Thursday, March 21, 2019

गरीब बनाम अमीर- आदतों का तुलनात्मक अध्ययन

" गरीब लोगों के पास बड़ा टेलीविजन होता है जबकि अमीर लोगों के पास बड़ा पुस्तकालय ".
                                                                            - जिम रॉन 
नेपोलियन हिल की बेस्ट सेलर किताब 'थिंक एंड ग्रो रिच ' में हिल ने जब सफल और अमीर लोगो की आदतों का अध्ययन किया, तो पाया कि वह सफल और अमीर इसलिए है क्योकि उनकी सोच अमीरो वाली है I इंसान की जिस तरह की आदते होती है और वह जिस तरह की सोच रखता है, निश्चित रूप से वह उसी तरीके से बन जाता है I इस किताब को पढ़ने से पहले मुझे भी यही लगता था कि सफल होना या अमीर होना भाग्य बात है, लेकिन इस किताब को पढ़ने के बाद मुझे समझ आया कि अगर कोई सफल या अमीर है तो वह इसलिए क्योकि उसकी सोच वैसी है I इस किताब के अलावा रोबर्ट कियोसोकि द्वारा लिखित किताब '  रिच डैड पुअर डैड ' का  अध्ययन किया, तो गरीब मानसिकता वाले लोग और अमीर मानसिकता वाले लोगो में कुछ सामान्य अंतर जो मुझे समझ में आया  वह है I

  1. बचत की आदत (Saving habit)- दुनिया के तीसरे सबसे अमीर इंसान और निवेशक वारेन बफेट के अनुसार " इंसान को बचत के बाद बचे पैसे को खर्च करना चाहिए , नाकि खर्च के बाद बचे पैसे को बचत करना चाहिए" I एक गरीब मानसिकता वाला इंसान हमेशा अपनी कमाई में से पहले खर्च करता है और अगर कुछ बचा तो ही बचत के बारे में सोचता है, जबकि अमीर इंसान पहले अपनी कमाई में से बचत के लिए पैसे निकाल लेता है और बचे हुए पैसे को खर्च करता है  I साल 2008 की बात है मै जहाँ रहता था उसके ठीक सामने दो लोग किराये के मकान में रहा करते थे मिस्टर गुप्ता और मिस्टर सिन्हा I मिस्टर गुप्ता की महीने की कमाई मिस्टर सिन्हा से बिलकुल आधी थी, लेकिन मिस्टर गुप्ता की आदत थी अपनी कमाई का 25% बचत करना उसके बाद ही वह बाकि खर्चो के बारे में सोचते थे I मिस्टर सिन्हा का स्वभाव बिलकुल विपरीत था वह पहले खर्च करते थे फिर अगर कुछ बचा तो बचत करते थे I आज 11 साल बाद जब उनसे मिला तो मिस्टर सिन्हा आज भी किराये के मकान में रहते है, जबकि मिस्टर गुप्ता ने अपना घर ले लिया I यह कहानी सिर्फ मिस्टर गुप्ता और मिस्टर सिन्हा की नहीं है, आपको अपने आसपास बहुत सारे ऐसे लोग मिल जायेंगे जो अच्छा कमाने के बावजूद वित्तीय रूप से परेशान रहते है I 
  2. निवेश की आदत (Investment habit) - गरीब मानसिकता वाले लोग के पास अगर कुछ बचत है भी तो हमेशा उसको अपने पास रखेंगे या ऐसी जगह निवेश करेंगे जहाँ जोखिम ना हो I जबकि अमीर मानसिकता वाले लोग हमेशा अपने बचत को वहां लगाते है जहाँ से उन्हें अच्छी आय हो I अर्थात हमे सिर्फ बचत  ही नहीं करना है बल्कि सही जगह निवेश भी करना है I चलिए एक उदहारण से इसे समझते है, चार दोस्त अमित, रवि, प्रीति और अंशु जिन्होंने अपनी बचत की रकम ₹1,00,000 अलग- अलग जगह निवेश किया I  अमित ने बचत की रकम अपने पास ही रखी क्योकि वह किसी तरह का जोखिम लेने को तैयार नहीं था, रवि भी जोखिम से बचना  चाहता था इसलिए बैंक के सेविंग अकाउंट में यह जमा कर दिया जहाँ से उसे 4 % ब्याज मिलता है, प्रीति थोड़ा सा जोखिम लेने को तैयार थी इसलिए बैंक में फिक्स्ड डिपाजिट करा दिया जहाँ उसे 7 % ब्याज मिलेगा, अंशु जोखिम लेने को तैयार थी इसलिए म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश कर दिया जहाँ उसे तक़रीबन 15 % आय मिलेगा  I महंगाई दर अगर 4 % है तो देखते है इन चारो का ₹1,00,000 पांच साल बाद कितना बन जायेगा  I ( निवेश+आय - मंहगाई ) अमित (1,00,000 + 0 - 20,000) = 80,000, रवि (1,00,000 + 20,000 - 20,000) = 1,00,000, प्रीति (1,00,000 + 35,000 - 20,000) = 1,15,000, अंशु ( 1,00,000 + 75,000 - 20,000) = 1,55,000
  3.  संपत्ति निर्माण (Asset creation)- गरीब इंसान विलासी वस्तुओ जैसे मोटरकार, महंगे  कपडे, महंगे  जुटे पर ज्यादा खर्च करता है और उसके लिए क़र्ज़ लेने को भी तैयार हो जाता है I अब इसके तीन  नुकसान है पहला आप ब्याज के रूप में उस सामान के लिए मूल्य से अधिक भुगतान कर रहे, दूसरा यह ऐसे सामान है जिनकी कीमत लगातार कम होनी है, तीसरा क़र्ज़ की वजह से दायित्य बढ़ गया I अमीर इंसान की सोच हमेशा ऐसी चीज़ो पे पैसे लगाने की होती है, जिससे संपत्ति निर्माण हो जैसे ज़मीन या बिल्डिंग खरीद कर किराया पर लगा देना, निवेश कर देना अब इससे इनका एक तो संपत्ति निर्माण हो रहा है दूसरा नियमित रूप से इससे आय आ रहा I 
  4. दीर्घकालिक दृश्टिकोण (Long term perspective) -  गरीब मानसिकता वाले लोगो की पैसे और निवेश के मामले में दृष्टिकोण हमेशा अल्पकाल के लिए होता है, जबकि अमीर हमेशा दीर्घकालीन दृष्टिकोण रखते है I जैसे मोटरकार की अभी जरुरत है तो उसे किसी भी दशा में खरीदना है, चाहे इसके लिए क्यों न लोन लेना पड़े लेकिन I अमीर लोगो की सोच इसके ठीक विपरीत है वह सोचते है अभी तत्काल में मोटरकार की जरुरत है, लेकिन अभी हम मोटरकार खरीदने की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट से भी काम चला सकते है I जब हम इस स्थिति में होंगे कि हम बिना लोन लिए इसको खरीद सके तभी इसको खरीदेंगे I
  5.  सीखने की भूख (Hunger for learning)- किसी इंसान की नौकरी लग गई या कोई छोटा व्यापारी है अब वह 10 से 6 काम पे जायेगा और घर आने के बाद टेलीविजन देखेगा I क्योकि उसे लगता है कि अब तो उसकी ज़िन्दगी स्थिर है, और अब उसे कुछ नया सीखने की जरुरत नहीं है I लेकिन अमीर इंसान हमेशा नयी चीज़े सीखने के लिए लालायित रहता है I वह हमेशा कुछ नए आईडिया के बारे में सोचता रहता और अपने को समय के साथ समायोजित कर लेता है I कैसे वह अपने काम को आगे बढ़ा सकता है, अतिरिक्त आय के क्या-क्या साधन हो सकते है, किन नयी तकनीकों सहारे वह व्यवसाय उचाईयो पे ले जा सकता है I भारत के सबसे बड़े कॉर्पोरेट समूह टाटा ग्रुप के प्रमुख रतन टाटा उम्र के इस पड़ाव पर भी नयी चीज़े सीखते रहते है और पूरा टाइम सक्रिय रहते है जब कि वह रिटायरमेंट ले चुके है I 
  6. किताब के प्रति प्रेम ( Book Lover)- क्या आपने कभी लैंड रोवर(Land Rover), जैगुआर(Jaguar), लैम्बोर्गिनी(Lamborgini) और मर्सिडीज़(Mercedez) का विज्ञापन टेलीविजन पे देखा है, नहीं I क्योकि इन कम्पनीज को पता है कि जिन लोगो के पास  इतनी क्षमता है इन गाड़ियों को खरीदने का, वह टेलीविजन नहीं देखते और जो लोग टेलीविजन देखते है उनके पास इतनी क्षमता नहीं है कि वह इन गाड़ियों को खरीद सके I गरीब मानसिकता रखने वाले लोग हमेशा टेलीविजन पर अपना समय देते है जबकि अमीर लोग हमेशा अपना समय किताब पढ़ने के लिए देते है I भारत के सबसे बड़े व्यावसायिक समूह टाटा ग्रुप के प्रमुख रतन टाटा, दुनिया के सबसे अमीर इंसान बिल गेट्स, दुनिया के सबसे बड़े निवेशक वारेन बफेट, एशिया के सबसे जैक मा इतने व्यस्त होने के बावजूद दिन में 4-5 घंटे किताब पढ़ने के लिए देते है I

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