Friday, March 8, 2019

जब रतन टाटा ने अपमान का बदला सफलता से लिया

"मैं सही निर्णय लेने में विश्वास नहीं करता, बल्कि निर्णय लेके उसको सही साबित करने में विश्वास करता हु ". - रतन टाटा

भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़े व्यावसायिक समूह टाटा समूह के प्रमुख रतन टाटा का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं I रतन टाटा की पहचान न सिर्फ एक वैश्विक बिज़नेस लीडर की है, बल्कि उन्हें मूल्य आधारित व्यवसाय और व्यवसाय के सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है I आज के युवाओ के रोल मॉडल रतन टाटा अपनी मज़बूत इच्छाशक्ति और उदार छवि के लिए जाने जाते है बहुत से ऐसे निर्णय है, जिनसे रतन टाटा ने साबित कर दिया कि अगर ज़िद हो तो कुछ भी असंभव नहीं I आज एक ऐसे ही निर्णय के बारे में बात करते है जिनसे रतन टाटा ने साबित कर दिया, क्यों वह एक मज़बूत कॉर्पोरेट लीडर है I
                                            भारत में  व्यावसायिक और भारी वाहनों की सबसे बड़ी निर्माता और विक्रेता टाटा मोटर्स अपने गुणवत्ता और सेवाओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है I ना सिर्फ भारत बल्कि दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ट्रक और बस निर्माता कंपनी है I यह बात 1998 की है, जब टाटा समूह के प्रमुख रतन टाटा ने छोटी कारों के भी उत्पादन का निर्णय लिया I रतन टाटा के निर्णय को व्यावहारिक रूप देने के लिए टाटा मोटर्स ने पुरे योजनाबद्ध तरीके से काम करना शुरू किया और आखिरकार टाटा मोटर्स की पहली छोटी कार टाटा इंडिका लॉच हुई I लेकिन कुछ तकनीकी खामियों की वजह से यह कार बाजार में अपनी खास पहचान नहीं बना पाई I इसके वजह से कंपनी को काफी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा I रतन टाटा ने टाटा मोटर्स को बचाने के लिए सवारी गाड़ी वाले सेगमेंट को बेचने का निर्णय लिया I
                                           इसी सिलसिले में उस समय की दुनिया की सबसे बड़ी सवारी गाड़ी निर्माता कंपनी फोर्ड मोटर्स के अधिकारियो से मिलने अमेरिका के कलिफोर्निआ पहुंचे I कंपनी के तत्कालीन प्रमुख बिल फोर्ड के नेतृत्व में चले 3 घंटे की मीटिंग के दौरान रतन टाटा को काफी अपमानित किया गया I यहाँ तक की फोर्ड की तरफ से  बोला गया कि जब आपको छोटी कारों का कोई अनुभव नहीं तो शुरुआत ही क्यों किया I हम आपकी कंपनी खरीद कर आपके ऊपर एहसान कर रहे है I यह बात सुनते ही रतन टाटा मीटिंग छोड़ कर बाहर आ गए I भारत वापिस आते ही रतन टाटा ने ठान लिया, इस अपमान का बदला टाटा मोटर्स को उचाईयो पे पहुंचा कर लेंगे I
                                           रतन टाटा ने कंपनी को बेचने के अपने विचार को त्याग दिया, जिसका कंपनी के संचालक मंडल ने काफी विरोध किया I लेकिन यह टाटा का व्यक्तित्व था वह टस से मस नहीं हुए I रतन टाटा ने अपनी पहली कार इंडिका के असफल होने के कारणों का गहन अध्यन किया I उसकी तकनीकी खामियों को दूर कर नया और एडवांस्ड मॉडल इंडिका V2 लॉच किया I इस कार को कार विशेषज्ञों ने काफी सराहा और इस कार ने बाजार में अपनी महत्वपूर्ण छाप छोड़ी और टाटा मोटर्स को नुकसान से उबार कर फायदे में लेके आयी I फिर टाटा मोटर्स ने पीछे मुड़के नहीं देखा I कंपनी ने कई नए मॉडल लांच किये और कंपनी का फायदा लगातार बढ़ता गया I 2008 तक टाटा मोटर्स छोटी कार के बाजार में अपना मज़बूत पकड़ बना चुकी थी I
                                         उधर फोर्ड मोटर्स का बाजार शेयर लगातार गिर रहा था और वह लगातार नुकसान झेल रही थी I नुकसान से बाहर निकलने के लिए फोर्ड मोटर्स ने अपने दो बड़े लक्ज़री कारों लैंड रोवर और जैगुआर को बेचने का निर्णय लिया I समय बदला, इस बार बिल फोर्ड मुंबई आये टाटा मोटर्स के साथ डील के सिलसिले में I यह काफी बड़ा और जोखिम भरा सौदा था लेकिन रतन टाटा ने तुरंत हा कर दी इस सौदे के लिए I बिल फोर्ड ने मीटिंग में रतन टाटा का आभार जताते हुए उनकी सराहना की और कहा कि यह दोनों कम्पनीज को खरीदकर आपने बहुत बड़ा एहसान किया हमारे ऊपर I सौदे के बाद बिल फोर्ड ने प्रेस कांफ्रेंस कर अपने व्यव्हार के लिए खेद जताया और पूरी घटना का जिक्र किया I
                                       जैगुआर और लैंड रोवर को खरीदने के बाद अपनी दूरदर्शिता और निर्णय क्षमता से रतन टाटा ने इन दोनों नुकसान उठाने वाली कम्पनीज को फायदे में पंहुचा दिया I आज इन दोनों ही कारों को दुनिया के बड़े लक्सरी कारों में गिना जाता है I यह रतन टाटा का व्यक्तित्व था, जिसने इस पुरे निर्णय को लेकर साबित कर दिया कि अपमान का बदला अपमान नहीं, बल्कि सफलता से भी लिया  जा सकता है I
                                          

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