Wednesday, March 20, 2019

कहाँ तुम चले गए

विश्व गौरैया दिवस (World Sparrow  Day ) पर विशेष 
मुझे आज भी याद है होश सँभालने के बाद तुम्हारा पहला दीदार जब तुम्हे घर के आँगन में चहकते हुए देखा था ,फिर तो हमारा यह दिनचर्या का हिस्सा बन गया I तुम सुबह-सुबह प्रतिदिन घर के आँगन में आ जाया करती थी, मैं तुम्हे देखता और पकड़ने का असफल प्रयास करता I लेकिन तुम्हारी भी जिद्द थी हाथ न आने की I फिर स्कूल से आते ही अपना खेल शुरू हो जाता, तुम सामने नीम के पेड़ पर बैठके मुझे खेलते हुए देखती और मैं तुम्हे देखके मुस्कराता रहता I अँधेरा होते ही अगले दिन मिलने का वादा कर और एक दूसरे को अलविदा कह हम दोनों अपने-अपने घर के लिए चले जाते थे I मुझे याद नहीं तुमने कभी अपने मिलने का वादा तोड़ा हो या कभी मिलने आने में देरी की हो I हाँ मैंने कई बार तुमसे वादा जरूर तोड़ा, कभी-कभी देर से मिलने आया, लेकिन तुमने कभी शिकायत नहीं किया I मुझे वह जून के महीने का दोपहर भी अच्छे से याद है,जब तुम घर के अंदर आ गई थी और मैंने तुम्हे धोखे से पकड़ लिया था I लेकिन तुम अच्छे से इस बात से परिचित थी कि मेरा इरादा तुम्हे नुकसान पहुँचाने का नहीं था I हां वह होली का दिन कैसे भूल सकता हु, जब मैंने तुम्हे पकड़ लिया था और लाल- हरे रंग से नहला कर तुम्हे उड़ने के लिए आज़ाद कर दिया था I इन सब के बीच हमें कब एक दूसरे की आदत लग गई, शायद समझ नहीं आया I मुझे ऐसा कोई दिन याद नहीं, जब हम ना मिले हो, समय के साथ हमारा प्यार बढ़ता ही गया I घर के आँगन में तुम्हे फुदकते-फुदकते दाने चुगते हुए देखने का तो आनंद ही कुछ और था जिसको शब्दों में बयां करना संभव नहीं I
                                                लेकिन मोबाइल आने के बाद मैंने तुमसे मिलना कम कर दिया और तुमने आना भी कम कर दिया I क्योकि तुम्हे पता था कि अब मुझे तुम्हारी जरुरत नहीं रही या शायद तुम्हारी जगह अब वह मोबाइल ले चूका था I अब हमारे बीच मोबाइल आ चूका था और शायद हम तीनो एक साथ नहीं रह सकते थे I इसलिए तुम मेरी ख़ुशी की खातिर हमेशा के लिए मुझसे दूर चली गई I मैं भी मोबाइल की बनावटी दुनिया में इस तरीके से खो गया, कि मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा तुम्हारे जाने का और नहीं मैंने प्रयास किया तुम्हे रोकने का I तुम्हारे चहकने की जगह अब मोबाइल के गानों ने ले लिया था, यूट्यूब के कॉमेडी वीडियो अब तुम्हारी जगह हंसाते थे और सैकड़ो फेसबुक के दोस्तों ने तुम्हारी कमी महसूस नहीं होने दी I
                                                लेकिन हे गौरैया आज मुझे समझ में आया कोई भी संगीत वह सुकून नहीं दे सकती जो सुकून तुम्हारे चहकने से मिला करता था, तुम्हे देखके जो ख़ुशी मिलती थी वह यूट्यूब के कॉमेडी वीडियोस नहीं दे सकते, फेसबुक के सैकड़ो दोस्तों में मुझे एक भी ऐसा नहीं मिला, जिसमे तुम्हारे जितना समर्पण हो I ऐसा भी नहीं है कि मैंने तुम्हे ढूंढने का का प्रयास ना किया हो हिंदुस्तान के हर एक कोने में ढूँढ लिया, लेकिन तुम मुझे कही नहीं मिली I अब जब भी घर आता हु सबसे पहले नज़रे उस आँगन की तरफ जाती है जहां तुम्हारा पहली बार दीदार हुआ था, हां उस नीम की डाली पे भी देखा जहा बैठके तुम मुझे खेलते हुए देखा करती थी है, वह सरसो का खेत भी देखना नहीं भुला जहा तुम कभी- कभी चली जाया करती थी I उस आँगन में भी बार- बार नज़र दौड़ाई, जहाँ तुम फुदकते- फुदकते  दाने चुगने आया करती थी, लेकिन तुम मुझे कही भी नहीं दिखी I हां तुम्हारा रूठना भी लाजमी है क्योकि इन सब के लिए मैं जिम्मेदार था I यह जानते हुए कि मोबाइल टावर से पैदा होने वाले रेडिएशन के बीच तुम ज़िंदा नहीं रह सकती, मैंने मोबाइल को प्राथमिकता दिया I उम्मीद करता हु कि फिर कभी तुम्हारा दीदार हो और फिर मुझे मोबाइल के संगीत की जगह तुम्हारे चहकने की आवाज़ सुनने को मिले और तुम्हे फिर फुदकते-फुदकते हुए घर की आँगन में दाने चुगते हुए देखु I

गौरैया के बारे में कुछ रोचक तथ्य -

  • गौरैया पक्षी भारत समेत एशिया, अमेरिका और यूरोप में पायी जाती है I
  • यह एक घरेलु पक्षी है जो सामान्तया छतो पर या घर के आस पास अपना घोसला बनाती है I
  • इस चिड़िया को घरो में ख़ुशी का प्रतीक माना है I
  • आजसे दस साल पहले तक यह भारत के हर घर में बहुतायत मात्रा में दिख जाती थी, लेकिन मोबाइल रेडिएशन की वजह से लगभग विलुप्त हो चुकी है I
  • इसका वैज्ञानिक नाम पासर डोमेस्टिकस है I
  • गौरैया अब विलुप्त होने के कगार पे पहुंच चुकी है और इसीलिए इसे लाल जोन( रेड जोन) की सूची में रखा गया है I
  • गौरैया को बचाने के लिए 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है जिसकी शुरुआत 2010 में की गई थी I
  • गौरैया के संरक्षण के लिए कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय संस्थाए जागरूकता अभियान चला रही है I

2 comments:

  1. itne khoobsurat post ke liye dhanyavad. post padhke aaj emotional ho gai.

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  2. इंसान आज टेक्नोलॉजी का गुलाम बन चूका है,चाहकर भी अब इसे छोड़ नहीं सकता I इतनी बड़ी बात को इतने सहज शब्दों में बयां करने का आपका अंदाज़ अनोखा है I

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