Friday, November 1, 2019

धारा 370 क्या है और कैसे लागू हुआ

भारतीय संविधान की सबसे चर्चित और विवादास्पद धारा 370 को आख़िरकार नरेंद्र मोदी सरकार ने समाप्त कर दिया I भारतीय जनसंघ जिसे वर्तमान में भाजपा के नाम से जाना जाता है, का गठन ही इस विवादास्पद धारा को लागू करने के विरोध में हुआ था I जनसंघ के गठन के समय ही धारा 370 पार्टी के मुख्य एजेंडे में था पार्टी का नाम बदला, नेता बदले, नेतृत्व बदला, चुनाव चिन्ह बदला लेकिन यह धारा पार्टी के मुख्य एजेंडे में बना रहा और आख़िरकार 72 सालो के बाद इस धारा को समाप्त कर दिया गया I जम्मू और कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली इस धारा के बारे में चर्चा करने से पहले सिलसिलेवार तरीके से इसके इतिहास को जान लेना आवश्यक है I 
25 जुलाई, 1947 - तब जबकि यह स्पष्ट हो गया था कि भारत को आज़ाद कर दिया जायेगा I यह भी निर्धारित कर लिया गया था कि भारत दो हिस्से में बंटेगा हिंदुस्तान और पाकिस्तान I लेकिन सबसे बड़ी समस्या उन छोटे- छोटे राज्यों की थी जो नवाबो और राजाओ के अधीन थे I उस समय तक़रीबन 552 ऐसी रियासतें थी जोकि नवाबो और राजाओ के अधीन थी I इस स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती इन रियासतों को विलय के लिए तैयार करना था I इसी उद्देस्य से तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड मौन्टबेटन ने 25 जुलाई, 1947 को सभी रियासतों के प्रमुखों की एक मीटिंग बुलाई और इनसे हिंदुस्तान या पाकिस्तान में से किसी एक के साथ जाने के लिए कहा गया I ज्यादातर रियासतों के प्रमुखों ने मसौदे पर हस्ताक्षर कर दिया I लेकिन कुछ रियासतों के प्रमुखो ने अपने को दोनों देशो से अलग रखने का निर्णय लिया I जम्मू और कश्मीर भी उन्ही में से एक रियासत थी I
सितंबर, 1947 - जम्मू और कश्मीर के राजा हरि सिंह द्वारा जम्मू और कश्मीर को अलग रखने के निर्णय के बाद पाकिस्तान ने जम्मू और कश्मीर के ऊपर आक्रमण कर दिया , जिससे जम्मू और कश्मीर का पाकिस्तान में विलय कराया जा सके I जम्मू और कश्मीर का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में आ गया I
26 अक्टूबर, 1947 - पाकिस्तान द्वारा जम्मू और कश्मीर का बड़ा हिस्सा कब्जे में लेने के बाद वहां के राजा हरि सिंह ने भारत से मदद की गुहार लगाई और जम्मू और कश्मीर के भारत में बिना शर्त विलय का प्रस्ताव रखा I उसके बाद सरदार पटेल ने सेना भेजने का निर्णय लिया 
27 अक्टूबर, 1947 - 27 अक्टूबर, 1947 को तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड माउंटबेटन ने जम्मू और कश्मीर के विलय को मंज़ूरी दे दी I इस तरह से जम्मू और कश्मीर का भारत में विलय हुआ I
17 अक्टूबर, 1949 - जवाहर लाल नेहरू मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री और जम्मू और कश्मीर के राजा हरि सिंह के पूर्व दीवान गोपाल स्वामी आयंगर ने लोक सभा में बोलते हुए जम्मू और कश्मीर के लिए अस्थायी तौर पे कुछ विशेषाधिकार की मांग की I लोकसभा में बोलते हुए आयंगर ने कहा कि पाक अधिकृत कश्मीर से लगातार पलायन के कारण आंतरिक हालत ठीक नहीं है I इसलिए अभी भारतीय संविधान जम्मू और कश्मीर में लागू करना ठीक नहीं है,  जैसे ही हालत सामान्य हो जाये संविधान लागू कर दिया जाये I आयंगर के मांग पर नेहरू ने संविधान सभा की संस्तुति पर जम्मू और कश्मीर को विशेषाधिकार वाली धारा 370 संसद में पास करा दिया I संविधान सभा की संस्तुति पर लागू किया गया यह अंतिम धारा था I यह धारा कुछ समय के लिए अस्थायी तौर पे लागू किया गया था I धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार -
1 .रक्षा, संचार और विदेश के अलावा जम्मू और कश्मीर के पास अपना कानून बनाए का अधिकार है I
2 .भारतीय संविधान की धारा 356 और धारा 360 जो आपातकाल लगाने से सम्बंधित है जम्मू और कश्मीर में लागू नहीं होगा I
3 .जम्मू और कश्मीर से बाहर का निवासी राज्य में ज़मीन नहीं खरीद सकता I
4 .राज्य विधानसभा द्वारा पारित किसी भी विधेयक को भारत के किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दिया जा सकता I
21 अक्टूबर, 1951 - पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लिकायत अली खान और भारतीय प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के बीच दिल्ली समझौते और धारा 370 लागू करने के विरोध में नेहरू मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री श्यामा प्रसाद मुख़र्जी ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि 'एक राज्य में दो प्रधान, दो निशान और दो विधान नहीं चलेगा ' I डॉ. श्यामा प्रसाद मुख़र्जी ने धारा 370 हटाने और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर अलग राजनीतिक दल बनाया जो भारतीय जनसंघ के नाम से जाना गया I
11 मई, 1953 - जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुख़र्जी ने धारा 370 के विरोध में जम्मू और कश्मीर में बिना परमिट के प्रवेश करने का प्रयास किया I 11 मई , 1953 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुख़र्जी को गिरफ्तार कर लिया गया I उस समय जम्मू और कश्मीर में प्रवेश के लिए परमिट लेना पड़ता था I 
23 मई, 1953 - डॉ. श्यामा प्रसाद मुख़र्जी को गिरफ्तार कर श्रीनगर जेल में रखा गया I जहां 23 मई, 1953 को  संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई, जोकि काफी विवादित रहा I  डॉ. श्यामा प्रसाद मुख़र्जी की मृत्यु के बाद जम्मू और कश्मीर में प्रवेश के लिए प्रवेश लेने वाला प्रावधान ख़तम कर दिया गया I
14 मई , 1954 - 14 मई, 1954 को प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और जम्मू और कश्मीर के अंतरिम प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला के बीच हुए समझौते के अंतर्गत धारा 370 में एक और विवादित अनुक्षेद 35A जोड़ा गया और भारत के राष्ट्रपति द्वारा इसको लागू किया गया I 35A का काफी विरोध किया गया इस अनुक्षेद के अंतर्गत -
1 .जम्मू और कश्मीर को अपनी नागरिकता को पुनर्परिभाषित करने का अधिकार दिया गया I
2 .जम्मू और कश्मीर से बाहर का कोई भी व्यक्ति राज्य की नागरिकता नहीं ले सकता I
3 .जम्मू और कश्मीर से बाहर का कोई भी व्यक्ति राज्य में व्यापर स्थापित नहीं कर सकता I
4 . जम्मू और कश्मीर से बाहर के किसी भी व्यक्ति से शादी करने पर महिलाओ के नागरिकता सहित सभी अधिकार छीन लिए जायेंगे I
5 अगस्त , 2019 - जनसंघ की शुरुआत जिस धारा 370 के विरोध में की गई थी, वह पार्टी का मुख्य एजेंडा बना रहा I जनसंघ का नाम बदला, निशान बदला, नेतृत्व बदलता रहा लेकिन धारा 370 हटाने का मुद्दा ज़िंदा रहा I  धारा 370 लागू होने के 72 सालो बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली पूर्ण बहुमत वाली भाजपा सरकार ने आख़िरकार धारा 370 समाप्त कर दिया, जिसको संसद के दोनों सदनों में पास कर दिया गया और राष्ट्रपति द्वारा मंज़ूरी मिल गई I 
कांग्रेस के पूर्व सरकारों ने धारा 370 हटाने का प्रयास क्यों नहीं किया ?
 यह बिलकुल स्पष्ट था कि धारा 370 अस्थायी रूप से जोड़ा गया था और इसे सामान्य बहुमत से कभी भी भारत का राष्ट्रपति समाप्त कर सकता है I अब सवाल उठता है कि फिर 72 साल कैसे लग गए इसे हटाने में I इन 72 सालो में 60 साल कांग्रेस ने राज किया, तो निश्चित रूप से सबसे पहले यह प्रश्न कांग्रेस से ही पूछा जाना चाहिए I जवाब स्पष्ट सा है कांग्रेस ने कभी भी धारा 370 को हटाने का प्रयास नहीं किया I जिसके चार प्रमुख कारण थे -
1 .धारा 370 जवाहर लाल नेहरू द्वारा लाया गया था जिन्हे कांग्रेस अपना आदर्श मानती है I अब यदि कांग्रेस धारा 370 हटाने का प्रयास करती या इसका विरोध करती है, तो इसका सीधा मतलब नेहरू को गलत साबित करना है I 
2 .कांग्रेस को लगता था कि यदि धारा 370 का वह विरोध करती है या हटाने का प्रयास करती है तो जम्मू और कश्मीर से वह अपना जनाधार खो देगी I 
3 .कांग्रेस अच्छे से इस चीज़ से वाकिफ थी कि धारा 370 हटाने से घाटी में उपद्रव जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है जिससे से वह बचना चाहती थी I 
4. कांग्रेस को यह भी डर था कि अंतराष्ट्रीय विरादरी की तरफ से विरोध का सामना करना पड़ सकता है I 
जनता पार्टी सरकारों ने धारा 370 हटाने का प्रयास क्यों नहीं किया ?
 भारत में जनता पार्टी सरकारों ने भी कभी धारा 370 का विरोध नहीं किया और नही हटाने का प्रयास किया जिसका प्रमुख कारण रहे -
1.जनता पार्टी को लगता था कि ऐसा करने से उनके धर्मनिरपेक्ष छवि को नुकसान पहुँच सकता है I 
2. जनता पार्टी कभी भी इतनी मज़बूत स्थिति में नहीं रही कि कांग्रेस के समर्थन के बिना दोनों सदनों में यह बिल पास करा सके I  
वाजपेयी ने धारा 370 हटाने का प्रयास क्यों नहीं किया ? 
डॉ श्यामा प्रसाद मुख़र्जी और पंडित दींनदयाल उपाध्याय की मृत्यु के बाद धारा 370 के मुद्दे को जीवित रखने की जिम्मेदारी अटल बिहारी वाजपेयी की थी,  जिसको उन्होंने बखूबी निभाया I जब केंद्र में वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा की पहली बार सरकार बनी I तब उनके समर्थको की उम्मीदे बढ़ी कि वाजपेयी धारा 370 हटा सकते हैं I लेकिन ऐसा नहीं हुआ जिसके प्रमुख कारण रहे -
1. वाजपेयी चाहते हुए भी धारा 370 नहीं हटा सके क्योकि संसद के दोनों सदनों में बहुमत नहीं था I
2 .अगर किसी तरह से संसद में पास भी करा दिया तो राष्ट्रपति से मंज़ूरी नहीं मिलता I

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