Saturday, March 23, 2019

किशोर कुमार- मिलेनियम सिंगर

"किशोर कुमार ने जब भी किसी के साथ गाना गया, चाहे वह पुरुष गायक हो या महिला उस गाने में सिर्फ किशोर कुमार ही छाये रहे " I 
                                            - जावेद अख्तर 
किशोर कुमार एक ऐसा नाम जो पर्याय है भारतीय पार्श्व गायन का बिना भारतीय संगीत अधूरा है I एक ऐसा बहुमुखी कलाकार जो एक बेहतरीन गायक होने के साथ-साथ एक बेहतरीन अभिनेता, संगीतकार, निर्माता, निर्देशक और गीतकार भी थे I तक़रीबन तीन दशक तक भारतीय सिनेमा पर एकछत्र राज करने वाले किशोर कुमार एक अच्छे कलाकार के अलावा ज़मीन से जुड़े हुए एक अच्छे इंसान थे I
प्रारंभिक जीवन-
भारतीय सिनेमा के शिखर पुरुष किशोर का जन्म मध्य प्रदेश के खंडवा में 4 अगस्त,1929 को एक बंगाली परिवार में हुआ था I इनके पिता कुंजलाल गांगुली एक वकील और माता गौरी देवी गृहणी थी I किशोर कुमार के बचपन का नाम आभाष कुमार गांगुली था और किशोर कुमार अपने चार भाई-बहनो अशोक कुमार, अनूप कुमार, गीता देवी में सबसे छोटे थे I अशोक कुमार भी भारतीय सिनेमा में बहुत बड़े नाम है और इन्हे भारतीय सिनेमा के लिए सर्वोच्च सम्मान 'दादा साहब फ़ालके ' दिया जा चूका है, दूसरे भाई अनूप कुमार ने भी कुछ फिल्मो में अभिनय किया I किशोर कुमार का प्रारंभिक जीवन खंडवा में ही बीता किशोर कुमार की शिक्षा-दीक्षा भी खंडवा से ही हुई I
 फ़िल्मी करियर (संघर्ष का दौर)- 1940 के दशक में किशोर कुमार के बड़े भाई अशोक कुमार भारतीय सिनेमा में अभिनय के क्षेत्र में अपनी पहचान बना चुके थे, और यही कारण है किशोर कुमार के परिवार का मुंबई आना- जाना लगा रहता था I किशोर कुमार का बचपन का शौक गायक बनने का था और उस समय के महान गायक कुन्दनलाल सहगल के आवाज़ की नक़ल करते थे I किशोर कुमार कुंदन लाल सहगल को ही अपना गुरु मानते थे I लेकिन अशोक कुमार चाहते थे कि किशोर कुमार अभिनेता बने I अशोक कुमार के सिफारिश पर किशोर कुमार को कुछ फिल्मो में अभिनय और गायन का मौका मिला, जिनमे प्रमुख थे 'शिकारी' और 'ज़िददी I 1946 से 1955 के बीच 20 से ज्यादा फिल्मो में किशोर कुमार ने अभिनय और गायन किया , लेकिन ज्यादातर फिल्मे फ्लॉप रही I कुछ चली भी तो किशोर कुमार को कोई खाश पहचान नहीं मिला I 1955 के बाद आयी फिल्म 'नौक़री' किशोर कुमार के लिए काफी अच्छी रही और इनके अभिनय को सराहा गया I फिर कुछ और फिल्मो जैसे 'बाप रे बाप' की  वजह से अभिनय में किशोर कुमार को पहचाना जाना लगे I
                                                  किशोर कुमार अपने अभिनय से संतुष्ट नहीं थे, उन्हें कहीं ना कहीं यह लग रहा था कि वह अपने सपने को दफ़न कर रहे है I लेकिन उनके बड़े भाई अशोक कुमार की ज़िद्द थी किशोर कुमार को अभिनेता बनाने की I अशोक कुमार ने हालाँकि शुरूआती दौर में किशोर कुमार को गाने का मौका दिलाया काफी फिल्मो में लेकिन लोगो को किशोर कुमार की आवाज़ पसंद नहीं आयी I निर्माता- निर्देशक भी अब किशोर कुमार को गायन में मौका नहीं देना चाहते थे, जिसके दो प्रमुख कारण थे पहला किशोर कुमार को शास्त्रीय संगीत की जानकारी नहीं थी जिसके बिना गायन संभव नहीं और दूसरा किशोर कुमार की अपनी कोई आवाज़ नहीं थी वह कुन्दनलाल सहगल की नक़ल करते थे I उस दौर के  प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक ने यह तक कह दिया कि तुम खंडवा वापिस चले जाओ तुम्हारे बस का गायन और अभिनय नहीं है I उस समय के प्रसिद्ध संगीतकार सचिनदेव बर्मन ने किशोर कुमार की आवाज़ सुनी और काफी प्रभावित हुए I सचिनदेव बर्मन ने किशोर कुमार को कुन्दनलाल सहगल की नक़ल करने की बजाय खुद की ओरिजिनल आवाज़ में गाने का सुझाव दिया और फिर किशोर कुमार ने अपनी स्वाभाविक आवाज़ में गाना शुरू किया I 1964 में आयी फिल्म 'दूर गगन की छाँव में ' का एक गीत ' आ चल के तुझे मैं लेके चलु एक ऐसे गगन के तलें' ज़बरदस्त हिट हुआ I फिर एक के बाद एक लगातार हिट  गानों ने किशोर कुमार को शिखर पे पहुंचा दिया, जहाँ वह मरते दम तक अडिग रहे I 1964 से लेकर 1987 का दौर किशोर कुमार के नाम रहा इस दौरान उनके गाने लोगो के सर चढ़ कर बोले I
फ़िल्मी करियर ( एक गायक के रूप में )- किशोर कुमार ने उस दौर के लगभग सभी प्रमुख अभिनेताओं संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, देव आनंद, विनोद खन्ना, शशि कपूर,धर्मेंद्र, जीतेन्द्र, मिथुन चक्रवर्ती, ऋषि कपूर, विनोद महरा, रजनीकांत, अनिल कपूर, संजय दत्त, सनी देओल, राकेश रोशन, दिलीप कुमार, शम्मी कपूर, के लिए अपनी आवाज़ दी I भारतीय सिनेमा के दोनों सुपरस्टार्स को तो किशोर के आवाज़ से ही पहचान मिली और उन्हें इस मुकाम तक पहुंचने में किशोर का बहुत बड़ा हाथ था I शास्त्रीय संगीत की कोई जानकारी न होने के बावजूद किशोर कुमार ने हर तरह के गाने गाये I किशोर कुमार की शैली बड़ी अनोखी थी वह जब भी किसी अभिनेता के लिए गाना गाते थे, लोगो को लगता उस अभिनेता की खुद की आवाज़ है I हर एक गाने को गाने का उनका अपना अलग स्टाइल था, जो शायद ही किसी  और गायक में देखने को मिली हो I किशोर कुमार ने उस दौर के सभी प्रमुख संगीतकारों सलिल चौधरी, खेमप्रकाश, हेमंत कुमार, सचिन देव बर्मन के साथ काम किया, लेकिन राहुलदेव बर्मन के साथ उनकी जोड़ी सबसे ज्यादा हिट रही I अपने 30 सालो के करियर में हिंदी, बंगाली, पंजाबी सहित 10 से ज्यादा भाषाओ के 1,200 से ज्यादा फिल्मो में करीब 2,700 से ज्यादा गाने गाये जो, अपने आप में उनकी महानता को बताता है I
फ़िल्मी करियर (एक अभिनेता के रूप में )-
किशोर कुमार ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत एक अभिनेता   के तौर पर ही की थी I 1946 से लेकर 1987 तक तक़रीबन 90 फिल्मो में किशोर कुमार ने अभिनय किया और एक अमिट छाप छोड़ा I मि. एक्स इन बॉम्बे, पड़ोसन, चलती का नाम गाड़ी, दिल्ली का ठग, झुमरू, जालसाज़ जैसे फिल्मो से उन्होंने अभिनय का लोहा मनवाया I
फ़िल्मी करियर (एक निर्माता- निर्देशक, गीतकार और संगीतकार के रूप में )- किशोर कुमार बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे I गायन और अभिनय के अलावा काफी सफल फिल्मो का निर्देशन भी किया और कुछ फिल्मो में  गीतकार और संगीतकार के तौर पे अपनी पहचान बनाई I ' चलती का नाम  गाड़ी', 'झुमरू' जैसे फिल्मो का निर्देशन कर किशोर कुमार ने निर्देशन में अपनी अलग पहचान बनाई I
वैवाहिक जीवन-
किशोर कुमार का फ़िल्मी करियर जितना ही शानदार रहा उनकी व्यक्तिगत जिंदगी उतनी ही उतार-चढाव वाली रही I किशोर कुमार ने चार शादियां की लेकिन एक भी सफल नहीं रही किशोर कुमार की शादी 1950 में बंगाली अभिनेत्री रुमा घोष से हुई थी, जो सिर्फ 8 सालो तक चली I किशोर कुमार ने दूसरी शादी 1960 में हिंदी फिल्मो की मशहूर अभिनेत्री मधुबाला से की, जो मधुबाला के मृत्यु के साथ ही ख़तम हो गई I 1976 में किशोर कुमार ने तीसरी शादी योगिता बाली से की जो सिर्फ दो साल चली I 1980 में किशोर कुमार ने चौथी शादी लीना चन्द्रावरकर से की I किशोर कुमार के दो बेटे है पहली पत्नी रुमा घोष से अमित कुमार जो बाद में मशहूर गायक बने और लीना चंद्रावरकर से सुजीत कुमार I
मृत्यु-
किशोर कुमार की जब मृत्यु हुई (13 अक्टूबर,1987 ) उस समय वह अपने करियर के उचाईयों पर थे और एक फिल्म का निर्देशन भी कर रहे थे I अपने अंतिम दिनों में लता मंगेशकर को दिए एक इंटरव्यू के दौरान किशोर कुमार ने कहा था कि उनकी इच्छा है अब जबकि वह अपनी करियर की उचाईयों पर है तो मुंबई हमेशा के लिए छोड़ दे और वापिस खंडवा चले जाये, इस फ़िल्मी नगरी से दूर लेकिन उनकी यह इच्छा  नहीं हो सकी I
किशोर कुमार के बारे में कुछ अनसुने तथ्य- 
  • बहुत कम लोग जानते है कि आवाज़ का यह जादूगर बचपन में तोतला था उनके बड़े भाई अशोक कुमार ने बताया था कि एक बार किशोर कुमार के पैर की एक ऊँगली कट गई जिसके कारण किशोर कुमार रोते रहते थे जिससे उनकी आवाज़ साफ़ हो गई I
  • किशोर कुमार ने राजेश खन्ना के लिए 92 फिल्मो में करीब 250 से ज्यादा गाने गाये जो अपने आप में एक रिकॉर्ड  है I
  • किशोर कुमार को 8 बार फिल्म फेयर अवार्ड मिला जो अब तक का रिकॉर्ड है I
  • किशोर कुमार 21 बार फिल्म फेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया जो अब तक का रिकॉर्ड है I
  • भारतीय सिनेमा के इतिहास में किशोर कुमार एकमात्र गायक थे, जिन्होंने संगीत की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी, बावजूद इसके किशोर कुमार ने हर तरह के गीत गाये I  
  • अभिनेता आते-जाते रहे लेकिन किशोर कुमार लगातार 25 सालो तक फिल्म इंडस्ट्री पे छाये रहे I जिस समय किशोर कुमार की मृत्यु हुई, वह अपनी करियर की उचाईयो पर थे I
  • 1975 में देश में आपातकाल के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने किशोर कुमार से अपनी पार्टी के लिए कुछ गीत गाने को बोला जिसे किशोर कुमार ने मना कर दिया I जिसके कारण आल इंडिया रेडियो पर उनके गाने को प्रतिबंधित कर दिया गया था I
  • इतनी शोहरत के बावजूद किशोर कुमार का अंतिम समय काफी अकेलेपन में बीता पत्रकार प्रीतीश नंदी को 1985 में दिए इंटरव्यू के दौरान किशोर कुमार ने कहा था कि करियर के उचाईयों पर होने के बावजूद आज मैं अकेला हु और सिर्फ यह फूल ही है जो मेरे सच्चे साथी है I
  • किशोर कुमार मुंबई की भागदौड़ से परेशान हो चुके थे लता मंगेशकर को दिए इंटरव्यू के दौरान किशोर कुमार ने खंडवा वापिस जाने की इच्छा ज़ाहिर की थी I
  •  किशोर कुमार कहा करते थे फिल्म इंडस्ट्री के लोग दोहरे चरित्र वाले है और खंडवा के लोगो जैसे नहीं है I
  • लता मंगेशकर ने अपने जीवन में एकमात्र इंटरव्यू किशोर कुमार का ही लिया था I
  • अभिनेता आते-जाते रहे लेकिन किशोर कुमार लगातार 25 सालो तक फिल्म इंडस्ट्री पे छाये रहे I
  • किशोर कुमार की होम प्रोडक्शन फिल्म ' चलती का नाम गाड़ी ' काफी सफल रही और इस फिल्म में किशोर कुमार के साथ उनके दोनों भाइयो अनूप कुमार और अशोक कुमार ने भी किया I
  • किशोर कुमार की होम प्रोडक्शन फिल्म ' चलती का नाम गाड़ी ' की शूटिंग के दौरान ही किशोर कुमार और मधुबाला नजदीक आये और बाद में शादी की I
  • किशोर कुमार सिद्धांतवादी इंसान थे जो किया अपनी शर्तो पे किया I 
सम्मान और  पुरष्कार- वैसे तो कुछ शख्शियत ऐसे होते है जो हर सम्मान और पुरष्कार से ऊपर होते है, किशोर कुमार भी उन्ही में से थे I फिर भी उनको दिए गए सम्मानों की अगर बात करे तो-

  • फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड 1970 ( रूप तेरा मस्ताना ) फिल्म- आराधना
  • फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड 1971  ( दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा  ) फिल्म- अमानुष 
  • फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड 1979  ( खाइके पान बनारस वाला ) फिल्म- डॉन 
  • फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड 1981  ( हज़ार रहे मुड़के देखे ) फिल्म- थोड़ी सी बेवफाई 
  • फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड 1983  ( पग घुंघरू बांध ) फिल्म- नमक हलाल 
  • फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड 1984  ( अगर तुम न होते  ) फिल्म- अगर तुम न होते 
  •  फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड 1985  (मंज़िले अपनी जगह ) फिल्म- शराबी 
  • फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड 1986  ( सागर किनारे ) फिल्म- सागर 
  • 1971 में फिल्म आराधना के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवार्ड 
  • 1972  में फिल्म अंदाज़ के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवार्ड 
  • 1974  में फिल्म हरे रमा हरे कृष्णा के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवार्ड
  • 1975  में फिल्म कोरा कागज़ के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवार्ड 
  • इसके अलावा मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उनके सम्मान में हर साल किशोर कुमार अवार्ड दिया जाता है I 
  • अनुराग बासु द्वारा उनकी बायोपिक बनाई जा रही है जिसमे मुख्य भूमिका रणबीर कपूर की होगी  I

1 comment:

  1. ज़िन्दगी एक सफर है सुहाना यहाँ कल क्या हो किसने जाना ........वाह सच में ऐसा गायक कोई दूसरा पैदा हो I

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