Tuesday, March 12, 2019

मोसाद का ऑपरेशन थंडरबोल्ट

ऑपरेशन थंडरबोल्ट दुनिया के इतिहास की कुछ गिने-चुने सफलतम रेस्क्यू ऑपरेशन्स में से एक माना जाता है I इजराइल की राष्ट्रीय जाँच एजेंसी 'मोसाद' के नेतृत्व में किये गए, इस रेस्क्यू ऑपरेशन की कहानी बिलकुल फिल्मी लगती है, जिसे विश्वास करना थोड़ा मुश्किल लगता है, लेकिन यह बिलकुल सच है I 27 जून 1976 को एयर फ्रांस का A300 विमान 248 यात्रियों को ले के यूनान के एथेंस एयरपोर्ट से तेल अवीव (इजराइल) होते हुए हुए पेरिस (फ्रांस) के लिए उड़ा I उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद उन्ही 248 यात्रियों के बीच बैठे, हथियार से लैस चार अपहरणकर्ताओ द्वारा इस विमान का अपहरण कर लिया गया I अपहरणकर्ताओं में से दो फिलिस्तीन की आज़ादी के समर्थक 'पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ द लिबरेशन ऑफ़ फिलिस्तीन' के सदस्य थे, जबकि बाकि दो 'जर्मन रेवोलुशनरी सेल्स' के सदस्य थे I अपहरणकर्ताओं ने बन्दुक की नोक पर विमान का रास्ता बदलवा दिया और पायलट को विमान युगांडा के एंतेब्बे एयरपोर्ट ले जाने को बोला I लेकिन विमान में ईंधन की कमी होने के कारण विमान की इमरजेंसी लैंडिंग लीबिया के बेंगाची एयरपोर्ट पर कराइ गई I बेंगाची एयरपोर्ट पर ईंधन भरने के बाद विमान को युगांडा के एंतेब्बे एयरपोर्ट ले गए I उस समय युगांडा का तानाशाह ईदी अमीन था, जो ना सिर्फ अपहरणकर्ताओं से सहानुभूति रखता था बल्कि उसने युगांडा आर्मी के 100 से ज्यादा जवानों को अपहरणकर्ताओं की सहायता के लिए भेजा I एयरपोर्ट पर उतरने के बाद तीन और अपहरणकर्ता जुड़ गए, इस तरह से कुल सात अपहरणकर्ता इस साज़िश में शामिल हो गए I अब सभी बंधकों को विमान से निचे उतार कर दो हिस्से में बाँट दिया गया यहूदी और गैर-यहूदी यात्री और दोनों को ही अलग अलग कमरों में रख दिया गया I   यहूदियों में 94 इजराइल के थे, जबकि बाकि अन्य देशो के I अब सभी बंधक 100 से ज्यादा युगांडा के सैनिको और सात अपहरणकर्ताओं से घिरे थे I
                                    यह खबर फैलते ही दुनिया भर में हड़कंप मच गया । अब अपहरणकर्ताओं ने बंधकों को छुड़ाने के बदले इजराइल की जेलों में बंद 40 फिलिस्तीनी आतंकी और 13 फ्रांस और अन्य देशो की जेलों में बंद आतंकियों को छोड़ने और 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की मांग रखी I  मांग पूरा करने के लिए इजराइल सरकार को 3 दिन का समय दिया गया और मांग पूरा ना करने पर बंधकों को मार डालने की धमकी दी I इस बीच अंतराष्ट्रीय दबाव बढ़ने की वजह से गैर इसरायली बंधकों को छोड़ दिया गया I अब कुल मिलाके 94 इजरायली यात्री और 12 फ्रेंच क्रू मेंबर्स रह गए I 3 दिन की मोहलत पूरी होने के बाद इजराइल ने 3 दिन की मोहलत और मांगी मांग पूरी करने की लिए अपहरणकर्ताओं ने ३ दिन का समय और दे दिया I उधर इजराइल सरकार पे दबाव था इसरायली बंधकों को छुड़ाने का I लेकिन इजराइल की सरकार ने ना झुकने का निर्णय लिया I इजराइल सरकार ने राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ' मोसाद' को बंधकों को छुड़ाने की लिए पूरा एक्शन प्लान तैयार करने को बोला I हालाँकि यह काम इतना आसान नहीं था, 4000  किलोमीटर दूर जाकर किसी और देश में कार्रवाही करना और तब जब वह की सरकार अपहरणकर्ताओं की साथ पूरी तरह से खड़ी हो I लेकिन सरकार अपहरणकर्ताओं को सबक सिखाने के मूड में थी I मोसाद ने पूरी तत्परता से एक बेहतरीन एक्शन प्लान तैयार किया I रणनीति तैयार करते समय हर एक बिंदु को ध्यान में रखा गयाI  यहाँ तक की अगर रात को रन वे की लाइट ऑफ हो तो लैंड कैसे करना है,अपहरणकर्ताओं को चकमा कैसे देना है इत्यादि I
                                     4 जुलाई की रात को पूरी तैयारी के साथ 4 इसरायली विमान 100 कमांडोज़ को ले के युगांडा के एंतेब्बे एयरपोर्ट पर उतरे I इस पुरे ऑपरेशन को ऑपरेशन थंडरबोल्ट का नाम दिया जिसकी जिम्मेदारी लेफ्टिनेंट कर्नल योनातन नेतनयाहू को दी गई I सिर्फ 55 मिनट में इसरायली कमांडोज़ ने बंधकों को अपहरणकर्ताओं से छुड़ा लिया I इस पुरे कार्रवाही में सातों अपहरणकर्ता और यूगांडा के 50 से ज्यादा सैनिक मारे गए I जबकि एक इसरायली बंधक मारा गया और ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे लेफ्टिनेंट कर्नल योनातन नेतनयाहू को गोली लगी थी, जिन्होंने विमान में जाते समय दम तोड़ दिया I इसरायली कमांडोज़ ने एंतेब्बे एयरपोर्ट पर खड़े 20 से 40 विमानों को बम से उड़ा दिया ताकि उनका पीछा ना किया जा सके I इस पुरे ऑपरेशन की जिस तरीके से प्लानिंग की गई और जिस तरीके से कार्रवाही की गई वह अपने आप में किसी करिश्मा से कम नहीं था I इस ऑपरेशन ने इजराइल और मोसाद के कद को कई गुना बढ़ा दिया कमांडोज़ के इजराइल पहुंचने पर उनका हीरो की तरह स्वागत किया  गया I शहीद हुए लेफ्टिनेंट कर्नल योनातन नेतनयाहू को पुरे देश ने श्रंद्धांजलि अर्पित की I लेफ्टिनेंट कर्नल योनातन नेतनयाहू इस समय के इसरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई थे I इजराइल और मोसाद ने जिस ढृढ़ता से 4000 किलोमीटर घुसकर कार्यवाही की और सभी बंधकों को सुरक्षित छुड़ाकर ले आये वह इस तरह का पहला उदहारण था I
                                    इस ऑपरेशन के सफलता के पीछे मोसाद की रणनीति का बहुत बड़ा हाथ था I  रणनीति इस तरीके  से बनाई गई थी कि अपहरणकर्ताओं को भी खबर नहीं हुई और इसरायली कमांडोज़ अपना काम कर गए I रणनीति के अंतर्गत तीन प्रमुख बातो को ध्यान में रखा गया I

  •  इजराइल के कमांडोज़ को यूगांडा के आर्मी का ड्रेस पहनाया गया था ताकि अपहरणकर्ताओं को चकमा दिया जा सके I
  • यूगांडा का तानाशाह ईदी अमीन काले रंग की  मर्सिडीज़ से चला करता था और उसके पीछे 8 से 10 लैंड रोवर गाड़ियों का काफिला होता था I इस्राइली कमांडोज़ को भी बिलकुल इसी तरीके से विमान से उतारा गया I अब यूगांडा एयरपोर्ट के अधिकारियो को लगा कि ईदी अमीन का काफिला है और बिना रोक-टोक उसको आगे जाने दिया I 
  • इसरायली विमानों कि लैंडिंग रात को होनी थी तो इस बात कि पूरी सम्भावना थी कि रन वे पे अँधेरा हो I इसलिए इसरायली विमानों के चारो तरफ लाइट्स की व्यवस्था की गई I
  • जान-माल का नुकसान न हो इसलिए कमांडोज़ की टीम को तीन हिस्से में बाँट दिया गया I एक जो बंधकों को कवर करेंगे, दूसरे मौका मिलते ही बंधकों को विमान तक छोड़ कर आएंगे और तीसरे जोकि अपहरणकर्ताओं और यूगांडा आर्मी का सामना करेंगे I
  • विमान में प्राथमिक मेडिकल सुविधाओं का भी व्यवस्था था, ताकि अगर कोई बंधक या कमांडो घायल होता है तो उसे प्राथमिक उपचार दिया जा सके I
  • इसरायली विमानों के उड़ने के बाद यूगांडा के विमान उसका पीछा न कर सके I इसके लिए एयरपोर्ट के सभी विमानों और दो मिग-21 को उड़ा दिया गया I                                

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