Sunday, April 7, 2019

आचार्य रजनीश उर्फ़ ओशो

आप उनके विचारो से सहमत हो सकते है या असहमत लेकिन उनके लोकप्रियता और क्षमता को नहीं नकार सकते , जी हां हम बात कर रहे है चंद्रमोहन जैन उर्फ़ आचार्य रजनीश उर्फ़ ओशो की एक दार्शनिक और चिंतक जिन्हे उनके चाहनेवाले भगवान ओशो भी बुलाते है I ओशो को एक विद्रोही चिंतक भी कहा जाता है जिनका विवादों से गहरा नाता रहा I ओशो जब भी कुछ बोलते विवाद उठना लाजमी था, क्योकि ओशो की बाते सरकार, समाज और धर्म के खिलाफ होती थी I ओशो कितने विद्रोही थे इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि 21 देशो ने ओशो के प्रवेश को प्रतिबंधित कर रखा था I लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि ओशो ने पूरी दुनिया से चाहनेवाले को आकर्षित किया I
जन्म- ओशो का जन्म 11 दिसंबर, 1931 को मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के कुछवाडा में एक गरीब जैन परिवार में हुआ था I ओशो के पिता का नाम बाबूलाल जैन और माता का नाम सरस्वती जैन था I ओशो का बचपन अपने नाना-नानी के घर बीता, लेकिन ओशो जब 7 वर्ष के थे तो उनके नाना की मृत्यु हो गई I नाना की मृत्यु का ओशो के ऊपर काफी बड़ा प्रभाव पड़ा और इसके बाद ओशो अपने घर माता-पिता के पास आ गए I ओशो बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थ, जिसके अंदर सत्य को जानने की लालसा थी, लेकिन इसके साथ-साथ ओशो विद्रोही स्वभाव के भी थे I
शिक्षा- प्रारंभिक शिक्षा अपने ननिहाल और गांव से पूरा करने के बाद रजनीश उच्च शिक्षा के लिए जबलपुर चले गए I जबलपुर के हितकारिणी कॉलेज, डी. एन. कॉलेज और सागर विश्विद्यालय से दर्शनशास्त्र में स्नातक और परास्नातक की डिग्री ली I छात्र जीवन के दौरान दो राष्ट्रवादी संगठनो आज़ाद हिन्द फौज (Indian National Army) और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (Rastriya Swain Sewak Sangh) से जुड़े रहे I
ओशो एक वक्ता के रूप में- उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद ओशो ने जबलपुर के एक कॉलेज में दर्शनशास्त्र के प्रवक्ता के रूप में पढ़ाना शुरू किया I ओशो एक अच्छे वक्ता थे और इस कारण काफी कम समय में छात्रों के बीच लोकप्रिय हो गए I लेकिन उनकी शिक्षाए धर्म, सरकार , समाज के खिलाफ होने के कारण विवाद हो गया, जिसकी वजह से ओशो को कॉलेज से निकाल दिया गया I फिर ओशो ने जबलपुर विश्वविद्यालय में पढ़ाना शुरू किया, लेकिन वहां भी अपने विद्रोही व्याख्यानों के कारण ओशो को नौकरी से हटा दिया गया I यह 1955 के आसपास का दौर था और उस समय तक ओशो छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुके थे I अब ओशो ने पुरे भारत में घूमकर-घूमकर व्याख्यान देना शुरू किया और अपने को आचार्य रजनीश कहने लगे I रजनीश अब पुरे भारत में लोकप्रिय हो चुके थे लेकिन लोकप्रियता के साथ-साथ रजनीश के खिलाफ विद्रोह भी बढ़ता गया I रजनीश खुलकर गाँधी, सरकार, वामपंथ, धर्म और सामाजिक रूढ़िताओ के खिलाफ बोल रहे थे, जिसके कारण आचार्य रजनीश के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग उठने लगी I
ओशो सेक्स गुरु के रूप में - सेक्स एक ऐसा विषय है जिसके बारे में भारतीय दार्शनिक चुप रहते है I लेकिन ओशो ने सेक्स के बारे में न सिर्फ बोला बल्कि सेक्स को महत्वपूर्ण बताया I रजनीश के अनुसार सेक्स प्रेम का सार है और समाधि की अवस्था में जाने की प्राथमिक सीढ़ी I 1960 के दशक में रजनीश के सेक्स से सम्बंधित विचारो को संकलित कर किताब के रूप में प्रकाशित किया गया I जिसका नाम 'सम्भोग से समाधि तक़ (Sex to superconsciousness)'  रखा गया I यह किताब इंटरनेशनल बेस्ट सेलर थी जिसका 60 से ज्यादा भाषाओ में अनुवाद किया गया I इस किताब के प्रकाशन के बाद रजनीश को 'सेक्स गुरु' कहा गया I इस किताब के बाद एक तरफ जहा भारत सहित पश्चिमी देशो में रजनीश के चाहंने वालो की संख्या तेजी से बढ़ने लगी वही दूसरी तरफ रजनीश के खिलाफ विद्रोह भी बढ़ता गया I
ओशो मैडिटेशन रिसोर्ट- 1970 के दशक तक रजनीश भारत सहित पश्चिमी देशो में लोकप्रिय हो चुके थे I यही वह दौर था जब रजनीश ने पुणे में काफी बड़े एरिया में ओशो मैडिटेशन रिसोर्ट की स्थापना की और अपने को भगवान ओशो कहने लगे I यह मैडिटेशन रिसोर्ट ओशो के अनुवाईयो का मुख्य केंद्र बन गया I देश-विदेश से लाखो लोग इस मैडिटेशन रिसोर्ट में आने लगे, जिनमे ज्यादातर पश्चिमी देशो के युवक-युवतिया थी I इस रिसोर्ट में लोगो को हर काम की पूरी आज़ादी थी, कोई भी रोक -टोक नहीं था I ओशो के आलोचक इसे सेक्स मंडी भी कहने लगे I
ओशो का पश्चिम भ्रमण- 1981 में ओशो बीमार पड़ गए और उनके चाहने वालो ने अमेरिका जाकर इलाज करने की जिद्द की I ओशो 1981 में अमेरिका इलाज कराने गए और कुछ ही दिनों में ओशो स्वस्थ हो गए I उस समय अमेरिका में ओशो के चाहने वालो की तादाद लाखो में थी, जिनमे ज्यादातर अमीर थे I अमेरिका में उनके चाहने वालो ने ओशो से वही बसने की अपील की I इसके लिए बाकायदा अमेरिका के ओरेगाओ में 70 एकड़ भूमि खरीदी गई और रजनीशपुरम नाम का शहर बसाया गया I धीरे-धीरे यहाँ लाखो की तादाद में घर बन गए और यह सभी ओशो के अनुयायी थे I सिर्फ चार सालो में रजनीशपुरम को एक अच्छे शहर की तरह सुसज्जित कर दिया गया I यहाँ रजनीश एयरपोर्ट बनाया गया, ओशो के द्वारा कानून बनाये गए, और सामानांतर सरकार का गठन किया गया I अब यह अमेरिका सरकार के लिए सीधी चुनौती थी I ओशो के सरकार और धर्म के खिलाफ शिक्षाओं के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और करीब 6 महीने बाद इस शर्त पे रिहा किया गया कि ओशो अमेरिका हमेशा के लिए छोड़ देंगे I 1985 में ओशो ने अमेरिका छोड़ दिया और अन्य पश्चिमी देशो का रुख किया I लेकिन चर्च के दबाव में सभी पश्चिमी देशो ने ओशो का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया I अमेरिका के पडोसी देश उरुग्वे ने कुछ दिन तक ओशो को शरण दिया, लेकिन अमेरिका के दबाव में उसने भी ओशो पे प्रतिबन्ध लगा दिया I अब ओशो के पास भारत वापिस आने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था I ओशो भारत वापिस आकर ओशो मैडिटेशन रिसोर्ट में उपदेश देने लगे I
 मृत्यु- 19 जनवरी, 1990 को पुणे के ओशो मैडिटेशन रिसोर्ट में ओशो का निधन हो गया I ओशो का निधन भी बड़े रहस्यमय परिस्थितियो में हुआ I कुछ लोग कहते है की ओशो ने खुद देह त्याग किया,  कुछ लोगो का मानना है कि ओशो को अमेरिका में कैद के दौरान 'हीलियम' नाम का ज़हर (slow poison) दिया गया, जबकि ओशो के परिवार के सदस्यों ने कुछ लोगो पर प्रॉपर्टी के लिए हत्या करने का आरोप लगाया I क्योकि ओशो के पास देश-विदेश में अरबो की प्रॉपर्टी थी I लेकिन जो भी कारण रहा हो ओशो के चाहने वाले ओशो के मृत्यु को ही नकारते है, उनका मानना है कि ओशो भगवान थे और ओशो ने न तो कभी जन्म लिया और नहीं मरे ओशो तो सिर्फ कुछ सालो के लिए इस धरती पर आये थे I
ओशो के बारे में अनसुने तथ्य- 
  1. ओशो शब्द लैटिन भाषा के 'ओशनिक' से लिया गया है जिसका मतलब है सागर में विलीन हो जाना I
  2. ओशो के द्वारा दिए गए उपदेशो को किताबो में संकलित कर प्रकाशित किया गया और ऐसे किताबो की संख्या 500 से ज्यादा है, जिनका सभी प्रमुख भाषाओ में अनुवाद किया गया है I
  3. ओशो की किताबो से आज भी अरबो रूपये की रॉयल्टी आती है I
  4. ओशो द्वारा लिखित 'सम्भोग से समाधि तक़ (Sex to superconsciousness)' इंटरनेशनल बेस्ट सेलर है, यह किताब 60 से ज्यादा भाषाओ में उपलब्ध है I
  5. ओशो द्वारा स्थापित ओशो मैडिटेशन रिसोर्ट, पुणे विदेशियों का प्रमुख आकर्षण केंद्र है I
  6. ओशो ने धर्मरहित और सामाजिक मान्यताओं से मुक्त समाज की बात कही , जिसमे प्रत्येक व्यक्ति के पास अपने तरीके से ज़िन्दगी जीने की आज़ादी हो I
  7. ओशो ने एक वैश्विक राज्य की बात की I
  8. ओशो दुनिया के इतिहास में शायद पहले ऐसे दार्शनिक थे, जिनके प्रवेश को 21 देशो(अमेरिका, स्वीडन, इंग्लैंड, रूस, जर्मनी, फ्रांस, ग्रीस, उरुग्वे, कनाडा सहित ) ने प्रतिबंधित कर रखा था I  
  9. ओशो अपने को भगवान मानते थे I उनके अनुसार 23 वर्ष की उम्र में जबलपुर में एक पार्क में एक पेड़ के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था I
  10. फ़िल्मी दुनिया के कई सितारें और राजनेता ओशो के अनुयायी थे, जिनमे प्रमुख विनोद खन्ना, महेश भट्ट और परवीन बॉबी शामिल है I विनोद खन्ना ने तो अपने स्टारडम को छोड़ कर अमेरिका के रजनीशपुरम जाकर ओशो के आश्रम में पांच साल बिताये I
  11. ओशो मौत को एक उत्सव मानते थे और यही कारण है कि उनके पुणे स्थित पुणे योग केंद्र में किसी की भी मौत पर मातम की जगह ऊत्सव मनाया जाता था I ओशो के मौत पर भी उनकी इच्छानुसार जश्न मनाया गया I



2 comments:

  1. Abhishe ji is it right to say him Sex Guru?

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  2. Yes I agree it's not right to say him sex guru.

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