगर तुम न होते 
  •  फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड 1985  (मंज़िले अपनी जगह ) फिल्म- शराबी 
  • फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड 1986  ( सागर किनारे ) फिल्म- सागर 
  • 1971 में फिल्म आराधना के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवार्ड 
  • 1972  में फिल्म अंदाज़ के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवार्ड 
  • 1974  में फिल्म हरे रमा हरे कृष्णा के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवार्ड
  • 1975  में फिल्म कोरा कागज़ के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवार्ड 
  • इसके अलावा मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उनके सम्मान में हर साल किशोर कुमार अवार्ड दिया जाता है I 
  • अनुराग बासु द्वारा उनकी बायोपिक बनाई जा रही है जिसमे मुख्य भूमिका रणबीर कपूर की होगी  I

Thursday, March 21, 2019

गरीब बनाम अमीर- आदतों का तुलनात्मक अध्ययन

" गरीब लोगों के पास बड़ा टेलीविजन होता है जबकि अमीर लोगों के पास बड़ा पुस्तकालय ".
                                                                            - जिम रॉन 
नेपोलियन हिल की बेस्ट सेलर किताब 'थिंक एंड ग्रो रिच ' में हिल ने जब सफल और अमीर लोगो की आदतों का अध्ययन किया, तो पाया कि वह सफल और अमीर इसलिए है क्योकि उनकी सोच अमीरो वाली है I इंसान की जिस तरह की आदते होती है और वह जिस तरह की सोच रखता है, निश्चित रूप से वह उसी तरीके से बन जाता है I इस किताब को पढ़ने से पहले मुझे भी यही लगता था कि सफल होना या अमीर होना भाग्य बात है, लेकिन इस किताब को पढ़ने के बाद मुझे समझ आया कि अगर कोई सफल या अमीर है तो वह इसलिए क्योकि उसकी सोच वैसी है I इस किताब के अलावा रोबर्ट कियोसोकि द्वारा लिखित किताब '  रिच डैड पुअर डैड ' का  अध्ययन किया, तो गरीब मानसिकता वाले लोग और अमीर मानसिकता वाले लोगो में कुछ सामान्य अंतर जो मुझे समझ में आया  वह है I

  1. बचत की आदत (Saving habit)- दुनिया के तीसरे सबसे अमीर इंसान और निवेशक वारेन बफेट के अनुसार " इंसान को बचत के बाद बचे पैसे को खर्च करना चाहिए , नाकि खर्च के बाद बचे पैसे को बचत करना चाहिए" I एक गरीब मानसिकता वाला इंसान हमेशा अपनी कमाई में से पहले खर्च करता है और अगर कुछ बचा तो ही बचत के बारे में सोचता है, जबकि अमीर इंसान पहले अपनी कमाई में से बचत के लिए पैसे निकाल लेता है और बचे हुए पैसे को खर्च करता है  I साल 2008 की बात है मै जहाँ रहता था उसके ठीक सामने दो लोग किराये के मकान में रहा करते थे मिस्टर गुप्ता और मिस्टर सिन्हा I मिस्टर गुप्ता की महीने की कमाई मिस्टर सिन्हा से बिलकुल आधी थी, लेकिन मिस्टर गुप्ता की आदत थी अपनी कमाई का 25% बचत करना उसके बाद ही वह बाकि खर्चो के बारे में सोचते थे I मिस्टर सिन्हा का स्वभाव बिलकुल विपरीत था वह पहले खर्च करते थे फिर अगर कुछ बचा तो बचत करते थे I आज 11 साल बाद जब उनसे मिला तो मिस्टर सिन्हा आज भी किराये के मकान में रहते है, जबकि मिस्टर गुप्ता ने अपना घर ले लिया I यह कहानी सिर्फ मिस्टर गुप्ता और मिस्टर सिन्हा की नहीं है, आपको अपने आसपास बहुत सारे ऐसे लोग मिल जायेंगे जो अच्छा कमाने के बावजूद वित्तीय रूप से परेशान रहते है I 
  2. निवेश की आदत (Investment habit) - गरीब मानसिकता वाले लोग के पास अगर कुछ बचत है भी तो हमेशा उसको अपने पास रखेंगे या ऐसी जगह निवेश करेंगे जहाँ जोखिम ना हो I जबकि अमीर मानसिकता वाले लोग हमेशा अपने बचत को वहां लगाते है जहाँ से उन्हें अच्छी आय हो I अर्थात हमे सिर्फ बचत  ही नहीं करना है बल्कि सही जगह निवेश भी करना है I चलिए एक उदहारण से इसे समझते है, चार दोस्त अमित, रवि, प्रीति और अंशु जिन्होंने अपनी बचत की रकम ₹1,00,000 अलग- अलग जगह निवेश किया I  अमित ने बचत की रकम अपने पास ही रखी क्योकि वह किसी तरह का जोखिम लेने को तैयार नहीं था, रवि भी जोखिम से बचना  चाहता था इसलिए बैंक के सेविंग अकाउंट में यह जमा कर दिया जहाँ से उसे 4 % ब्याज मिलता है, प्रीति थोड़ा सा जोखिम लेने को तैयार थी इसलिए बैंक में फिक्स्ड डिपाजिट करा दिया जहाँ उसे 7 % ब्याज मिलेगा, अंशु जोखिम लेने को तैयार थी इसलिए म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कर दिया जहाँ उसे तक़रीबन 15 % आय मिलेगा  I महंगाई दर अगर 4 % है तो देखते है इन चारो का ₹1,00,000 पांच साल बाद कितना बन जायेगा  I ( निवेश+आय - मंहगाई ) अमित (1,00,000 + 0 - 20,000) = 80,000, रवि (1,00,000 + 20,000 - 20,000) = 1,00,000, प्रीति (1,00,000 + 35,000 - 20,000) = 1,15,000, अंशु ( 1,00,000 + 75,000 - 20,000) = 1,55,000
  3.  संपत्ति निर्माण (Asset creation)- गरीब इंसान विलासी वस्तुओ जैसे मोटरकार, महंगे  कपडे, महंगे  जुटे पर ज्यादा खर्च करता है और उसके लिए क़र्ज़ लेने को भी तैयार हो जाता है I अब इसके तीन  नुकसान है पहला आप ब्याज के रूप में उस सामान के लिए मूल्य से अधिक भुगतान कर रहे, दूसरा यह ऐसे सामान है जिनकी कीमत लगातार कम होनी है, तीसरा क़र्ज़ की वजह से दायित्य बढ़ गया I अमीर इंसान की सोच हमेशा ऐसी चीज़ो पे पैसे लगाने की होती है, जिससे संपत्ति निर्माण हो जैसे ज़मीन या बिल्डिंग खरीद कर किराया पर लगा देना, निवेश कर देना अब इससे इनका एक तो संपत्ति निर्माण हो रहा है दूसरा नियमित रूप से इससे आय आ रहा I 
  4. दीर्घकालिक दृश्टिकोण (Long term perspective) -  गरीब मानसिकता वाले लोगो की पैसे और निवेश के मामले में दृष्टिकोण हमेशा अल्पकाल के लिए होता है, जबकि अमीर हमेशा दीर्घकालीन दृष्टिकोण रखते है I जैसे मोटरकार की अभी जरुरत है तो उसे किसी भी दशा में खरीदना है, चाहे इसके लिए क्यों न लोन लेना पड़े लेकिन I अमीर लोगो की सोच इसके ठीक विपरीत है वह सोचते है अभी तत्काल में मोटरकार की जरुरत है, लेकिन अभी हम मोटरकार खरीदने की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट से भी काम चला सकते है I जब हम इस स्थिति में होंगे कि हम बिना लोन लिए इसको खरीद सके तभी इसको खरीदेंगे I
  5.  सीखने की भूख (Hunger for learning)- किसी इंसान की नौकरी लग गई या कोई छोटा व्यापारी है अब वह 10 से 6 काम पे जायेगा और घर आने के बाद टेलीविजन देखेगा I क्योकि उसे लगता है कि अब तो उसकी ज़िन्दगी स्थिर है, और अब उसे कुछ नया सीखने की जरुरत नहीं है I लेकिन अमीर इंसान हमेशा नयी चीज़े सीखने के लिए लालायित रहता है I वह हमेशा कुछ नए आईडिया के बारे में सोचता रहता और अपने को समय के साथ समायोजित कर लेता है I कैसे वह अपने काम को आगे बढ़ा सकता है, अतिरिक्त आय के क्या-क्या साधन हो सकते है, किन नयी तकनीकों सहारे वह व्यवसाय उचाईयो पे ले जा सकता है I भारत के सबसे बड़े कॉर्पोरेट समूह टाटा ग्रुप के प्रमुख रतन टाटा उम्र के इस पड़ाव पर भी नयी चीज़े सीखते रहते है और पूरा टाइम सक्रिय रहते है जब कि वह रिटायरमेंट ले चुके है I 
  6. किताब के प्रति प्रेम ( Book Lover)- क्या आपने कभी लैंड रोवर(Land Rover), जैगुआर(Jaguar), लैम्बोर्गिनी(Lamborgini) और मर्सिडीज़(Mercedez) का विज्ञापन टेलीविजन पे देखा है, नहीं I क्योकि इन कम्पनीज को पता है कि जिन लोगो के पास  इतनी क्षमता है इन गाड़ियों को खरीदने का, वह टेलीविजन नहीं देखते और जो लोग टेलीविजन देखते है उनके पास इतनी क्षमता नहीं है कि वह इन गाड़ियों को खरीद सके I गरीब मानसिकता रखने वाले लोग हमेशा टेलीविजन पर अपना समय देते है जबकि अमीर लोग हमेशा अपना समय किताब पढ़ने के लिए देते है I भारत के सबसे बड़े व्यावसायिक समूह टाटा ग्रुप के प्रमुख रतन टाटा, दुनिया के सबसे अमीर इंसान बिल गेट्स, दुनिया के सबसे बड़े निवेशक वारेन बफेट, एशिया के सबसे जैक मा इतने व्यस्त होने के बावजूद दिन में 4-5 घंटे किताब पढ़ने के लिए देते है I

Wednesday, March 20, 2019

कहाँ तुम चले गए

विश्व गौरैया दिवस (World Sparrow  Day ) पर विशेष 
मुझे आज भी याद है होश सँभालने के बाद तुम्हारा पहला दीदार जब तुम्हे घर के आँगन में चहकते हुए देखा था ,फिर तो हमारा यह दिनचर्या का हिस्सा बन गया I तुम सुबह-सुबह प्रतिदिन घर के आँगन में आ जाया करती थी, मैं तुम्हे देखता और पकड़ने का असफल प्रयास करता I लेकिन तुम्हारी भी जिद्द थी हाथ न आने की I फिर स्कूल से आते ही अपना खेल शुरू हो जाता, तुम सामने नीम के पेड़ पर बैठके मुझे खेलते हुए देखती और मैं तुम्हे देखके मुस्कराता रहता I अँधेरा होते ही अगले दिन मिलने का वादा कर और एक दूसरे को अलविदा कह हम दोनों अपने-अपने घर के लिए चले जाते थे I मुझे याद नहीं तुमने कभी अपने मिलने का वादा तोड़ा हो या कभी मिलने आने में देरी की हो I हाँ मैंने कई बार तुमसे वादा जरूर तोड़ा, कभी-कभी देर से मिलने आया, लेकिन तुमने कभी शिकायत नहीं किया I मुझे वह जून के महीने का दोपहर भी अच्छे से याद है,जब तुम घर के अंदर आ गई थी और मैंने तुम्हे धोखे से पकड़ लिया था I लेकिन तुम अच्छे से इस बात से परिचित थी कि मेरा इरादा तुम्हे नुकसान पहुँचाने का नहीं था I हां वह होली का दिन कैसे भूल सकता हु, जब मैंने तुम्हे पकड़ लिया था और लाल- हरे रंग से नहला कर तुम्हे उड़ने के लिए आज़ाद कर दिया था I इन सब के बीच हमें कब एक दूसरे की आदत लग गई, शायद समझ नहीं आया I मुझे ऐसा कोई दिन याद नहीं, जब हम ना मिले हो, समय के साथ हमारा प्यार बढ़ता ही गया I घर के आँगन में तुम्हे फुदकते-फुदकते दाने चुगते हुए देखने का तो आनंद ही कुछ और था जिसको शब्दों में बयां करना संभव नहीं I
                                                लेकिन मोबाइल आने के बाद मैंने तुमसे मिलना कम कर दिया और तुमने आना भी कम कर दिया I क्योकि तुम्हे पता था कि अब मुझे तुम्हारी जरुरत नहीं रही या शायद तुम्हारी जगह अब वह मोबाइल ले चूका था I अब हमारे बीच मोबाइल आ चूका था और शायद हम तीनो एक साथ नहीं रह सकते थे I इसलिए तुम मेरी ख़ुशी की खातिर हमेशा के लिए मुझसे दूर चली गई I मैं भी मोबाइल की बनावटी दुनिया में इस तरीके से खो गया, कि मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा तुम्हारे जाने का और नहीं मैंने प्रयास किया तुम्हे रोकने का I तुम्हारे चहकने की जगह अब मोबाइल के गानों ने ले लिया था, यूट्यूब के कॉमेडी वीडियो अब तुम्हारी जगह हंसाते थे और सैकड़ो फेसबुक के दोस्तों ने तुम्हारी कमी महसूस नहीं होने दी I
                                                लेकिन हे गौरैया आज मुझे समझ में आया कोई भी संगीत वह सुकून नहीं दे सकती जो सुकून तुम्हारे चहकने से मिला करता था, तुम्हे देखके जो ख़ुशी मिलती थी वह यूट्यूब के कॉमेडी वीडियोस नहीं दे सकते, फेसबुक के सैकड़ो दोस्तों में मुझे एक भी ऐसा नहीं मिला, जिसमे तुम्हारे जितना समर्पण हो I ऐसा भी नहीं है कि मैंने तुम्हे ढूंढने का का प्रयास ना किया हो हिंदुस्तान के हर एक कोने में ढूँढ लिया, लेकिन तुम मुझे कही नहीं मिली I अब जब भी घर आता हु सबसे पहले नज़रे उस आँगन की तरफ जाती है जहां तुम्हारा पहली बार दीदार हुआ था, हां उस नीम की डाली पे भी देखा जहा बैठके तुम मुझे खेलते हुए देखा करती थी है, वह सरसो का खेत भी देखना नहीं भुला जहा तुम कभी- कभी चली जाया करती थी I उस आँगन में भी बार- बार नज़र दौड़ाई, जहाँ तुम फुदकते- फुदकते  दाने चुगने आया करती थी, लेकिन तुम मुझे कही भी नहीं दिखी I हां तुम्हारा रूठना भी लाजमी है क्योकि इन सब के लिए मैं जिम्मेदार था I यह जानते हुए कि मोबाइल टावर से पैदा होने वाले रेडिएशन के बीच तुम ज़िंदा नहीं रह सकती, मैंने मोबाइल को प्राथमिकता दिया I उम्मीद करता हु कि फिर कभी तुम्हारा दीदार हो और फिर मुझे मोबाइल के संगीत की जगह तुम्हारे चहकने की आवाज़ सुनने को मिले और तुम्हे फिर फुदकते-फुदकते हुए घर की आँगन में दाने चुगते हुए देखु I

गौरैया के बारे में कुछ रोचक तथ्य -

  • गौरैया पक्षी भारत समेत एशिया, अमेरिका और यूरोप में पायी जाती है I
  • यह एक घरेलु पक्षी है जो सामान्तया छतो पर या घर के आस पास अपना घोसला बनाती है I
  • इस चिड़िया को घरो में ख़ुशी का प्रतीक माना है I
  • आजसे दस साल पहले तक यह भारत के हर घर में बहुतायत मात्रा में दिख जाती थी, लेकिन मोबाइल रेडिएशन की वजह से लगभग विलुप्त हो चुकी है I
  • इसका वैज्ञानिक नाम पासर डोमेस्टिकस है I
  • गौरैया अब विलुप्त होने के कगार पे पहुंच चुकी है और इसीलिए इसे लाल जोन( रेड जोन) की सूची में रखा गया है I
  • गौरैया को बचाने के लिए 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है जिसकी शुरुआत 2010 में की गई थी I
  • गौरैया के संरक्षण के लिए कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय संस्थाए जागरूकता अभियान चला रही है I

Tuesday, March 19, 2019

किताबे जो हर किसी को पढ़ना चाहिए

"सच्चे दोस्त, अच्छी किताबे और गहरी नींद ; यह आदर्श जीवन है "
                                                                - मार्क ट्वेन 
"किसी भी ऐसे इंसान पे भरोसा मत करो जिसके टेलीविजन का आकार, उसके किताब के शेल्फ से बड़े हो "                                                                       -लेमोनी स्निकेट
कहते है किताबे इंसान के सच्चे दोस्त होते है, जो हर परिस्थिति में इंसान के साथ खड़े होते हैI  किताबों से किसी के व्यक्तित्व को आसानी से समझा सकता है I मैं अगर अपनी बात करू तो अगर किसी के घर गया और मुझे उसकी पास एक अच्छी पुस्तकालय दिख गया तो, उस व्यक्ति के लिए मेरे दिल में सम्मान स्वत जागृत हो जाती है I क्योकि इस बात की पूरी सम्भावना है कि वह इंसान काफी समझदार और सुलझा हुआ है, एक अच्छा ज्ञानी और दार्शनिक है I किताबों का इतिहास मानव सभ्यता जितना ही पुराना है I सृष्टि निर्माण के समय इंसान को अन्य जीवो से अलग इसीलिए रखा गया, क्योकि इंसान के पास सोचने और समझने की क्षमता होती है I प्राचीन समय में ज्ञान प्राप्ति का एक मात्र साधन किताबे ही हुआ करती थी I लेकिन तकनिकी विकास के साथ ज्ञान के अन्य साधन भी विकसित हुए जैसे टेलीविजन, रेडियो, इंटरनेट इत्यादि लेकिन आज भी ज्ञान प्राप्ति का सबसे विश्वसनीय श्रोत किताबे ही है I चाहे कितना भी तकनीकी विकास कर ले किताबों की जगह नहीं लिया जा सकता I हर एक महान व्यक्ति में एक गुण सामान मिलेगा वह है, किताब के प्रति उनका लगाव I वैसे अच्छी किताबों की सूचि बनाना आसान नहीं है, क्योकि हर एक किताब कुछ ना कुछ विशेषता लिए हुए होती है I लेकिन मैंने अब तक जितने किताबे पढ़ी है, उनमे से कुछ ऐसी किताबे है जो दिल को छू गई और मुझे लगता है प्रत्येक इंसान को यह किताबे जीवन में अवश्य पढ़नी चाहिए I

  1. गीता (Bhagvadgita)- भगवद्गीता महाभारत के युद्ध के समय अर्जुन को दिए गए उपदेशो और शिक्षाओं का संकलन है, जिसको महर्षि वेद व्यास ने संकलित किया था I आज तक मैंने जितनी भी किताबें पढ़ी है, गीता उन सब में सबसे ज्ञानपूर्ण और रोचक लगी I जिंदगी की सच्चाई को बयान करती, यह किताब आपके अंदर इतना ऊर्जा भर देती है कि आप कुछ भी हासिल कर सकते है, अगर इसके शिक्षाओं का ईमानदारी से पालन किया I इंसान की ज़िंदगी ऐसी समस्या नहीं जिसका हल गीता में न हो I इस किताब को पढ़ने के बाद ज़िन्दगी को जीने का आपका नज़रिया बदल जायेगा I इस किताब के सबसे अच्छी बात है कि इस किताब का अनुवाद दुनिया के सभी महत्वपूर्ण भाषाओ में किया जा चूका है I हज़ारो वर्ष पहले लिखी गई यह किताब आज भी उतनी ही व्यावहारिक है I अगर आपने अभी तक गीता नहीं पढ़ा है तो मैं जरूर बोलूंगा कि इसे एक बार अवश्य पढ़े ज़िन्दगी में सकारात्मक परिवर्तन जरूर देखने को मिलेगा I
  2. अर्थशास्त्र (Arthshastra)- 350 ईस्वी पूर्व लिखी गई यह किताब राजनीति पर लिखी गई पहली और अब तक की श्रेश्ठतम किताब मानी जाती है I हज़ारो साल पहले लिखी गई इस किताब के हर एक वाक्य आज के परिदृश्य में भी व्यावहारिक है I आचार्य कौटिल्य जिन्हे विष्णु गुप्त या चाणक्य के नाम से भी जाना जाता है के द्वारा लिखित यह किताब वैसे तो शासन व्यस्था चलाने से सम्बंधित है I लेकिन दैनिक जीवन के लिए भी यह काफी उपयोगी है I चाणक्य एक महान दार्शनिक और विद्वान थे जिन्होंने अपनी असाधारण प्रतिभा से एक साधारण से लड़के को भारत का चक्रवर्ती सम्राट बना दिया I जीवन जीने की कला सिखाने वाली यह किताब एक बार अवश्य पढ़नी चाहिए I
  3. इन्फ्लुएंस : द साइकोलॉजी ऑफ़ पर्सुएशन (Influence - The psychology of persuasion) - हर एक इंसान चाहता है कि वह अपने व्यव्हार से दुसरो को प्रभावित कर सके I लेकिन एक प्रभावी व्यक्तित्व कैसे प्राप्त करे, वह कौन कौन से बाते है जो एक व्यक्ति को अलग पहचान दिलाती है, कैसे एक अच्छा बॉस चुने, कैसे एक अच्छा लव पार्टनर चुने, कैसे किसी व्यक्ति के स्वाभाव के बारे में जाने इन सभी सवालो के जवाब इस किताब में मिल जायेंगे I सरल और सीधे शब्दों में मानवीय व्यहारो का अध्ययन इस किताब में किया गया है I रोबर्ट किएल्डिनी द्वारा लिखित यह किताब मनोविज्ञान की कुछ अच्छी किताबो में से मानी जाती है I
     
  4. थिंक एंड ग्रो रिच (Think and Grow Rich)-  नेपोलियन हिल द्वारा लिखित यह किताब दुनिया की सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबो में से एक है यह किताब 1940 के आसपास अमेरिका के 500 सफल लोगो की आदतों का विस्तृत अध्ययन है I 25 वर्षो के अवलोकन और अध्ययन के बाद नेपोलियन हिल  ने यह किताब लिखी I हिल के अनुसार इंसान जिस तरह की सोच रखता है, वही उसको मिलता है I सिर्फ एक सोच ही है जो सफल इंसान को असफल इंसान से अलग बनाती  है I इस किताब में सफल इंसानो की कुछ आदतों का भी जिक्र हिल ने किया है I इस किताब की  सबसे बड़ी विशेषता है इसकी व्यवहारिकता, क्योकि यह सफल लोगो के आदतों का व्यावहारिक अध्ययन है I
  5. जीत आपकी (You can win)- शिव खेड़ा द्वारा लिखी गई यह किताब मोटिवेशन के ऊपर लिखी गई कुछ अच्छी किताबो में से एक है I बेस्ट सेलर रही यह किताब काफी सरल और स्पष्ट भाषा में लिखी गई है I इस  किताब के अनुसार हर एक इंसान  ऊर्जा का असीमित स्रोत है बस जरुरत है उसको पहचानने की I  हिंदी और इंग्लिश साहिर सभी भारतीय भाषाओ में उपलब्ध यह किताब पढ़नी चाहिए I
  6. रिच डैड पुअर डैड ( Rich Dad Poor Dad)- बचत की आदत और निवेश के ऊपर लिखी गई यह किताब  दुनिया भर में सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबो में से एक है I इस किताब में दो तरह के लोगो के व्यव्हार का अध्ययन किया गया है अमीर और गरीब I दोनों ही तरह के लोगो की सोच और आदतों का तूलनात्मक अध्ययन किया गया है I लेखक के अनुसार हमें सबसे पहले चूहे की दौड़ (Rat race) से बाहर आना होगा जो तभी संभव है, जब हम वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर (Financial freedom) हो I वित्तीय आत्मनिर्भरता (Financial freedom) प्राप्त करने के लिए आपका वित्तीय रूप से शिक्षित (Financial literate) होना जरुरी है I  बचत और निवेश से सम्बंधित यह किताब हर एक इंसान को जरूर पढ़नी चाहिए I अमेरिकी लेखक और व्यवसायी रोबर्ट कियोसोकि द्वारा लिखित यह किताब  हिंदी और इंग्लिश समेत काफी भाषाओ में उपलब्ध है I
  7. लज्जा (Shame )- मानवीय संवेदनाओ और नारी संघर्ष पर आधारित यह किताब 1993 में बंगला में प्रकाशित हुई थी, और बाद में हिंदी और इंग्लिश समेत कई भाषाओ में इसका अनुवाद किया गया I बांग्ला देश में माइनॉरिटीज के विरुद्ध हिंसा और आगजनी को आधार लेके लिखी गई, यह किताब बांग्लादेश से  निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन द्वारा लिखी गई है I किताब प्रकाशित होने के 6 महीने के अंदर इसके 50,000 प्रतियां बिक चुकी थी I  बाद में इस किताब पर बांग्लादेश सरकार द्वारा प्रतिबन्ध लगा दिया गया और अभी भी बांग्लादेश में यह प्रतिबंधित है I इस किताब की लोकप्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि फ्रेंच, जर्मन,इंग्लिश, इटालियन, स्वीडिश, पंजाबी, सिंघली, मलयालम, कन्नड़, तेलगु, तमिल, उर्दू  सहित 20 से ज्यादा देसी-विदेशी भाषाओ में अब तक इसका अनुवाद किया जा चूका है I इस किताब के बाद ही तस्लीमा नसरीन के खिलाफ बांग्ला देश में मौत का फतवा जारी किया गया था अभी तस्लीमा नसरीन भारत में शरण ली हुई है I
  8. अन्ना केरेनिना (Anna Karenina)- महान रुसी लेखक लियो टॉलस्टॉय द्वारा लिखी गई यह किताब विश्व साहित्य के इतिहास में लिखी गई कुछ बेहतरीन किताबो में से एक मानी जाती है I यह पूरा उपन्यास दो हिस्से में  प्रकाशित हुआ था I 1978 में पहली बार इसे रुसी भाषा में प्रकाशित किया गया था और इसका दुनिया के सभी महत्वपूर्ण भाषाओ में अनुवाद किया जा चूका है I रुसी सभ्यता, सामाजिक संघर्ष, वैवाहिक जीवन, स्त्री-पुरुष संघर्ष, मानवीय संवेदना को दर्शाती यह उपन्यास दिल को छू जाती है 800 से ज्यादा पेजो की यह उपन्यास अंत तक पाठको को बांधे रखती है I
  9. गोदान ( Gift of a cow)- हिंदी साहित्य में सबसे बड़े नाम और उपन्यास सम्राट के नाम से प्रसिद्द मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखी गई इस किताब को विश्व साहित्य के इतिहास के कुछ बेहतरीन किताबो में से माना जाता है I साल 1936 में प्रकाशित इस उपन्यास का कई विदेशी लेखकों द्वारा अनुवाद किया जा चूका है I रूढ़िवादी भारतीय समाज और परम्पराओ को दर्शाती यह उपन्यास विश्व साहित्य का प्रमुख धरोहर है I इस उपन्यास पर एक फिल्म भी बन चुकी है, इसके अलावा गुलज़ार द्वारा निर्देशित धारावाहिक तहरीर भी इसी से प्रभावित है I
     
  10. अग्नि की उड़ान (Wings of fire)- अग्नि की उड़ान पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. ऐ. पी. जे. अब्दुल कलाम की आत्मकथा है I एक छोटे से गांव के गरीब परिवार से निकलकर भारत के राष्ट्रपति   बनने तक का पूरा सफर और उस दौर के संघर्षो की कहानी को इस आत्मकथा में दर्शाया गया हैI  हिंदी और  इंग्लिश दोनों ही भाषाओ  उपलब्ध इस किताब को हर एक युवा को पढ़नी चाहिए I

Sunday, March 17, 2019

मनोहर पर्रिकर- स्वच्छ छवि और मज़बूत व्यक्तित्व के राजनेता

एक स्वच्छ छवि और मज़बूत राजनेता की पहचान रखने वाले गोवा के मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का 17 मार्च 2019 को 63 वर्ष की उम्र में निधन हो गया I मनोहर पर्रिकर एक साल से पैंक्रियाटिक कैंसर से जूझ रहे थे और अंत में ज़िन्दगी की जंग हार गए I अपने अब तक की ज़िन्दगी में मैंने दो नेताओ अटल बिहारी बाजपेयी और मनोहर पर्रिकर को देखा, जिनके मृत्यु पर पूरा हिंदुस्तान रोया चाहे वह किसी भी राज्य का हो, किसी भी धर्म का हो, किसी भी जाति का हो, किसी भी आयु वर्ग का हो I क्योकि इन दो नेताओ ने राजनीति में मूल्य, अनुशासन, सादगी, ईमानदारी की नई मिसाल पेश की भारतीय राजनीति में ऐसे राजनेताओ की बेहद कमी है I उनके कद का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गोवा के नव निर्वाचित मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने मुख्यमंत्री  कार्यालय में मनोहर पर्रिकर कि कुर्सी पर उनकी तस्वीर लगा रखी है और साथ में अपनी कुर्सी I इन नेताओ ने पैसा नहीं कमाया लेकिन जो कमाया वो पैसे से नहीं ख़रीदा जा सकता I मैंने अपनी जिंदगी में इतने सकारात्मक सोच रखने वाला इंसान नहीं देखा I इतनी गंभीर बीमारी के बावजूद लगातार काम करते रहे यहाँ तक कि जब वह अस्पताल में भर्ती थे, तब भी लगातार बैठके करते रहे I मतलब कभी भी एहसास नहीं हुआ कि पर्रिकर इतनी गंभीर बीमारी की चपेट में है I अभी कुछ दिन पहले ही अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद वह से छुट्टी लेकर और नाक में पाइपलाइन लगाकर विधानसभा में आकर बजट पेश किया उनके इस जज्बे को देखर हर कोई स्तब्ध था मरते दम तक देश और गोवा की सेवा में लगातार लगे रहे I

प्रारंभिक जीवन- मनोहर पर्रिकर का जन्म 13 दिसंबर 1955 को मापुसा, गोवा में एक हिन्दू ब्राह्मण परिवार में हुआ था I इनके पिता का नाम गोपाल कृष्ण पर्रिकर और माता का नाम राधाबाई पर्रिकर था I उनकी प्रारंभिक शिक्षा लोयोला हाई स्कूल, मारगाओ में हुआ I बचपन से पढ़ने में बुद्धिमान पर्रिकर ने भारतीय प्रौद्यिकी संस्थान, मुंबई (Indian Institute of Technology, Mumbai) से स्नातक की पढाई की I भारतीय प्रौद्यिकी संस्थान, मुंबई ( (Indian Institute of Technology, Mumbai) से उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चूका है I 26 वर्ष की आयु में मनोहर पर्रिकर की शादी मेधा पर्रिकर से हुई जिनसे उनके दो बच्चे है उत्पल पर्रिकर और अभिजीत पर्रिकर I साल 2001 में मनोहर पर्रिकर की पत्नी का निधन हो गया I मनोहर पर्रिकर की व्यक्तिगत जिंदगी काफी उतार-चढाव वाली रही, लेकिन पर्रिकर का आत्मविश्वास अडिग रहा I
                  


राजनीतिक सफर- मनोहर पर्रिकर राजनीति में आने से पहले राष्ट्रवादी संगठन राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के प्रचारक थे I साल 1988 में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और भाजपा से जुड़ गए I 1994 में गोवा विधानसभा चुनाव में पणजी विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए I मनोहर पर्रिकर भारत के पहले विधायक और मुख्यमंत्री थे जो भारतीय प्रौद्यिकी संस्थान से पढाई की थी I साल 2000 में पहली बार गोवा के मुख्यमंत्री बने और मृत्यु से पहले चार बार इस पद पर बने रहे I साल 2014 में भारी बहुमत से केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद पर्रिकर को रक्षा मंत्री बनाया गया और 2017 तक इस पद पर पर बने रहे I लेकिन मनोहर पर्रिकर ने वापिस गोवा जाकर मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताई और इस पद से इस्तीफा देकर गोवा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और मृत्युपर्यन्त इस पद पर बने रहे I

म्यांमार में आतंकी कैंपो का सफाया - 2014 में जब मनोहर पर्रिकर को भारत का रक्षा मंत्री बनाये जाने का निर्णय  सबको हैरान करने वाला था I क्योकि मनोहर पर्रिकर को केंद्र में काम करने का कोई अनुभव नहीं था और ऊपर से रक्षा मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण पद देना, उससे भी ज्यादा अविश्वश्नीय था I खुद मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि मुझे इस क्षेत्र में काम करने का कोई अनुभव नहीं I  जून 2015 में NSCN-K के आतंकियों ने मणिपुर में डोगरा रेजिमेंट पर हमला कर 18 जवानो की जान ले ली I NSCN-K के आतंकियों का सुरक्षित ठिकाना म्यांमार था जहां भारत हमला नहीं कर सकता था I लेकिन पर्रिकर ने 18 जवानो के मौत का बदला लेने की ठान ली और बिना म्यांमार सरकार को बताये 4 जून,2015 को म्यांमार की सीमा में घुसकर तक़रीबन 80-100 आतंकियों को मार गिराया I इस पुरे ऑपरेशन में सिर्फ एक भारतीय जवान शहीद हुआ I इस ऑपरेशन के बाद आलोचकों को भी मनोहर पर्रिकर के निर्णय और नेतृत्व क्षमता की तारीफ करनी पड़ी I

पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक के मास्टर माइंड- जब इस ऑपरेशन की सफलता का जश्न मनाया जा रहा था, तभी एक पत्रकार ने मनोहर पर्रिकर से सवाल पूछा क्या भारत ऐसे ही साहस पाकिस्तान के खिलाफ दिखा सकता है इस सवाल से मनोहर पर्रिकर झेप गए और काफी अपमानित महसूस किया I लेकिन पर्रिकर बातो से नहीं एक्शन से जवाब देने में विश्वास करते थे I लेकिन पाकिस्तान परमाणु संपन्न राष्ट्र है और उसके सीमा में घुसकर हमला करना बहुत बड़ा जोखिम भरा काम था I वैसे भी पाकिस्तान म्यांमार ऑपरेशन के वक़्त भारत को धमकी दे चूका था I पाकिस्तान सेना प्रमुख ने कहा था भारत पाकिस्तान को म्यांमार समझने की गलती ना करे I 18 सितम्बर ,2016 को 4 पाकिस्तानी आतंकियों ने उरी स्थित भारतीय सेना के कैंप पर हमला कर 19 जवानो को शहीद कर दिया I मनोहर पर्रिकर ने इस बार पाकिस्तान को सबक सीखने की ठानी हमले के ठीक 11 दिन बाद यानि 29 सितम्बर,2016 को मनोहर पर्रिकर के निर्देशनुसार भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सीमा में घुस कर सर्जिकल स्ट्राइक किया और 40 के करीब आतंकियों को मार गिराया I यह ऑपरेशन इतने ख़ुफ़िया तरीके से किया गया था की किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी I पाकिस्तान सहित पूरी दुनिया हैरान थी भारतीय सेना के इस सर्जिकल स्ट्राइक से I सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही की इस पुरे ऑपरेशन में भारत की तरफ से किसी प्रकार के जानमाल का नुकसान नहीं हुआ I मनोहर पर्रिकर के अनुभव पर सवाल उठाने वालो के लिए यह स्पस्ट सन्देश था कि अनुभव से ज्यादा आत्मविश्वास और जिद्द की जरुरत होती है किसी काम को करने के लिए I

पद ग्रहण (Position held)- 
  • 1994- पणजी से भाजपा के टिकट पर पहली बार विधायक चुने गए I
  • 1999- पणजी से भाजपा के टिकट पर दूसरी बार विधायक चुने गए I
  • 1999- गोवा विधानसभा में नेता विपक्ष चुने गए I
  • 2000- पहली बार गोवा के मुख्यमंत्री की शपथ ली और 2002 तक इस पद पर बने रहे I 
  • 2002- दूसरी बार गोवा के मुख्यमंत्री चुने गए और 2005 तक इस पद पर बने रहे I
  • 2012- तीसरी बार गोवा के मुख्यमंत्री चुने गए और 2014 तक इस पद पर बने रहे I 
  • 2014- पहली बार राज्य सभा सदस्य के रूप में शपथ ली I
  • 2014- पहली बार केंद्र में रक्षा मंत्री का पद संभाला और 2017 तक इस पद पर बने रहे I
  • 2017- चौथी बार गोवा के मुख्यमंत्री की शपथ ली और मृत्यु पर्यन्त इस पद पर बने रहे I 
मनोहर पर्रिकर के बारे में कुछ रोचक तथ्य -

  • भारतीय प्रौद्यिकी संस्थान (Indian Institute of Technology) से बी.टेक (B.Tech.) की डिग्री लेने वाले भारत के पहले विधायक और मुख्यमंत्री बने I 
  • मनोहर पर्रिकर अपनी सादगी के लिए जाने जाते थे, उन्होंने मुख्यमंत्री रहते  हुए कोई भी सरकारी सुविधा नहीं ली थी I
  • गोवा के मुख्यंमंत्री रहते हुए पर्रिकर अपनी स्कूटर से ही ऑफिस आया-जाया करते थे I
  • मनोहर पर्रिकर की निर्णय क्षमता को देखकर 2014 में केंद्र सरकार ने उन्हें रक्षा मंत्री बनाया, हालाँकि मनोहर पर्रिकर गोवा नहीं छोड़ना चाहते थे I
  • रक्षा मंत्री बनने के बाद मनोहर पर्रिकर ने काफी ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय लिए I मनोहर पर्रिकर को पाकिस्तान पे सर्जिकल स्ट्राइक का मास्टर माइंड माना जाता है I
  • 2001 में गोवा के मुख्यमंत्री रहते हुए मनोहर पर्रिकर ने गोवा के 51 प्राइमरी स्कूल्स का नियन्त्र  राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के शैक्षिक संस्था 'विद्या भारती' को दे दिया, जिसपे काफी विवाद हुआ था I
  • मनोहर पर्रिकर ने 2017 में गोवा जाने की इच्छा जताई और रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया I
  • नरेंद्र मोदी को केंद्र में लाने की वकालत सबसे पहले मनोहर पर्रिकर ने ही की थी I
  • लाल कृष्ण अडवाणी के नेतृत्व में 2009 का चुनाव हारने के बाद मनोहर पर्रिकर ने आडवाणी को सड़ा हुआ टमाटर कहा था I  और यही कारण है कि मनोहर पर्रिकर नितिन गडकरी को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया जबकि सबसे बड़े दावेदार पर्रिकर ही थे I
  • रक्षा मंत्री रहते हुए मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व में भारतीय सेना ने पहली बार म्यांमार की  सीमा में घुसकर कार्यवाही किया और आतंकियों के कैंप को तबाह कर दिया I
  • मनोहर पर्रिकर ने रूस से ख़रीदे जाने वाले S-400 की खरीद योजना में दखल देकर 49,300 करोड़ रूपये बचाये I 
  • पूर्व सैनिको के लिए ओने रैंक ओने पेंशन योजना और अन्य कई लाभ दिए I
  • अंग्रेज़ो के ज़माने से चले आ रहे कई कानूनों में बदलाव किया I
  • कैंसर से झूझने के बावजूद सक्रिय रूप से ज़िन्दगी के अंतिम क्षण तक मुख्यमंत्री का कार्यभार देखते रहे I यहाँ तक कि बजट नाक में पाइप लगाकर पेश किया इस जज्बे को हर तरफ सलाम किया गया I
  • मनोहर पर्रिकर बाजार सब्जी लेने खुद ही जाते थे, वह भी अपनी साईकिल या स्कूटी से I एक बार बाजार जाते समय मनोहर पर्रिकर को एक ऑडी सवार ने टक्कर मर दी और पर्रिकर वही पर गिर पड़े I उसके बाद लड़के ने मनोहर पर्रिकर को काफी बुरा भला कहा और धमकाया मैं यहाँ के DSP  का बेटा हु I मनोहर पर्रिकर ने बस इतना ही बोला बेटा गाड़ी सावधानी से चलाया करो और चले गए बाद में लोगो को समझ में आया कि यह मुख्यमंत्री पर्रिकर थे I
सम्मान और पुरष्कार- 
  • 2018- राष्ट्रीय तकनीक संस्थान, गोवा द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि I
  • 2012- CNN-IBN द्वारा इंडियन ऑफ़ द ईयर का अवार्ड ( Indian of the year) I
  • 2001- भारतीय प्रौद्यिकी संस्थान, मुंबई ( (Indian Institute of Technology, Mumbai) द्वारा मानद उपाधि I








Friday, March 15, 2019

इजराइल- सफलता और जिद का पर्याय

इजराइल एक ऐसा देश जिसे दुनिया के नक़्शे पे ढूढ़ने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है, लेकिन अपनी ताकत से दुनिया को अपनी उपस्थिति का एहसास कराता रहता है I जनसंख्या की अगर बात करे तो दिल्ली की जनसंख्या का दो तिहाई है, लेकिन रुतबा ऐसा कि किसी की हिम्मत नहीं आँख उठा के इजराइल की तरफ देख सके I चारो तरफ से दुश्मनो से घिरा हुआ यह देश, दुनिया का सबसे सुरक्षित और ताकतवर देश माना जाता है I इजराइल ने अपनी कमजोरी को अपना हथियार बनाकर साबित कर दिया, कि अगर जिद हो तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है I इस छोटे से देश की तरफ आँखे उठाकर देखने वालो की यह आँखे निकाल लेता है I न सिर्फ सुरक्षा बल्कि तकनीकी और आर्थिक रूप से भी इजराइल दुनिया के कुछ गिने ताकतवर देशो में आता है I यहूदियों का दुनिया भर में एकमात्र देश इजराइल ने इस मुकाम तक पहुंचने से पहले जितना कठिन संघर्ष और त्याग किया है शायद ही ऐसा उदाहरण आपको मिले I

इतिहास-
जर्मनी में हिटलर के शासनकाल के दौरान 6 लाख यहूदियों का कत्लेआम किया गया I द्रितीय विश्व युद्ध के बाद दुनियाभर में बचे हुए यहूदियों ने अपने लिए एक अलग देश की मांग शुरू की I  संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रयास से 1948 में फिलिस्तीन से यहूदियों की आबादी वाले एक छोटे से क्षेत्र को अलग कर, एक नया नाम दे दिया गया जिसे इजराइल कहा गया I हालाँकि अरब देशो ने इसका पुरजोर विरोध किया और इजराइल को अलग देश की मान्यता देने से इंकार कर दिया I इजराइल को अपना अस्तित्व बचाने के लिए अरब देशो से संघर्ष करना पड़ा I 11 मई 1949 को इजराइल को संयुक्त राष्ट्र संघ ने बहुमत से एक अलग देश की मान्यता दे दी I अरब देश,जॉर्डन, इजिप्ट और फिलिस्तीन ने इजराइल के अस्तित्व को मानने से इंकार कर दिया और यही से शुरुआत हुई इजराइल और इन सभी देशो के बीच संघर्ष की कहानी जो आज भी चली आ रही  है I

इजराइल और अरब देशो का संघर्ष- संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 1949 में इजराइल को एक अलग देश की मान्यता देने बाद, सभी अरब देशो ने संयुक्त रूप से इजराइल को बहिष्कार (Boycot) करने का सामूहिक निर्णय लिया I अगर किसी देश ने सबसे ज्यादा आक्रमण और युद्ध झेला है तो वह है इजराइल I 1949 के बाद अरब देशो ने संयुक्त रूप से इजराइल के ऊपर कई बार आक्रमण किया I लेकिन इस छोटे से देश ने हर बार मुंह तोड़ जवाब दिया और मज़बूत होता गया I यही संघर्ष सबसे कारण है इजराइल के सुपरपावर बनने का, क्योकि इजराइल को अच्छे से पता था कि इस परिस्थिति में जीवित रहने के लिए ताकतवर होना बहुत जरुरी है I आज इजराइल जिस मुकाम पर खड़ा है वह तक पहुंचने के लिए इसे काफी भारी कीमत चुकानी पड़ी है I

जून वॉर या 6 डेज वॉर (June war or 6 days war)-
1950 के बाद मिस्र (Egypt)  ने इजराइल के समुद्री जहाजों के रास्तो को अवरुद्ध कर दिया I जिसकी वजह से दोनों देशो के बीच तनाव बढ़ता गया, लेकिन संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रयासों से हर बार मामले को शांत करने का प्रयास किया गया I तनाव को देखते हुए जॉर्डन और मिस्र (Egypt) ने जून 1967 में एक समझौता किया I जिसके अंतर्गत इजराइल से युद्ध की स्थिति में दोनों देश संयुक्त रूप से मिलकर इजराइल पर अटैक करेंगे I  5 जून, 1967 को जॉर्डन,इजिप्ट,इराक ,लेबनॉन ,सीरिया , फिलिस्तीन ने संयुक्त रूप से इजराइल के ऊपर अटैक कर दिया, जिसका समर्थन सभी अरब देशो ने किया I इस युद्ध को 'जून वॉर या 6 डेज वॉर' के नाम से जाना जाता है I लेकिन इन सभी देशो से चारो तरफ से घिरे हुए इजराइल ने एयर स्ट्राइक कर सभी हथियारों और लड़ाकू विमानों को नष्ट कर दिया और अकेले लड़ते हुए सिर्फ 6 दिनों में इन देशो को घुटने टेकने पर मज़बूर कर दिया I इजराइल के लिए यह जीत काफी अप्रत्याशित थी I  इस युद्ध के बाद इजराइल ने काफी बड़ा क्षेत्र इन देशो से छीनकर अपने साथ मिला लिया और दुनिया के मानचित्र में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज की I कब्ज़ा किये गए क्षेत्रो में गाज़ा और पेनिनसुला मिस्र (Egypt) से, वेस्ट बैंक जॉर्डन से और गोलन हाइट्स सीरिया से प्रमुख थे I
इजराइल को सैन्य और आर्थिक महाशक्ति बनाने वाले स्तम्भ - जून वॉर के बाद इजराइल ने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा और सुरक्षा और आर्थिक मोर्चे पे अपने को सशक्त बनाते हुए सैन्य और आर्थिक महाशक्ति के रूप अपनी पहचान बना ली I यह एकमात्र देश है जो अटैक के बाद सबसे त्वरित कार्यवाही करता है और अपने एक नागरिक की जान के बदले 10 जान लेने में विश्वास करता है I अब बात करते है उन स्तम्भों की जिनकी वजह से इजराइल एक आर्थिक और सैन्य महाशक्ति बन पाया I


 मोसाद (Mossad) -

इजराइल को सुपर पावर बनाने में 'मोसाद (Mossad)' का बहुत बड़ा हाथ है I मोसाद इजराइल की राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (National Investigation Agency) का नाम है जिसे दुनिया की सबसे खतरनाक जाँच एजेंसी माना जाता है I मोसाद की रणनीति इतनी ज़बरदस्त है किसका कोई तोड़ नहीं I हर एक संघर्ष में मोसाद ने अपनी सार्थकता सिद्ध की है I म्यूनिख ओलिंपिक (Munich Olympic) ऑपरेशन जिसे 'ऑपरेशन राथ ऑफ़ गॉड Operation of wrath of god)'  के नाम से भी जाना जाता है  और 'ऑपरेशन थंडरबोल्ट (Operation Thunderbolt)' कुछ ऐसे ऑपरेशन्स है जिसका इतिहास में कोई मिसाल नहीं I बात 'ऑपरेशन राथ ऑफ़ गॉड Operation of wrath of god)' की अगर बात करे तो साल 1972 में म्यूनिख ओलिंपिक (Munich Olympic) के दौरान 'फिलिस्तीन लिबरेशन आर्मी ( Palestine Liberation Army)' के कुछ आतंकियों द्वारा ओलिंपिक में भाग ले रहे इजराइल के 11 खिलाड़ियों को मार दिया गया I इस हत्याकांड के बाद इसरायली प्रधानमंत्री ने सभी खिलाड़ियों के परिवार वालो से मिलकर उन्हें विश्वास दिलाया कि इस हत्याकांड में शामिल सभी आतंकियों को मारा जायेगा, चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने में छिप जाये I इस हत्याकांड के बाद इजराइल ने फिलिस्तीन पे हमला कर 1,000 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया I लेकिन इसरायली खिलाड़ियों के हत्याकांड में शामिल सभी आतंकी बच निकले और दुनिया के अलग-अलग देशो में जाकर छिप गए I इजराइल सरकार ने मोसाद को इन सभी आतंकियों को पहचान कर मारने का आदेश दिया I मोसाद ने एक पूरी राणिनीति तैयार की और प्रशिक्षित कमांडोज़ की एक टीम तैयार की I इस पुरे ऑपरेशन को   'ऑपरेशन राथ ऑफ़ गॉड Operation of wrath of god)' नाम दिया गया और यह ऑपरेशन 1972 से 1988 तक चला, जब तक सभी आतंकी मार नहीं दिए गए I मोसाद के एजेंट्स ने दुनिया के अलग-अलग कोनो में छिपे दोषियों को पहचान कर मार गिराया I इस ऑपरेशन को जिस तरीके से अंजाम दिया गया वह अपने आप में एक मिसाल था I

 तकनीक- 

 मैन पावर ना रहते हुए भी अगर इजराइल सुपर पावर है तो उसका पूरा श्रेय वहां की उन्नत तकनीक को दिया जाता है I इजराइल की तकनीक का लोहा पूरी दुनिया मानती है I अगर इजराइल की तरफ कोई आँख उठाकर देखने की हिम्मत नहीं करता तो उसका सबसे बड़ा कारण इजराइल की उन्नत तकनीक है I अमेरिका के बाद इजराइल दूसरा देश है जो अपनी सकल घरेलु उत्पाद (Gross Domestic Product) का सबसे बड़ा हिस्सा रिसर्च एंड डेवेलपमेंट (Research and Development) पर खर्च करता है I इजराइल सकल घरेलु उत्पाद (Gross Domestic Product) का तक़रीबन 5% तकनीक के रिसर्च एंड डेवेलपमेंट (Research and Development) पर खर्च करता है I इजराइल की उन्नत तकनीक के कुछ उदाहरण है I
  1. इजराइल दुनिया का एकमात्र देश है जिसने अपनी अंतराष्ट्रीय सीमा की रखवाली के लिए रोबोट लगा रखा है I  
  2. इजराइल दुनिया का एकमात्र देश है जिसने एंटी बैलिस्टिक मिसाइल लगा रखा है I इसका मतलब है कि कोई भी मिसाइल या बम इजराइल की धरती को छू नहीं सकता, यह बैलिस्टिक मिसाइल उन्हें हवा में ही नष्ट कर देती है I
  3. इजराइल पूरा मरुस्थल है इसलिए पीने के पानी की समस्या रहती थी I इसके लिए उसने समुद्र के खारे पानी को मीठे पीने योग्य पानी में बदलने की उन्नत तकनीक इज़ाद की और आज पुरे इजराइल को इसी तकनीक की बदौलत पीने के लिए मीठा पानी उपलब्ध है I
  4. मरुस्थल होने के बावजूद इजराइल ना सिर्फ कृषि उत्पादों में आत्मनिर्भर है बल्कि उसका निर्यात भी करता है I यह इसरायली तकनीक का जीवित उदाहरण है I
  5. दुनिया के सबसे उन्नत और आधुनिक हथियार इजराइल के पास ही है और इसी तकनीकी रूप से उन्नत हथियारों के दम पर इजराइल सीना तान कर खड़ा रहता है I 
आर्थिक आत्मनिर्भरता - 
बिना आर्थिक रूप से मज़बूत हुए आगे नहीं बढ़ा जा सकता I इजराइल ने प्राकृतिक संसाधन ना होते हुए भी जिस तरीके से आर्थिक आत्मनिर्भरता और सम्पन्नता हासिल की वह काबिले तारीफ है I इजराइल ने अर्थव्यस्था को गति देने के लिए स्टार्ट उप आइडियाज को प्रोत्साहित किया, जिसके परिणाम स्वरुप इसरायली फर्मे दुनिया भर में बाजार में छा गई I
  1. इजराइल में बेरोजगारी दर सिर्फ 3% है, जो दुनिया भर में सबसे कम है I 
  2. इजराइल की प्रति व्यक्ति आय 43,000 है, जो भारतीय रूपये में तक़रीबन ₹ 30,00,000 बैठती है I
  3. इजराइल दुनियाभर में हथियारों का प्रमुख निर्यातक है I 
  4. अमेरिका के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नैस्डेक (Nasdaq) में अमेरिका और चीन के बाद सबसे ज्यादा लिस्टेड कम्पनीज इजराइल की है I
  5. निवेश के हिसाब से इजराइल को सबसे सुरक्षित देश की श्रेणी में रखा जाता है और यही कारण है कि दुनियाभर के निवेशकों के लिए इजराइल पसंदीदा देश है I
  6. इतने छोटे से देश में 150 से ज्यादा खूबसूरत बीचेस (beaches) विकसित किये गए है जिसकी वजह से यहाँ विदेशी पर्यटक आकर्षित होते है और पर्यटन को बढ़ावा मिला है I
  7. इजराइल को नई तकनीक के विकास का हब माना जाता है I

Tuesday, March 12, 2019

मोसाद का ऑपरेशन थंडरबोल्ट

ऑपरेशन थंडरबोल्ट दुनिया के इतिहास की कुछ गिने-चुने सफलतम रेस्क्यू ऑपरेशन्स में से एक माना जाता है I इजराइल की राष्ट्रीय जाँच एजेंसी 'मोसाद' के नेतृत्व में किये गए, इस रेस्क्यू ऑपरेशन की कहानी बिलकुल फिल्मी लगती है, जिसे विश्वास करना थोड़ा मुश्किल लगता है, लेकिन यह बिलकुल सच है I 27 जून 1976 को एयर फ्रांस का A300 विमान 248 यात्रियों को ले के यूनान के एथेंस एयरपोर्ट से तेल अवीव (इजराइल) होते हुए हुए पेरिस (फ्रांस) के लिए उड़ा I उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद उन्ही 248 यात्रियों के बीच बैठे, हथियार से लैस चार अपहरणकर्ताओ द्वारा इस विमान का अपहरण कर लिया गया I अपहरणकर्ताओं में से दो फिलिस्तीन की आज़ादी के समर्थक 'पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ द लिबरेशन ऑफ़ फिलिस्तीन' के सदस्य थे, जबकि बाकि दो 'जर्मन रेवोलुशनरी सेल्स' के सदस्य थे I अपहरणकर्ताओं ने बन्दुक की नोक पर विमान का रास्ता बदलवा दिया और पायलट को विमान युगांडा के एंतेब्बे एयरपोर्ट ले जाने को बोला I लेकिन विमान में ईंधन की कमी होने के कारण विमान की इमरजेंसी लैंडिंग लीबिया के बेंगाची एयरपोर्ट पर कराइ गई I बेंगाची एयरपोर्ट पर ईंधन भरने के बाद विमान को युगांडा के एंतेब्बे एयरपोर्ट ले गए I उस समय युगांडा का तानाशाह ईदी अमीन था, जो ना सिर्फ अपहरणकर्ताओं से सहानुभूति रखता था बल्कि उसने युगांडा आर्मी के 100 से ज्यादा जवानों को अपहरणकर्ताओं की सहायता के लिए भेजा I एयरपोर्ट पर उतरने के बाद तीन और अपहरणकर्ता जुड़ गए, इस तरह से कुल सात अपहरणकर्ता इस साज़िश में शामिल हो गए I अब सभी बंधकों को विमान से निचे उतार कर दो हिस्से में बाँट दिया गया यहूदी और गैर-यहूदी यात्री और दोनों को ही अलग अलग कमरों में रख दिया गया I   यहूदियों में 94 इजराइल के थे, जबकि बाकि अन्य देशो के I अब सभी बंधक 100 से ज्यादा युगांडा के सैनिको और सात अपहरणकर्ताओं से घिरे थे I
                                    यह खबर फैलते ही दुनिया भर में हड़कंप मच गया । अब अपहरणकर्ताओं ने बंधकों को छुड़ाने के बदले इजराइल की जेलों में बंद 40 फिलिस्तीनी आतंकी और 13 फ्रांस और अन्य देशो की जेलों में बंद आतंकियों को छोड़ने और 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की मांग रखी I  मांग पूरा करने के लिए इजराइल सरकार को 3 दिन का समय दिया गया और मांग पूरा ना करने पर बंधकों को मार डालने की धमकी दी I इस बीच अंतराष्ट्रीय दबाव बढ़ने की वजह से गैर इसरायली बंधकों को छोड़ दिया गया I अब कुल मिलाके 94 इजरायली यात्री और 12 फ्रेंच क्रू मेंबर्स रह गए I 3 दिन की मोहलत पूरी होने के बाद इजराइल ने 3 दिन की मोहलत और मांगी मांग पूरी करने की लिए अपहरणकर्ताओं ने ३ दिन का समय और दे दिया I उधर इजराइल सरकार पे दबाव था इसरायली बंधकों को छुड़ाने का I लेकिन इजराइल की सरकार ने ना झुकने का निर्णय लिया I इजराइल सरकार ने राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ' मोसाद' को बंधकों को छुड़ाने की लिए पूरा एक्शन प्लान तैयार करने को बोला I हालाँकि यह काम इतना आसान नहीं था, 4000  किलोमीटर दूर जाकर किसी और देश में कार्रवाही करना और तब जब वह की सरकार अपहरणकर्ताओं की साथ पूरी तरह से खड़ी हो I लेकिन सरकार अपहरणकर्ताओं को सबक सिखाने के मूड में थी I मोसाद ने पूरी तत्परता से एक बेहतरीन एक्शन प्लान तैयार किया I रणनीति तैयार करते समय हर एक बिंदु को ध्यान में रखा गयाI  यहाँ तक की अगर रात को रन वे की लाइट ऑफ हो तो लैंड कैसे करना है,अपहरणकर्ताओं को चकमा कैसे देना है इत्यादि I
                                     4 जुलाई की रात को पूरी तैयारी के साथ 4 इसरायली विमान 100 कमांडोज़ को ले के युगांडा के एंतेब्बे एयरपोर्ट पर उतरे I इस पुरे ऑपरेशन को ऑपरेशन थंडरबोल्ट का नाम दिया जिसकी जिम्मेदारी लेफ्टिनेंट कर्नल योनातन नेतनयाहू को दी गई I सिर्फ 55 मिनट में इसरायली कमांडोज़ ने बंधकों को अपहरणकर्ताओं से छुड़ा लिया I इस पुरे कार्रवाही में सातों अपहरणकर्ता और यूगांडा के 50 से ज्यादा सैनिक मारे गए I जबकि एक इसरायली बंधक मारा गया और ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे लेफ्टिनेंट कर्नल योनातन नेतनयाहू को गोली लगी थी, जिन्होंने विमान में जाते समय दम तोड़ दिया I इसरायली कमांडोज़ ने एंतेब्बे एयरपोर्ट पर खड़े 20 से 40 विमानों को बम से उड़ा दिया ताकि उनका पीछा ना किया जा सके I इस पुरे ऑपरेशन की जिस तरीके से प्लानिंग की गई और जिस तरीके से कार्रवाही की गई वह अपने आप में किसी करिश्मा से कम नहीं था I इस ऑपरेशन ने इजराइल और मोसाद के कद को कई गुना बढ़ा दिया कमांडोज़ के इजराइल पहुंचने पर उनका हीरो की तरह स्वागत किया  गया I शहीद हुए लेफ्टिनेंट कर्नल योनातन नेतनयाहू को पुरे देश ने श्रंद्धांजलि अर्पित की I लेफ्टिनेंट कर्नल योनातन नेतनयाहू इस समय के इसरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई थे I इजराइल और मोसाद ने जिस ढृढ़ता से 4000 किलोमीटर घुसकर कार्यवाही की और सभी बंधकों को सुरक्षित छुड़ाकर ले आये वह इस तरह का पहला उदहारण था I
                                    इस ऑपरेशन के सफलता के पीछे मोसाद की रणनीति का बहुत बड़ा हाथ था I  रणनीति इस तरीके  से बनाई गई थी कि अपहरणकर्ताओं को भी खबर नहीं हुई और इसरायली कमांडोज़ अपना काम कर गए I रणनीति के अंतर्गत तीन प्रमुख बातो को ध्यान में रखा गया I

  •  इजराइल के कमांडोज़ को यूगांडा के आर्मी का ड्रेस पहनाया गया था ताकि अपहरणकर्ताओं को चकमा दिया जा सके I
  • यूगांडा का तानाशाह ईदी अमीन काले रंग की  मर्सिडीज़ से चला करता था और उसके पीछे 8 से 10 लैंड रोवर गाड़ियों का काफिला होता था I इस्राइली कमांडोज़ को भी बिलकुल इसी तरीके से विमान से उतारा गया I अब यूगांडा एयरपोर्ट के अधिकारियो को लगा कि ईदी अमीन का काफिला है और बिना रोक-टोक उसको आगे जाने दिया I 
  • इसरायली विमानों कि लैंडिंग रात को होनी थी तो इस बात कि पूरी सम्भावना थी कि रन वे पे अँधेरा हो I इसलिए इसरायली विमानों के चारो तरफ लाइट्स की व्यवस्था की गई I
  • जान-माल का नुकसान न हो इसलिए कमांडोज़ की टीम को तीन हिस्से में बाँट दिया गया I एक जो बंधकों को कवर करेंगे, दूसरे मौका मिलते ही बंधकों को विमान तक छोड़ कर आएंगे और तीसरे जोकि अपहरणकर्ताओं और यूगांडा आर्मी का सामना करेंगे I
  • विमान में प्राथमिक मेडिकल सुविधाओं का भी व्यवस्था था, ताकि अगर कोई बंधक या कमांडो घायल होता है तो उसे प्राथमिक उपचार दिया जा सके I
  • इसरायली विमानों के उड़ने के बाद यूगांडा के विमान उसका पीछा न कर सके I इसके लिए एयरपोर्ट के सभी विमानों और दो मिग-21 को उड़ा दिया गया I                                

Sunday, March 10, 2019

भारतीय जिन्हे नोबेल प्राइज मिला

नोबेल फाउंडेशन द्वारा दिया जाने वाला यह सम्मान दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है, जोकि महान
वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल की याद में दिया जाता है I 1901 से दिया जाने वाला यह सम्मान 6 क्षेत्रो भौतिकी, रसायन, चिकित्सा, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र  में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है I सम्मान की शुरुआत से लेकर अब तक यह सम्मान 12 भारतीयों को दिया जा चूका है, जो या तो भारत में जन्मे है या भारत के नागरिक है या भारत में लम्बे समय से शरण लिए हुए है I

  1.  रविंद्र नाथ टैगोर-
    महान बंग्ला लेखक और कवि रविंद्र नाथ टैगोर नोबेल प्राइज से सम्मानित किये जाने वाले पहले भारतीय थे I रविंद्र नाथ टैगोर को 1913 में साहित्य के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए नोबेल प्राइज दिया गया I भारतीय राष्ट्र गान 'जन गण मन' और बंग्ला देश के राष्ट्रीय गान 'अमार सोनार बंग्ला' के रचयिता रविंद्र नाथ टैगोर ही थे I रविंद्र नाथ टैगोर का जन्म भारत में हुआ था और आजीवन भारत के नागरिक रहे I
  2.  सी.वी. रमन-
    महान भौतिक शास्त्री चंद्रशेखर वेंकट रमन नोबेल प्राइज से सम्मानित किये जाने वाले दूसरे भारतीय थे I चंद्रशेखर वेंकट रमन को भौतिकी के क्षेत्र उनके महान योगदान के लिए 1930 में नोबेल सम्मान दिया गया था I चंद्रशेखर वेंकट रमन को उनके महान अविष्कार, जिसे उनके सम्मान में 'रमन प्रभाव' नाम दिया गया के लिए लिए जाना जाता है I सी.वी. रमन का जन्म भारत में हुआ था और आजीवन भारत के नागरिक रहे I सी.वी. रमन को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ' भारत रत्न' से भी सम्मानित किया जा चूका है I
  3.  हरगोविंद खुराना-
    नोबेल सम्मान पाने वाले तीसरे भारतीय हरगोविंद खुराना थे I चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए हरगोविंद खुराना को 1968 में नोबेल पुरष्कार से सम्मानित किया गया था I हरगोविंद खुराना का जन्म भारत में हुआ था लेकिन उनके पास अमेरिकन नागरिकता थी I
  4. मदर टेरेसा
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    मदर टेरेसा को उनके संस्था 'मिशनरीज ऑफ़ चैरिटीज' द्वारा कुष्ठ रोगियों की देखभाल और सेवा के लिए 1979 में शांति का नोबेल सम्मान दिया गया था I मदर टेरेसा का जन्म आयरलैंड में हुआ था, लेकिन वह भारतीय नागरिक थी I मदर टेरेसा को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से भी सम्मानित किया जा चूका है I
  5. सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर-
    सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर को 1983 में भौतिकी के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए नोबेल प्राइज से सम्मानित किया गया था I सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर भारत में जन्मे अमेरिकी नागरिक थे I
  6. अमर्त्य सेन-
    अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए नोबेल सम्मान से सम्मानित किया जा चूका है 1998 में उन्हें नोबेल सम्मान दिया गया I इसके अलावा अमर्त्य सेन को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न ' से भी सम्मानित किया जा चूका है I अमर्त्य सेन भारत में जन्मे भारतीय नागरिक है I
  7. वेंकट रमन रामकृष्णन-
    भारत में जन्मे ब्रिटिश नागरिक वेंकट रमन रामकृष्णन को रसायन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2009 में नोबेल पुरष्कार से सम्मानित किया गया था I
  8. रोनाल्ड रॉस-
    भारत में जन्मे ब्रिटिश नागरिक रोनाल्ड रॉस को1902 में चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए नोबेल पुरष्कार से सम्मानित किया गया था I
  9. रुडयार्ड किपलिंग-
    भारत में जन्मे ब्रिटिश नागरिक रुडयार्ड किपलिंग को साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 1907 में नोबेल पुरष्कार से सम्मानित किया गया था I
  10.  वी. यस. नायपाल-
    भारत से सम्बन्ध रखने वाले त्रिनिदाद और टोबैगो में जन्मे ब्रिटिश नागरिक वी. यस. नायपाल को साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2001 में नोबेल सम्मान से सम्मानित किया गया था I
  11. दलाई लामा-
    तिब्बत के महान धार्मिक गुरु दलाई लामा को शांति का नोबेल पुरष्कार दिया गया था यह सम्मान तिब्बत के लोगो के अधिकार के लिए संघर्षरत दलाई लामा को 1989 में दिया गया था I दलाई लामा का जन्म चीन में हुआ था लेकिन दलाई लामा का कर्मा स्थल भारत है और भारत में ही निवास लिए हुए है I
  12. कैलाश सत्यार्थी-
    कैलाश सत्यार्थी बाल मज़दूरी के खिलाफ काम कर रहे संस्था  'बचपन बचाओ' के संस्थापक है I कैलाश सत्यार्थी को सामाजिक क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 2014 का नोबेल शांति सम्मान दिया गया I कैलाश सत्यार्थी भारत में जन्मे भारतीय नागरिक है I

मैं दुनिया का सबसे अमीर इंसान नहीं बन सकता

बिल गेट्स जब दुनिया के सबसे अमीर इंसान बन गए तो उनसे पूछा गया, कि वह कैसा महसूस करते है, और आगे उनका लक्ष्य क्या है I बिल गेट्स ने जो जवाब दिया वह काफी हैरत में डालने वाला था I बिल गेट्स ने कहा कि सबसे पहले तो मैं आप लोगो को स्पष्ट कर दू, मैं दुनिया का सबसे अमीर नहीं, बल्कि दूसरा सबसे अमीर इंसान हु I मुझसे अमीर इंसान कोई और भी है, मेरा लक्ष्य दुनिया का सबसे अमीर इंसान बनने की है, जो शायद मुश्किल है I सभी लोग जवाब सुनके अचंभित थे, क्योकि सबको पता था कि बिल गेट्स ही दुनिया के सबसे अमीर इंसान है I फिर लोगो ने बिल गेट्स से उनके बात का स्पष्टीकरण माँगा I
                                                 बिल गेट्स ने एक पुरानी घटना का उल्लेख करते हुए बताया I एक बार संघर्ष के दिनों में मैं एयरपोर्ट पंहुचा एयरपोर्ट पहुंचकर समाचारपत्र लेने के लिए एक स्टाल पे गया, जैसे ही समाचारपत्र लेने के लिए जेब में हाथ डाला छुट्टे पैसे नहीं थे I मैं बिना समाचारपत्र लिए बिना वापिस जाने लगा, तभी उस पेपर बेचने वाले ने समाचारपत्र हाथ में पकड़ा दिया और बोला कोई बात नहीं आप कभी और दे देना I मैंने समाचार पत्र लिया और आगे बढ़ गया I तीन महीने बाद फिर उसी एयरपोर्ट पे आना हुआ, उसी लड़के के पास गया लेकिन इस बार भी छुट्टे पैसे नहीं थे I मेरी स्थिति भापकर लड़के ने इस बार भी पेपर हाथ में पकड़ा दिया, लेकिन मैंने इस बार यह कहके मना कर दिया कि पिछले बार भी पैसे नहीं दिए थे I उसने कहा याद है उसको, लेकिन यह समाचारपत्र मैं अपने लाभ के हिस्से में से दे रहा बिल गेट्स ने समाचारपत्र लिया और उस लड़के को धन्यवाद बोलते हुए आगे निकल गए I
                                                             बिल गेट्स जब दुनिया के सबसे अमीर इंसान बन गए, तो उन्होंने उस लड़के को ढूढ़ने का प्रयास किया काफी प्रयास के बाद वह लड़का मिल गया I बिल गेट्स ने उस लड़के से पूछा मुझे पहचाना लड़के  ने कहा आप बिल गेट्स है, जो अब दुनिया के सबसे अमीर इंसान है और आपने मुझसे काफी साल पहले समाचारपत्र उधार लिया था I बिल गेट्स ने उस लड़के काफी बड़ी रकम देने का ऑफर दिया लेकिन उस लड़के ने एक भी रुपया यह कहते हुए लेने से मना कर दिया कि मैं आपसे अमीर बना रहना चाहता हु I

Friday, March 8, 2019

जब रतन टाटा ने अपमान का बदला सफलता से लिया

"मैं सही निर्णय लेने में विश्वास नहीं करता, बल्कि निर्णय लेके उसको सही साबित करने में विश्वास करता हु ". - रतन टाटा

भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़े व्यावसायिक समूह टाटा समूह के प्रमुख रतन टाटा का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं I रतन टाटा की पहचान न सिर्फ एक वैश्विक बिज़नेस लीडर की है, बल्कि उन्हें मूल्य आधारित व्यवसाय और व्यवसाय के सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है I आज के युवाओ के रोल मॉडल रतन टाटा अपनी मज़बूत इच्छाशक्ति और उदार छवि के लिए जाने जाते है बहुत से ऐसे निर्णय है, जिनसे रतन टाटा ने साबित कर दिया कि अगर ज़िद हो तो कुछ भी असंभव नहीं I आज एक ऐसे ही निर्णय के बारे में बात करते है जिनसे रतन टाटा ने साबित कर दिया, क्यों वह एक मज़बूत कॉर्पोरेट लीडर है I
                                            भारत में  व्यावसायिक और भारी वाहनों की सबसे बड़ी निर्माता और विक्रेता टाटा मोटर्स अपने गुणवत्ता और सेवाओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है I ना सिर्फ भारत बल्कि दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ट्रक और बस निर्माता कंपनी है I यह बात 1998 की है, जब टाटा समूह के प्रमुख रतन टाटा ने छोटी कारों के भी उत्पादन का निर्णय लिया I रतन टाटा के निर्णय को व्यावहारिक रूप देने के लिए टाटा मोटर्स ने पुरे योजनाबद्ध तरीके से काम करना शुरू किया और आखिरकार टाटा मोटर्स की पहली छोटी कार टाटा इंडिका लॉच हुई I लेकिन कुछ तकनीकी खामियों की वजह से यह कार बाजार में अपनी खास पहचान नहीं बना पाई I इसके वजह से कंपनी को काफी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा I रतन टाटा ने टाटा मोटर्स को बचाने के लिए सवारी गाड़ी वाले सेगमेंट को बेचने का निर्णय लिया I
                                           इसी सिलसिले में उस समय की दुनिया की सबसे बड़ी सवारी गाड़ी निर्माता कंपनी फोर्ड मोटर्स के अधिकारियो से मिलने अमेरिका के कलिफोर्निआ पहुंचे I कंपनी के तत्कालीन प्रमुख बिल फोर्ड के नेतृत्व में चले 3 घंटे की मीटिंग के दौरान रतन टाटा को काफी अपमानित किया गया I यहाँ तक की फोर्ड की तरफ से  बोला गया कि जब आपको छोटी कारों का कोई अनुभव नहीं तो शुरुआत ही क्यों किया I हम आपकी कंपनी खरीद कर आपके ऊपर एहसान कर रहे है I यह बात सुनते ही रतन टाटा मीटिंग छोड़ कर बाहर आ गए I भारत वापिस आते ही रतन टाटा ने ठान लिया, इस अपमान का बदला टाटा मोटर्स को उचाईयो पे पहुंचा कर लेंगे I
                                           रतन टाटा ने कंपनी को बेचने के अपने विचार को त्याग दिया, जिसका कंपनी के संचालक मंडल ने काफी विरोध किया I लेकिन यह टाटा का व्यक्तित्व था वह टस से मस नहीं हुए I रतन टाटा ने अपनी पहली कार इंडिका के असफल होने के कारणों का गहन अध्यन किया I उसकी तकनीकी खामियों को दूर कर नया और एडवांस्ड मॉडल इंडिका V2 लॉच किया I इस कार को कार विशेषज्ञों ने काफी सराहा और इस कार ने बाजार में अपनी महत्वपूर्ण छाप छोड़ी और टाटा मोटर्स को नुकसान से उबार कर फायदे में लेके आयी I फिर टाटा मोटर्स ने पीछे मुड़के नहीं देखा I कंपनी ने कई नए मॉडल लांच किये और कंपनी का फायदा लगातार बढ़ता गया I 2008 तक टाटा मोटर्स छोटी कार के बाजार में अपना मज़बूत पकड़ बना चुकी थी I
                                         उधर फोर्ड मोटर्स का बाजार शेयर लगातार गिर रहा था और वह लगातार नुकसान झेल रही थी I नुकसान से बाहर निकलने के लिए फोर्ड मोटर्स ने अपने दो बड़े लक्ज़री कारों लैंड रोवर और जैगुआर को बेचने का निर्णय लिया I समय बदला, इस बार बिल फोर्ड मुंबई आये टाटा मोटर्स के साथ डील के सिलसिले में I यह काफी बड़ा और जोखिम भरा सौदा था लेकिन रतन टाटा ने तुरंत हा कर दी इस सौदे के लिए I बिल फोर्ड ने मीटिंग में रतन टाटा का आभार जताते हुए उनकी सराहना की और कहा कि यह दोनों कम्पनीज को खरीदकर आपने बहुत बड़ा एहसान किया हमारे ऊपर I सौदे के बाद बिल फोर्ड ने प्रेस कांफ्रेंस कर अपने व्यव्हार के लिए खेद जताया और पूरी घटना का जिक्र किया I
                                       जैगुआर और लैंड रोवर को खरीदने के बाद अपनी दूरदर्शिता और निर्णय क्षमता से रतन टाटा ने इन दोनों नुकसान उठाने वाली कम्पनीज को फायदे में पंहुचा दिया I आज इन दोनों ही कारों को दुनिया के बड़े लक्सरी कारों में गिना जाता है I यह रतन टाटा का व्यक्तित्व था, जिसने इस पुरे निर्णय को लेकर साबित कर दिया कि अपमान का बदला अपमान नहीं, बल्कि सफलता से भी लिया  जा सकता है I
                                          

Wednesday, March 6, 2019

एक सफल डोमेन ट्रेडर बनने के लिए किन बातो को ध्यान में रखे

डोमेन ट्रेडिंग क्या होता है और इससे पैसा कैसे कमाते है इससे सम्बंधित पोस्ट पहले ही पोस्ट किया जा चूका है I पढ़ने के लिए  दिए लिंक पर क्लिक करे.... डोमेन ट्रेडिंग क्या है और इससे पैसे कैसे कमाते है I आज के पोस्ट में बात करते है एक सफल डोमेन ट्रेडर बनने के लिए किन - किन बातो को ध्यान में रखना चाहिए I
1. डोमेन नाम छोटा होना चाहिए - डोमेन नाम खरीदते समय इस बात का बिलकुल ध्यान रखे कि डोमेन नाम छोटा हो I जितना छोटा नाम होगा उतनी ही ज्यादा उसकी मांग होगी और कीमत भी I जैसे candy.com यह डोमेन नाम कुछ डॉलर्स में ख़रीदा गया लेकिन  मिलियंस में बिका I
2. डोमेन नाम अर्थवाचक हो - डोमेन नाम अर्थहीन न हो इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए I अर्थवाचक डोमेन नाम की कीमत ज्यादा होती है I जैसे - economy.com
3. हमेशा .com को प्राथमिकता दे - डोमेन नाम कई तरह के होते है जैसे .in, .org, .uk, .us, .biz, .com इत्यादि लेकिन सबसे ज्यादा  मांग .com की होती है क्योकि यह वैश्विक डोमेन नाम होता है I इसलिए डोमेन नाम खरीदते समय .com को ही प्राथमिकता दे I
4. कम कीमत पर ही डोमेन ख़रीदे - सामान्य रूप से डोमेन 99 रूपये से 499 रूपये तक मिल जाते है और हमेशा इसी कीमत तक डोमेन नाम को चुने I इससे जोखिम की मात्रा काफी कम हो जाती है इससे ज्यादा  रेट पर खरीदने वाले या तो कम्पनीज होती है या पेशेवर डोमेन ट्रेडर I
5. EXPIRED डोमेन को प्राथमिकता दे - ऐसे डोमेन नाम जो जल्द ही expire होने वाले है ऐसे डोमेन के ज्यादा रेट में बिकने के चान्सेस ज्यादा होते है विशेष रूप से जब यह किसी फर्म के नाम से हो I ऐसे डोमेन नाम को ख़रीदा जा सकता है I
6. प्रचलित नाम के डोमेन की वैल्यू ज्यादा होती है - कुछ प्रचलित नाम जैसे इकॉनमी, मनी, सेक्स, पोर्न, इंडिया, कनाडा, ट्रेड, बिज़नेस, क्लासेज, डॉलर की कीमत काफी ज्यादा होती है I अगर इस तरह के डोमेन नाम मिल जाये, तो आपकी बल्ले- बल्ले हो जाएगी I 

Tuesday, March 5, 2019

डोमेन ट्रेडिंग क्या है और इससे पैसे कैसे कमाते है

 डोमेन ट्रेडिंग आज के समय का उभरता हुआ बिज़नेस आईडिया है I जिससे बहुत मामूली निवेश में लाखो रूपये बनाये जा सकते है I आज के समय में लाखो लोग इस से जुड़े हुए है और अच्छा पैसा कमा रहे है I इससे पहले की डोमेन ट्रेडिंग की बात करे पहले समझते है डोमेन क्या होता है ?
                                            हमें जब भी कही जाना होता है सबसे पहले हम उसका पता पूछते है उसी तरीके से जब किसी वेबसाइट पे जाना होता है I तो वहां  भी हम सबसे पहले उसका पता एंटर करना होता है तभी उस वेबसाइट तक जा सकते है I जैसे बिना पता के घर पहुंचना संभव नहीं उसी तरीके से बिना डोमेन नाम के आप किसी वेबसाइट तक नहीं पहुंच सकते I तो इतना तो स्पष्ट हो गया कि डोमेन नाम किसी भी वेबसाइट तक पहुंचने का पता है, जो हमें उस वेबसाइट तक पहुंचाता है I अब जैसे मुझे स्टॉक मार्किट के बारे जानना है तो www.aksrivastava.com ,समाचार पढ़ना है तो www.zeenews.com और कुछ ढूढ़ना है तो www.google.com सर्च बार में टाइप करते है I
                                         डोमेन नाम समझने के बाद, बात करते है डोमेन ट्रेडिंग क्या होता है ? डोमेन ट्रेडिंग का सीधा मतलब है डोमेन नाम  खरीद बिक्री कर पैसे कमाना I इसको एक उदहारण के माध्यम से आसान शब्दों में समझते है I मैंने अपनी मन पसंद का एक डोमेन नाम www.vedantaclasses.com 99 रूपये  में खरीद लिया I अब किसी और को यह डोमेन नाम पसंद आ गया I लेकिन www.vedantaclasses.com तो मैंने खरीद लिया है I अब अगर उसे यह डोमेन www.vedantaclasses.com चाहिए तो निश्चित रूप से उसे मुझसे संपर्क करना होगा I डोमेन नाम की उपयोगिता और मांग के हिसाब से 9,999  रूपये कीमत लगाई  I अगर उसे जरुरत है और तैयार है उतनी कीमत देने को तो मैंने उससे पैसे लिए, और डोमेन नाम बेच दिया I इस तरीके से मैंने इस डोमेन नाम की ट्रेडिंग से मैंने  9,900 रूपये कमाए I
  डोमेन ट्रेडिंग कैसे करे -डोमेन नाम की खरीद बिक्री करने के लिए सबसे पहले डोमेन ट्रेडिंग प्रोवाइडिंग प्लेटफार्म पे पंजीकरण करना होता है I पंजीकरण की प्रक्रिया बिलकुल मुफ्त और सरल है आपके पास मोबाइल नंबर और ईमेल होना चाहिए I पंजीकरण करने के बाद अपना डोमेन वह पार्क कर सकते है I कुछ पार्किंग प्लेटफॉर्म वेबसाइट कुछ मामूली चार्ज लेती है I  डोमेन नाम पार्क करने का मतलब है आपने अपना डोमेन बिकने के लिए बाजार में लगा रखा है I अगर किसी को आपका डोमेन नाम पसंद आया तो वह भुगतान करता है और डोमेन नाम खरीद लेता है I  डोमेन पार्क करने वाली वेबसाइट कुछ मामूली कमीशन कम कर पाकी पैसा आपके अकाउंट में तुरंत जमा कर देती है I कुछ डोमेन ट्रेडिंग के लिए कुछ प्रमुख वेबसाइट है www.seedo.com, www.godaddy.com I
डोमेन नाम कहां से ख़रीदे - डोमेन खरीदने के लिए अपनी सुविधानुसार किसी भी वेबसाइट से खरीद सकते है कुछ प्रमुख वेबसाइट जहां से डोमेन ख़रीदा जा सकता है godaddy.com, bigrock.com, weebly.com, wix.com I
सफल डोमेन ट्रेडर कैसे बने - आज लाखो लोग डोमेन ट्रेडिंग से अच्छा पैसा बना रहे है डोमेन ट्रेडिंग को पार्ट टाइम या फुल टाइम दोनों तरीके से किया जा सकता है सबसे अच्छी बात है डोमेन ट्रेडिंग में रिस्क और निवेश बहुत कम है जबकि लाभ का पूरा स्कोप जो आपके क्षमता पे निर्भर करता है I 'एक सफल डोमेन ट्रेडर बनने के लिए किन - किन बातो को ध्यान में रखे ' पढ़ने के लिए दीये लिंक पर क्लिक करे .....एक सफल डोमेन ट्रेडर बनने के लिए किन बातो को ध्यान में रखे I