Saturday, April 6, 2019

सुख क्या है ?

सुख क्या है ? यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका जवाब मैं बचपन से ढूंढ रहा I लेकिन अब तक इसका सही जवाब नहीं मिला I इस प्रश्न के जवाब की उत्सुकता इसलिए भी हुई, क्योकि मैं बचपन से देख रहा हर इंसान सिर्फ ख़ुशी की ही कामना करता है I लेकिन अब तक कोई ऐसा इंसान नहीं मिला, जो पूरी तरह से प्रसन्न हो और जिसके जीवन में दुःख न हो I अपने स्कूल के दिनों में मैंने एक कहानी पढ़ी थी, जिसके बाद काफी हद तक मुझे समझ में आ गया, ख़ुशी क्या है ?
                        यह कहानी एक बड़े राज्य के राजा की थी जो मदिरा और सुंदरियों में खोया  रहता था, राजा स्वस्थ  सुंदर था, खाने - पीने और अन्य सुख सुविधा की कोई कमी ना थी I कहने की बात यह है कि उस राजा के पास वह सब कुछ था जो एक विलासी जीवन जीने के लिए चाहिए होता है I एक दिन की बात है राजा को अचानक से लगा कि लोग अक्सर बीमार पड़ते रहते है, लेकिन वह आज तक कभी बीमार नहीं पड़ा I इसका मतलब मुझे गंभीर बीमारी है,  जिसकी वज़ह से मैं बीमार नहीं पड़ता I अब राजा के दिमाग में यह बात बैठ गई कि उसे कोई बीमारी ना होना, इस बात का संकेत है कि वह गंभीर बीमारी से पीड़ित है I इस बात को लेके राजा उदास और दुखी रहने लगा I राजा ने अपने सेनापति को बुलाया और आदेश दिया कि राजा के इलाज के लिए इस राज्य के सबसे अच्छे डॉक्टरो को बुलाया जाये I जो भी डॉक्टर राजा का इलाज कर देगा उसे काफी बड़ा इनाम दिया जायेगा, लेकिन अगर कोई डॉक्टर बीमारी की पहचान कर इलाज नहीं कर पाया तो उसका सिर कलम कर दिया जायेगा I राजा के आदेशानुसार राज्य के अच्छे डॉक्टरों को एक-एक कर बुलाया गया और सबका कहना था कि राजा पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे कोई बीमारी नहीं है I लेकिन राजा तो बीमारी के बारे में सुनना चाहता था और इसलिए उसने डॉक्टरों का सिर कलम करने का आदेश दिया I इस तरीके से एक-एक कर राज्य के सभी डॉक्टरों को बुलाया गया और सबका सिर कलम कर दिया गया I क्योकि सबका एक ही जवाब था राजा बीमार नहीं है I
                             अंत में पुरे राज्य में सिर्फ दो युवा डॉक्टर रह गए, जिन्होंने अभी- अभी कॉलेज की पढाई ख़तम की थी I दोनों ही कॉलेज में साथ- साथ पढ़े थे और हॉस्टल में भी साथ ही रहते थे I दोनों ही डॉक्टर पढ़ने में काफी अव्वल थे, लेकिन दोनों वैचारिक रूप से एक दूसरे से भिन्न थे I पहला डॉक्टर जो काफी मोटा था किताबी ज्ञान को व्याव्हारिक ज्ञान से ज्यादा प्राथमिकता देता था, उसका मानना था एक अच्छा डॉक्टर बनने के लिए किताबी ज्ञान का होना जरुरी है नाकि व्याव्हारिक ज्ञान का I जबकि दूसरा डॉक्टर जो काफी दुबला-पतला था हमेशा व्यावहारिक ज्ञान को प्राथमिकता देता था I राजा के इलाज के लिए इन दोनों डॉक्टरों को बुलाया गया I सबसे पहले मोटे डॉक्टर जो किताबी ज्ञान में विश्वास रखता था, को बुलाया गया I डॉक्टर ने राजा का चेक-अप किया, किताबी ज्ञान के हिसाब से राजा को कोई बीमारी नहीं थी I इसलिए डॉक्टर ने बोला राजा बीमार नहीं है, यह सुनते ही राजा आग बबूला हो गया और उसके आदेश पर डॉक्टर का सिर कलम कर दिया गया I अब दूसरे डॉक्टर को बुलाया गया दूसरे डॉक्टर को समझ में आ गया कि राजा बेवकूफ और मानसिक रूप से बीमार है, सच बोलना मतलब अपना सिर कलम कराना है I डॉक्टर ने राजा का चेक-अप किया और बोला राजा गंभीर रूप से बीमार है I राजा यह सुन काफी खुश हुआ क्योकि वह यही सुनना चाहता था राजा ने डॉक्टर को काफी सोने- चांदी दिए I
                           अब राजा ने बीमारी के इलाज के लिए पूछा , डॉक्टर ने कहा कि इलाज काफी आसान है बस एक दिन के लिए किसी सुखी इंसान का कमीज़ आप पहन ले बीमारी बिलकुल ठीक हो जाएगी I राजा ने अपने सैनिको को किसी सुखी इंसान का कमीज़ एक दिन के लिए लाने का आदेश दिया I सैनिको को भी लगा यह तो बड़ा आसान काम है, अब सैनिक निकल पड़े राज्य के भ्रमण के लिए ताकि कोई सुखी इंसान मिल जाये I सबसे पहले सैनिक सेठ- साहूकारों के पास पहुंचे और उनसे पूछा कि आप सुखी है लेकिन सबने कहा कि वह सुखी नहीं है I इस तरह सैनिको ने पूरा राज्य भ्रमण कर लिया लेकिन कोई सुखी इंसान नहीं मिला I अन्तत सैनिक निराश होकर वापिस लौट रहे थे, तभी उनकी नज़र एक बूढ़े किसान पर पड़ी जो जून की तेज दोपहर में खेत में हल चला रहा था  I एक सैनिक ने कहा कि इस पुरे राज्य में यह किसान ही एकमात्र बच गया है जिससे हमने पूछा नहीं I लेकिन बाकि सैनिको ने कहा कि इस राज्य के सेठ-साहूकार सुखी नहीं है तो यह बूढ़ा किसान कैसे सुखी हो सकता है I फिर भी सैनिको ने सोचा पूछने में क्या जाता है सैनिक किसान के पास गए और पूछा क्या तुम सुखी हो I किसान ने हँसते हुए जवाब दिया हां मैं बिलकुल सुखी ह,  मैं एक-एक कर अपने परिवार के सभी सदस्यों को भूख और बीमारी से खो चूका हु, इसलिए अब मेरे पास दुखी होने का कोई कारण नहीं है I सैनिको के ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा, सैनिको ने बूढ़े किसान से कहा तुम अपना कमीज़ एक दिन के लिए दे दो राजा के इलाज के लिए I इसके बदले तुम्हे ढेर सारा धन मिलेगा, किसान ने कहा कि मुझे अब धन-दौलत की जरुरत नहीं, लेकिन हां मैं राजा के लिए अपना कमीज़ दे देता, अगर मेरे पास होता I सैनिको ने वापिस आकर राजा को यह बात बताई I राजा को सारा मामला समझ में आ गया और अपनी बीमारी का इलाज भी मिल गया राजा ने डॉक्टर को काफी धन-दौलत के साथ विदा किया I
कहानी की सीख -
  1. सुखी होने के लिए धन-धान्य और भौतिक साधनो की जरुरत नहीं होती I
  2. सुख अपने अंदर ही निहित है इसे पाने के लिए कही और जाने की जरुरत नहीं I
  3. कॉलेज की परीक्षा को किताबी ज्ञान से पास किया जा सकता है, लेकिन ज़िन्दगी की परीक्षा के लिए व्यवहारिक ज्ञान की जरुरत होती है I
  4. मुर्ख और रूढ़िवादी इंसान वही सुनना चाहता है जिसकी धारणा उसने पहले से बना रखी है I ऐसे इंसान के सामने ज्ञान का प्रदर्शन और तर्क-वितर्क करना बेवकूफी है I

                           

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