Thursday, March 28, 2019

जयप्रकाश नारायण- भारतीय राजनीति के किंग मेकर

भारतीय राजनीति में  कुछ नेता ऐसे हुए जिन्होंने सत्ता के शिखर को छुआ और कुछ ऐसे जिन्होंने उन्हें सत्ता के शिखर तक पहुंचाया I जयप्रकाश नारायण का भी नाम उन नेताओ में आता है, जिन्होंने किंग मेकर बनकर मोरार जी देसाई के नेतृत्व 1977 में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई I जयप्रकाश नारायण को भारतीय राजनीति में त्याग और समर्पण के लिए याद किया जाता है I जयप्रकाश नारायण का नाम लेते ही एक ऐसे मज़बूत व्यक्तित्व का चेहरा उभर के सामने आता है, जिसने अपनी जिद्द से कांग्रेस के अभेद माने जाने वाले सिंहासन को जड़ से हिला दिया और सत्ता से कांग्रेस को उखाड़ फेंका I
जन्म- जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर, 1902 बिहार के सारण जिले में ( अब यह जगह उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का हिस्सा ) में एक कायस्थ परिवार में हुआ था I जयप्रकाश के पिता हरसू दयाल सरकारी मुलाज़िम और माता फूल रानी देवी गृहणी थी I जयप्रकाश नारायण की प्रारंभिक शिक्षा गांव से ही हुई और माध्यमिक शिक्षा और स्कूलिंग पटना से I सिर्फ 18 साल की उम्र में जयप्रकाश नारायण की शादी प्रभावती देवी से हुई I प्रभावती देवी शादी के समय सिर्फ 14 साल की थी, जिन्होंने आज़ादी के लिए चलाये गए आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया I आज़ादी के आंदोलन के दौरान उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया और भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद द्वारा स्थापित बिहार विद्यापीठ में दाखिला ले लिया I जयप्रकाश नारायण ने  ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकने के लिए शुरू किये गए सविनय अवज्ञा आंदोलन, असहयोग आंदोलन और भारत छोडो आंदोलन में भाग लिया और कई बार गए जेल गए I
उच्च शिक्षा- बिहार विद्यापीठ में पढाई के दौरान ही जयप्रकाश नारायण ने उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाने का निर्णय लिया I साल 1922 में जयप्रकाश नारायण अमेरिका के कलिफोर्निआ पहुंचे और 1923 में बर्कले (बर्कले)  में दाखिला लिया I इस दौरान अपनी कॉलेज की फीस भरने के लिए जयप्रकाश नारायण ने कसाईखाना और कारखाना में मज़दूर की तरह काम किया I लेकिन फिर भी फीस न भर पाने की वजह से जयप्रकाश नारायण को बर्कले (बर्कले) छोड़ना पड़ा और लोवा विश्विद्यालय में दाखिला लेने के लिए मज़बूर होना पड़ा I  जयप्रकाश नारायण की ज़िन्दगी का ये वो दौर था, जब उन्होंने मज़दूरों के साथ काम किया और उनकी समस्याओं को काफी करीब से देखा और महसूस किया I
रूसी क्रांति का प्रभाव (Influenced by Russian revolution) - अमेरिका में पढाई के दौरान उन्होंने 1917 में हुए रूसी क्रांति के बारे में सुना I समाजशास्त्र में गहन रूचि के कारण जयप्रकाश नारायण ने रुसी क्रांति के कारण ,सफलता और प्रभाव का गहन अध्ययन किया और रुसी क्रांति में बड़ी भूमिका अदा करने वाले कार्ल मार्क्स की किताब 'दास कैपिटल' पढ़ा I 'दास कैपिटल' का जयप्रकाश नारायण के ऊपर काफी बड़ा प्रभाव पड़ा I इसी दौरान जयप्रकाश नारायण वामपंथी विचारधारा से ताल्लुक रखने वाले एम. एन. रॉय के संपर्क में आये I जयप्रकाश नारायण ने समाजवाद के ऊपर कई लेख और शोधपत्र प्रकाशित किया जिनमे 'सोशल वारिएशन(Social Variation)' को साल का सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र घोषित किया गया I
आज़ादी के आंदोलन में उनकी भूमिका- 1929 में भारत लौटने के बाद जयप्रकाश नारायण ने कांग्रेस ज्वाइन कर लिया और आज़ादी की लड़ाई में सक्रिय रूप से कूद पड़े I भारत छोडो आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग लेने के लिए उन्हें कई बार जेल भेजा गया I इस दौरान उनकी मुलाकात राममनोहर लोहिया, बसावन सिन्हा, अशोक मेहता जैसे नेताओ से हुई जो आगे के आंदोलन में उनके साथ खड़े हुए I आज़ादी की लड़ाई के दौरान जयप्रकाश नारायण कांग्रेस के अलावा अन्य कई संगठनो से जुड़े और  नेतृत्व किया I 1947 में आज़ादी के बाद जयप्रकाश नारायण रेलवे मज़दूरों के सबसे बड़े संगठन 'आल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन (All India Railways Mens Fe)' के अध्यक्ष बने और 1953 तक इस पद पर बने रहे I
नव -निर्माण आंदोलन- गुजरात में आर्थिक मंदी, बेतहासा बढ़ती कीमतें और भ्रस्टाचार के विरोध में गुजरात के मध्यम वर्ग ने विद्रोह शुरू किया जिसे 'नव -निर्माण आंदोलन' के नाम से जाना गया I नव -निर्माण आंदोलन की शुरुआत 1973 में हुई जब अहमदाबाद इंजीनियरिंग कॉलेज और गुजरात विश्वविद्यालय के छात्रों ने फीस बढ़ोतरी के विरोध में हड़ताल कर दिया I गुजरात के छात्रों ने आंदोलन को व्यापक रूप देने के उद्देस्य से जयप्रकाश नारायण को इस आंदोलन के नेतृत्व के लिए आमंत्रित किया I जयप्रकाश नारायण ने आमंत्रण स्वीकार कर लिया और छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया I इसी दौरान गुजरात में साल 1973 में चिमनभाई पटेल मुख्यमंत्री बने, लेकिन उनके भ्रष्टाचार में लिप्त होने और कुछ गलत निर्णयों की वजह से राज्य में मंहगाई बढ़ने लगी I जिसकी वजह से मध्यम वर्ग आक्रोश में था I जयप्रकाश नारायण ने मध्यम वर्ग को भी छात्र आंदोलन से जुड़ने का आह्वान किया I जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर गुजरात के मध्यम वर्ग इस आंदोलन से जुड़ गए I मध्यम वर्ग के इस आंदोलन से जुड़ने के साथ ही इस आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया और सरकार को झुकना पड़ा I गुजरात के मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा और विधान सभा भंग कर दी गई I
बिहार आंदोलन- 1974 में बिहार में तेजी से बढ़ती बेरोज़गारी, मंहगाई और भ्रस्टाचार के विरोध में आंदोलन शुरू किया I जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में सरकार के खिलाफ शुरू किये गए इस शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान बलप्रयोग और पुलिस द्वारा लाठीचार्ज के कारण काफी लोग मारे गए I जिसके बाद इस आंदोलन ने पहले राज्यव्यापी और फिर देशव्यापी आंदोलन का रूप ले लिया I बिहार में इस आंदोलन से सत्येंद्र नारायण सिन्हा, दिग्विजय नारायण सिंह जैसे और भी नेता जुड़ गए और सरकार को बर्खास्त करने की मांग करने लगे I इसी बिहार आंदोलन ने बाद में भारत में आज़ादी के बाद के सबसे बड़े आंदोलन का रूप ले लिया, जिसे 'समग्र आंदोलन' के नाम से जाना जाता है I
समग्र आंदोलन- जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में पहले नव-निर्माण आंदोलन, गुजरात फिर बिहार आंदोलन ने सरकार की नींव को हिला कर रख दिया था I सरकार ने जितना ही बिहार आंदोलन को दबाने का प्रयास किया यह उग्र होता ही गया I जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में यह आंदोलन पुरे देश में फ़ैल गया I तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने इस आंदोलन को कुचलने के लिए बलप्रयोग करना शुरू कर दिया, जिससे यह आंदोलन और उग्र होता गया I जयप्रकाश नारायण ने पुरे देश के छात्रों से कांग्रेस सरकार के तानाशाही रवैये के खिलाफ एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया I इस आह्वान का व्यापक असर दिखा और पुरे देश से छात्रों ने इस आंदोलन में सक्रिय रूप से भागीदारी दिखाई I छात्रों के जुड़ने के बाद आंदोलन और भी उग्र हो गया पुरे देश में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन होने लगा और सरकार को बर्खास्त करने की मांग उठने लगी I
आपातकाल- साल 1975 मे इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 1971 के आम चुनावों में प्रधानमंत्री इंंदिरा गांधी द्वारा सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का दोषी ठहराया गया और रायबरेली से उनके निर्वाचन को रद्द कर दिया और 6 साल तक किसी भी तरह के चुनाव के लिए प्रतिबंधित कर दिया। अदालत मे यह केस 1971 के आम चुनाव में रायबरेली लोक सभा सीट से इंंदिरा गाँधी के खिलाफ विपक्ष के उम्मीदवार राजनारायण ने दायर की थी। आजाद भारत में इस तरह का यह पहला मामला था और इस साहसिक निर्णय के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जगमोहन लाल सिन्हा को विपक्ष समेत पूरे भारत ने सैल्ययू किया । एक तरफ समग्र आंदोलन और दूसरे तरफ अदालत के फैसले के कारण इंदिरा गाँधी को अपनी सत्ता हाथ से जाती दिखी । अपने को बचााने के लिए इंंदिरा गांधी ने भारत के इतिहास में पहली बार संविधान की धारा 352 के तहत 'आंतरिक आपातकाल' घोषित कर दिया गया I इस तिथि को भारत के इतिहास में 'काला दिन' माना जाता है I आपातकाल के बाद सभी तरह के चुनावो पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया, नागरिको के मुलभुत अधिकार छीन लिए गए, मीडिया पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया, हर एक संस्था और व्यक्ति जो सरकार के खिलाफ बोलता उसे जेल में डाल दिया जाता I अधिकारों का केन्द्रीयकरण कर दिया गया मतलब राज्य सरकार के अधिकार अब  हस्तांतरित हो गया I एक तरफ जहाँ इंदिरा गाँधी हर तरीके से आंदोलन को कुचलने पर लगी हुई थी, दूसरी तरफ जयप्रकाश नारायण झुकने को तैयार नहीं थे I उन्होंने इंदिरा गाँधी सरकार खिलाफ के आंदोलन और तेज कर दिया I जयप्रकाश नारायण ने 'इंदिरा हटाओ देश बचाऒ का नारा दिया, जयप्रकाश नारायण को गिरफ्तार कर लिया I गया इसके बाद अटल बिहारी बाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नाडिस जैसे नेताओ ने आंदोलन की कमान संभाली, इस सभी नेताओ को भी गिरफ्तार कर लिया गया I धीरे- धीरे करके सभी विपक्षी नेताओ को कारागार में डाल दिया गया I I लेकिन यह आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा था I 21 महीने तक चले इस आंदोलन के दौरान लाखो लोगो को गिरफ्तार कर लिया गया I यह 21 महीने आज़ादी के बाद के सबसे बुरे महीने साबित हुए I
सत्ता  परिवर्तन- आपातकाल लगाने के बाद भी आंदोलन थमा नहीं और अन्तत इंदिरा गाँधी को जयप्रकाश नारायण के आगे झुकना पड़ा I 21 महीने के बाद 21 मार्च,1977 को आपातकाल हटा दिया गया और जयप्रकाश नारायण सहित सभी नेताओ को रिहा कर दिया गया I जयप्रकाश नारायण की मांग पर देश में आम चुनाव की  घोषणा की गई I जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गाँधी को सत्ता से उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया I लेकिन यह अविश्वसनीय प्रतीत हो रहा था, क्योकि भारत में गैर कांग्रेसी सरकार की कल्पना भी करना हास्यास्पद लग रहा था I लेकिन जयप्रकाश नारायण कमर कस चुके थे जयप्रकाश नारायण ने सभी विपक्षी दलों को एक झंडे के नीचे लाने का आह्वान किया I जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर वामपंथी पार्टियों को छोड़ सभी प्रमुख विपक्षी दल जनता पार्टी के बैनर के नीचे आ गए I 1977 में हुए आम चुनाव में अविश्वसनीय तरीके से कांग्रेस की हार हुई और जनता पार्टी पूर्ण बहुमत से जीत कर आयी I यहाँ तक की  इंदिरा गाँधी  और उनके बेटे संजय गाँधी खुद चुनाव हार गए I पुरे देश से एकमत में आवाज़ उठी कि इस अविश्वसनीय और अविश्मरणीय जीत के नायक रहे जयप्रकाश नारायण को प्रधानमंत्री बनाया जाये I लेकिन जयप्रकाश नारायण ने बड़ी विनम्रता से यह कहते हुए कोई भी पद लेने से इंकार कर दिया कि मेरा आंदोलन इस तानाशाही सरकार को हटाने के लिए था, मेरा उद्देस्य पूरा हुआ देश को लोकतान्त्रिक सरकार मिली मुझे सत्ता में कोई दिलचस्पी नहीं है I भारतीय राजनीति में त्याग और समर्पण का शायद ही इस तरह का दूसरा कोई मिसाल हो I यहाँ तक की नई सरकार के गठन और निर्णयों में भी कभी हस्तक्षेप नहीं किया I
मृत्यु- सामान्य जिंदगी व्यतीत करते हुए 8 अक्टूबर, 1979 को पटना में 77 साल की उम्र में जयप्रकाश नारायण का देहावसान गया I
सम्मान और अवार्ड- 
  1. 1965 में उन्हें लोक सेवा के लिए 'रमन मेग्सेसे ' अवार्ड से सम्मानित किया गया जिसे एशिया का नोबेल पुरष्कार माना जाता है I
  2. 1999 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया I
  3. लोगो के बीच लोकप्रिय होने और उनके लिए संघर्षरत होने के कारण उन्हें 'लोकनायक' की उपाधि दी गई है I
  4. जयप्रकाश नारायण को ' जेपी' के नाम से जानते है I
  5. प्रकाश झा द्वारा उनकी जिंदगी पर 'लोकनायक' फिल्म बनाई गई I
  6. उनकी जिंदगी पर आधारित सौ से ज्यादा किताबे प्रकाशित की जा चुकी है I
  7. पटना एयरपोर्ट का नामकरण उनके नाम से किया गया है I
  8. कई योजनाओ, ट्रेनों और सरकारी संस्थाओ का नामकरण उनके नाम पर किया गया है I


1 comment:

  1. aaj ke netao ko sikhna chahiye jaiprakash narayan ji ke tyag aur mulya se. Aaj ke neta to satta ke liye kisi bhi had tak jane ko taiyar hai.

    ReplyDelete